जयश्री राठौड़,,
आई.एन.वी.सी,,
चंडीगढ़,,
हरियाणा साहित्य अकादमी वर्ष 2011 के  लिए  14 साहित्यकारों को सम्मानित करेगी। इसी वर्ष से पांच लाख की सम्मान राशि वाले आजीवन साहित्य साधना सम्मान  भी शुरू किया गया है। पिछले वर्ष से ही हरियाणा साहित्य रत्न सम्मान की राशि 2 लाख से बढ़ाकर 2.50 लाख, महाकवि सूरदास सम्मान की राशि 1 लाख से बढ़ाकर 1.5० लाख की गई है। पिछले वर्ष से ही 1-1 लाख रुपये की राशि के महिला रचनाकारों के लिए अलग से श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान तथा ओमप्रकाश आदित्य-अल्हड़ बीकानेरी हास्य सम्मान व जनकवि मेहर सिंह सम्मान शुरू किए गए हैं। अब तक 102 साहित्यकारों को सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2011 के लिए बाबू बालमुकुन्द गुप्त सम्मान (हिन्दी साहित्य) के लिए साहित्यकार राम कुमार आत्रेय, कुरुक्षेत्र  का चयन किया गया है।  उन्हें एक लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।
हिन्दी व हरियाणवी की विभिन्न विधाओं में इनकी कुल 12 पुस्तकें प्रकाशित है – बुझी मशालों का जुलूस, बूढ़ी होती बच्ची, आंधियों के खिला$फ, रास्ता बदला ईश्वर, इक्कीस जूते, आंखों वाले अंधे, छोटी सी बात, पिलूरे तथा अन्य कहानियां, भारतीय संस्कृति की प्रेरक कहानियां, समय का मोल, परियां झूठ नहीं बोलती, सच्चाई कड़वी घणी। दैनिक ट्रिब्यून में हर रविवार के संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित होने वाले ‘खरीखोटी’ का लगातार तीन वर्षों तक लेखन। सारिका, कादंबिनी, हंस, कथादेश, कथाक्रम, आकार इत्यादि कई साहित्यिक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। अनेक रचनाओं का अंग्रेजी, उडिय़ा, पंजाबी, गुजराती तथा मराठी भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित। विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित। लाला देशबन्धु गुप्त सम्मान (साहित्यिक पत्रकारिता) के लिए केवल कृष्ण पाठक, जींद  का चयन  किया गया है। उन्हें इस पुरस्कार के तहत एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।  इनकी चार पुस्तकें प्रकाशित हैं। युवा देश के जागो, जीवन तेरे कितने रंग, वन्दना के स्वर, पीड़ा मन की है। इन्हें कई संस्थाओं द्वारा स मानित किया जा चुका है। ‘रवीन्द्र ज्योति’ मासिक पत्रिका का पिछले 41 वर्षों से संपादन कर रहे हैं। इस पत्रिका के माध्यम से इन्होंने सारे भारत में हिन्दी का प्रचार किया है। पं. लखमीचंद सम् मान (हरियाणा की कला, संस्कृति, इतिहास लोक साहित्य) के लिए  सावित्री वशिष्ठ, सोनीपत का चयन किया गया है। उन्हें इस पुरस्कार के तहत एक लाख रुपये  की राशि से सम्मानित किया जाएगा। इनकी अब तक 17 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं – ब्रज और हरियाणा के लोक साहित्य में चित्रित लोक जीवन, आगे बढ़ता हरियाणा, हरियाणवी कहानियां, मेरे गीत, अम्मा, हरियाणा में सावन, हरियाणा का ऐतिहासिक नगर तरावड़ी, हरियाणा की वीर जातियां, हरियाणवी धर्म-गीत, हरियाणा के गीत बांकली, हरियाणा के तीज त्यौहार, हजार बरस की नींव, साहित्यिक एवं ऐतिहासिक ‘गांव गुडिय़ानी’ भारत के राष्ट्रपति खण्ड-, द्ब भारत के राष्ट्रपति, खण्ड-द्बद्ब भारत