Monday, July 13th, 2020

हरियाणा जनहित कांग्रेस के पांच विधायकों के कांग्रेस पार्टी में विलय को संविधानिक मान्यता

हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष श्री कुलदीप शर्माआई,एन,वी,सी ,

चण्डीगढ़,
 हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष श्री कुलदीप शर्मा ने आज यहां हरियाणा जनहित कांग्रेस (बीएल) के पांच विधायकों के कांग्रेस पार्टी में विलय होने के मामले पर अपना निर्णय देते हुए कहा कि विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष श्री हरमोहिन्द्र सिंह चटठा इनके विलय को पहले ही स्वीकार कर चुके थे, परन्तु उनके आदेशों को कभी चुनौती नहीं दी गई। विधानसभा अध्यक्ष ने 29 पृष्ठों में दिये गए अपने फैसले के उपरान्त हरियाणा विधानसभा परिसर में एकपत्रकार सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्होंने भारत के संविधान की दसवीं सूची, जो विधायकों के दो तिहाई बहुमत के साथ समर्थन किये गए विलय की अनुमति प्रदान करती है, के प्रावधानों के अनुरूप हजकां (बीएल) का कांग्रेस के साथ विलय को स्वीकार किया है।श्री शर्मा ने कहा कि मामले में निर्णय लेने के लिए इस संबंध में प्राप्त हुई कुल 14 याचिकाओं को शामिल क र एक याचिका मान लिया गया था। प्राप्त हुई याचिकाओं के संबंध में विवरण देते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि मामले में कुलदीप बिश्नोई से 9 दिसंबर, 2009 को 5 याचिकाएं, अशोक अरोड़ा से 2 फरवरी, 2010 को तीन याचिकाएं, शेर सिंह बड़शामी से 4 फरवरी, 2010 को 3 याचिकाएं तथा ए एस चौटाला से 23 फरवरी को तीन याचिकाएं प्राप्त हुई थी। इसके अलावा, इस मामले में 68 गवाह भी पेश हुए तथा कुलदीप बिश्नोई अपनी ओर से एकमात्र गवाह के रूप में पेश हुए। अध्यक्ष ने मामले में दोनों तरफ के अधिवक्ताओं द्वारा दिये गए उनके सहयोग के लिए भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के विरूद्घ कुलदीप बिश्नोई द्वारा सही नीयत से सुनवाई न करने के लगाए गए आरोपों को ऊच्च न्यायालय में उसके वकील द्वारा वापिस ले लिये गए थे।
उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष का कार्यभार उन्होंने 4 मार्च, 2011 को संभाला था और उसके उपरान्त इस मामले में तेजी से सुनवाई की गई और अंत में निर्णय लियाश्री कुलदीप शर्मा ने कहा कि एक वकील होने के नाते वे न्यायिक प्रणाली एवं अदालतों का पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि मामले में निर्णय के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अंतिम तिथि निर्धारित कर दी गई थी। दोनों राजनीतिक पार्टियों के विलय के संबंध में निर्णय सही है।जब एक पत्रकार ने उनका ध्यान हजकां(बीएल) के एक विधायक द्वारा हजकां (बीएल) के चार विधायकों के एक दिन पूर्व कांग्रेस में शामिल होने की ओर दिलाया गया, पर श्री शर्मा ने कहा कि विलय एक निरंतर प्रक्रिया है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में विलय केवल तभी संभव है, यदि दो तिहाई विधायक समर्थन करें और इस मामले में भी नियमानुसार यही हुआ है। उन्होंने कहा कि हालांकि अध्यक्ष के निर्णय को चुनौती दी जा सकती है, यदि कानूनी रूप से सही न हों।श्री शर्मा ने कहा कि हालांकि सात निदर्लीय विधायकों के संबंध में याचिकाएं अब भी उनके पास लम्बित हैं। जब उनसे हजकां की एक राजनीतिक पार्टी के रूप में स्थिति के बारे में टिप्पणी करने को कहा तो उन्होंने कहा कि मूल राजनीतिक पार्टी का कांग्रेस के साथ विलय हो गया है तथा हजकां की स्थिति निर्वाचन आयोग से पूछी जा सकती है। उन्होंने कहा कि हालांकि उनसे पूर्व के विधानसभा अध्यक्ष श्री हरमोहिन्द्र सिंह चटठा अपने आदेशों में दोनों पार्टियों के विलय को स्वीकृत कर चुके थे

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