के राष्ट्रपति-खण्ड-द्बद्बद्ब तथा हरियाणा की लोक संस्कृति। इन्हें शिक्षा संस्था द्वारा राज्य पुरस्कार तथा राजकीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके है। जनकवि मेहर सिंह सम्मान (हरियाणा की कला, संस्कृति, इतिहास लोक साहित्य हरियाणवी भाषा में विशेष योगदान) के लिए  स्व. रघुबीर सिंह मथाना, कुरुक्षेत्र का चयन किया गया है। इस सम्मान के तहत एक लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। इनकी 14 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें दो काव्य पुस्तक, काव्य रोशनी, महक माटी की, कहानी   संग्रह-कोहरा, भटकी गलियां-बहके लोग, आत्र्तनाद, नाटक खाली हाथ, एकांकी संग्रह-बदलते पात्र, दर्शन-साहित्य-संत ब्रह्मानन्द सरस्वती व्यक्तित्व एवं दर्शन, लोक साहित्य-हरियाणा लोकनाट्य परंपरा एवं कवि शिरोमणि प. मांगे राम, स्वतन्त्रता सेनानी एवं कवि फौजी मेहर सिंह, हरियाणा : लोकोक्तियों के झरोखे से, पं. मांगेराम ग्रन्थावली, फौजी मेहरसिंह ग्रंथावली, उपन्यास बल्लभगढ़ का नाहर हैं। डॉ. मथाना को अकादमी द्वारा पुस्तक पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है। हरियाणा गौरव सम्मान (हरियाणा में जन्मे ऐसे साहित्यकार जो हरियाणा से बाहर रहकर साहित्य सृजन कर रहे हों।) के लिए डॉ. पुण्यमचंद मानव, बेंगलूरू का चयन किया गया है। उन्हें एक लाख रुपये की राशि से सम्मानित किया जाएगा। इनकी छह पुस्तकें प्रकाशित हैं – वैदिक पथ प्रदर्शक, मधुप्याला, राष्ट्र पूजा, शोध प्रबन्ध-‘‘हिन्दी लावणी साहित्य पर हिन्दी सन्त साहित्य का प्रभाव’’, जीवन गीत, काव्यांजलि। भारत में अनेक  याति प्राप्त पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं एवं लेख प्रकाशित हैं। भिवानी से प्रकाशित तीन हिन्दी साप्ताहिक पत्रों, अपना देश, जननायक और पूर्वी पंजाब का सफलतापूर्वक संपादन किया है। हरियाणा में रचित हिन्दी साहित्य, हरियाणा के हिन्दी सेवी, इनसाइक्लोपीडिया आफ हरियाणा आदि ग्रन्थों में भी जीवन और कृतित्व प्रकाशित है। आदित्य-अल्हड़ हास्य सम्मान (राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी/हरियाणवी में हास्य तथा व्यंग्य के क्षेत्र में श्रेष्ठ योगदान के लिए) के लिए माणिक वर्मा, भोपाल का चयन किया गया है। उन्हें इस सम्मान के तहत एक लाख रुपये की राशि से सम्मानित किया जाएगा। इनके छह संकलन प्रकाशित हैं – आदमी और बिजली का खंभा , महाभारत अभी जारी है,  मेरे मुल्क के मालिको जवाब दो, आखिरी पत्ता ($गज़ल संग्रह), यादों की कंदील (दोहा संकलन), राम केवट संवाद। भारत की श्रेष्ठ पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित हैं। काका हथरसी पुरस्कार, टेपा पुरस्कार, अट्टहास पुरस्कार सहित अन्य कई संस्थाओं से स मानित हैं। लगभग भारत की सभी श्रेष्ठ पत्रिकाओं में जैसे धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, हंस, रविवार, ज्ञानोदय, काद िबनी, सारिका इत्यादि में रचनाएं प्रकाशित हैं। श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान (हिन्दी/हरियाणवी की रचनाकार ) के लिए  साहित्यकार  सुधा जैन, पंचकूला का चयन किया गया है। उन्हें इस पुरस्कार के तहत एक लाख रुपये की राशि से स मानित किया जाएगा। इनकी 12 पुस्तकें प्रकाशित हैं। जिनमें आधुनिक हिन्दी कविता में व्यंग्य के विविध रूप, गुलाबों का शहर, तुरूपचाल, सैलाब, मौसम गर्म है, पहली दस्तक, आधुनिक नारी : दशा और दिशाएं, रोशनी की किरणें, कैसी हवा चली, समय का सच, इक्कीसवीं सदी, सुधा जैन की श्रेष्ठ कविताएं विशेष चर्चित हैं। हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा दो बार पुरस्कृत तथा अन्य कई संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत। विशेष साहित्य सेवी सम्मान के लिए साहित्यकार लक्ष्मण सिंह, रोहतक का चयन किया गया है। उन्हें इस स मान योजना के तहत 51 हजार रुपये की राशि से सम्मानित किया जाएगा।
इनकी नौ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं-रोशनी, कोहरा, महक माटी की, भटकी गलियां, चन्द्रिका, घटते-बढ़ते हाशिये, हरियाणवी दोहे, हरियाणवी दोहा सतसई तथा गीता बरी। गीता बरी नामक पुस्तक श्री मदभगवद्गीता का काव्य भाष्य है जो संपूर्ण रूप से गेय है। लालचन्द गुप्त, कुरुक्षेत्र का भी विशेष साहित्य सेवी सम्मान के लिए चयन किया गया है। उन्हें इस सम् मान योजना के तहत 51 हजार रुपये की राशि से स मानित किया जाएगा। दो दर्जन ग्रन्थों के लेखक/संपादक ‘मंगल’ ने मध्यकालीन एवं आधुनिक हिन्दी-साहित्य और हरियाणा में रचित साहित्य के विविध पक्षों पर तो जमकर लिखा है। नयी कहानी’, ‘हिन्दी-कहानी का इतिहास’, ‘कहानीकार सुदर्शन’ और ‘कहानी-माला’ आपकी बहुचर्चित-बहुप्रशंसित कृतियां हैं। मनमोहन सपरा, सिरसा का  विशेष साहित्य सेवी सम्मान के लिए चयन किया गया है। उन्हें इस स मान योजना के तहत 51 हजार रुपये की राशि से स मानित किया जाएगा। अब तक 9 कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जिनमें ‘वक्त की साजिश के खिलाफ’, आदमी जिन्दा है, काले पृष्ठों पर उकरे शब्द, कितना अंधेरा है, रक्तबीज आदमी है विशेषरूप से चर्चित हैं। शमीम शर्मा, हिसार का विशेष साहित्य सेवी सम्मान के लिए चयन किया गया है। उन्हें इस सम्मान योजना के तहत 51 हजार रुपये की राशि से स मानित किया जाएगा। इनकी आठ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमेंं-अजन्मी बेटी की चि_ी, हिन्दुस्तान के ससुर, चौपाल के मखौल, चौपाल के चाले, चौपाल पै ताऊ, पंचनाद, हस्ताक्षर तथा हरियाणा एन्साइक्लोपीडिया संदर्भ ग्रंथ (दस खंडों में) (संपादित)। दिनेश रघुवंशी, फरीदाबाद का विशेष साहित्य सेवी सम्मान के लिए चयन किया गया है। उन्हें इस स मान योजना के तहत 51 हजार रुपये की राशि से सम्मानित किया जाएगा। संदीप जोशी, चंडीगढ़ का विशेष साहित्य सेवी स मान के लिए चयन किया गया है। उन्हें इस स मान योजना के तहत 51 हजार रुपये की राशि से स मानित किया जाएगा। जोशी, दैनिक ट्रिब्यून में लगभग 26 वर्षों से समाज, राजनीति व साहित्यिक कार्टून स्तंभ लिख रहे हैं। वर्तमान में ट्रिब्यून समाचार पत्र समूह में चीफ आर्टिस्ट। ओ.पी. कादयान, हिसारका विशेष साहित्य सेवी सम्मान के लिए चयन किया गया है। उन्हें इस स मान योजना के तहत 51 हजार रुपये की राशि से सम्मानित किया जाएगा। इनकी 5 पुस्तकें प्रकाशित जो इस प्रकार हैं – आन्धयां की लाठी, हरिया

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