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Thursday, April 22nd, 2021

हमारी सरकार ने आते ही खत्म की बाधाएं

आई एन वी सी न्यूज़
जयपुर,
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की भावना थी कि देश में शासन दिल्ली में बैठकर नहीं, गांव के स्तर से हो। उनके ग्राम स्वराज्य के सपने को तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने 73वें संविधान संशोधन के माध्यम से साकार किया। इस संविधान संशोधन में पंचायतीराज संस्थाओं में सभी वंचित वर्गों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई।

श्री गहलोत मंगलवार को बिड़ला सभागार में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की 75वीं जयन्ती पर आयोजित ’पंचायतीराज एवं स्वायत्त शासन सशक्तीकरण’ संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्व. राजीव गांधी ने पंचायतीराज व्यवस्था को मजबूत बनाने एवं सत्ता का विकेन्द्रीकरण कर आमजन को उसका लाभ पहुंचाने के लिए क्रांतिकारी सुधार किए। ग्राम पंचायतों के लिए 73वें संशोधन और शहरी क्षेत्रों के लिए 74वें संशोधन के माध्यम से जनप्रतिनिधियों का इन संस्थाओं की संरचना का पिरामिड बनाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में सत्ता के विकेन्द्रीकरण के इस सुधार को अगले चरण में ले जाने के लिए हमारी सरकार ने पंचायतीराज संस्थाओं को फण्ड्स, फंक्शन्स और फंक्शनरीज का स्थानान्तरण किया, लेकिन सरकार बदलते ही पंचायतीराज संस्थाओं को मिले इन अधिकारों को ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया। भारतीय संविधान में 73वें एवं 74वें संशोधन के माध्यम से पहली बार पंचायती राज व्यवस्था और स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया। आज हम ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतीराज का जो मजबूत आधार देख रहे हैं, वह उन संवैधानिक संशोधनों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. राजीव गांधी ने संविधान में संशोधन कर सत्ता में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया। पंच, सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख जैसे पदों पर प्रतिनिधित्व मिलने से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने पहली बार घर की दहलीज के बाहर कदम रखे और घूंघट उठाकर सार्वजनिक जीवन में आई। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने पंचायतीराज एवं स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए शैक्षिक योग्यता की बाध्यता तय कर दी थी। हमारी सरकार ने आते ही वह बाध्यता खत्म कर दी है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इन संस्थाओं में जनप्रतिनिधि के रूप में भागीदारी करने का अधिकार मिले।

श्री गहलोत ने कहा कि आज राजस्थान में 60 हजार ई-मित्र कार्य कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इनकी संख्या और बढेगी। इन ई-मित्र केन्द्रों पर 500 से अधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आईटी क्षेत्र का इतना विस्तार स्व. श्री राजीव गांधी की परिकल्पना से ही संभव हो पाया है। उन्होंने 15 साल पहले कम्प्यूटर, मोबाइल, इन्टरनेट आदि सेवाओं के लिए आधारभूत योजनाओं की शुरूआत की थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. राजीव गांधी के आईटी, पंचायतीराज सुधार एवं अन्य क्षेत्रों में किए गए योगदान को हमारा देश सदैव याद रखेगा। उनकी इन सेवाओं को वर्षभर चलने वाले राजीव गांधी जयन्ती समारोह के माध्यम से आमजन तक पहुंचाने की आवश्यकता है, जिससे युवा पीढ़ी प्रेरणा ले सके।

श्री गहलोत ने कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे राज्य सरकार की योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा आमजन तक पहुंचाएं, ताकि उन योजनाओं का लाभ आम जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंच सके।

उपमुख्यमंत्री एवं पंचायती राज मंत्री श्री सचिन पायलट ने कहा कि स्व. श्री राजीव गांधी की पंचायती राज की स्थापना के पीछे मंशा यह थी कि व्यवस्था कि बागड़ोर एक स्थान पर  केन्दि्रत न होकर असंख्य व्यक्तियों के हाथ में हो और वर्तमान सरकार उनकी दूरगामी सोच के अनुरूप कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पंचायतों को सुदृढ़ करने का काफी प्रयास किया जा रहा है। मनरेगा में वर्तमान में लाखों लोग रोजगार प्राप्त कर रहे है। उन्हाेंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में आमजन का ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा पंचायती राज अधिनियम में संशोधन कर शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।

श्री पायलट ने कहा कि पूरे वर्ष राजीव गांधी की जयन्ती के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिससे उनके व्यक्तित्व तथा कार्यप्रणाली के बारे में अधिक से अधिक युवा जान पाए एवं उनसे प्रेरित हो सकें।

कार्यक्रम में स्वायत्त शासन मंत्री श्री शांति धारीवाल ने कहा कि आईटीसी (सूचना, तकनीक एवं संचार) स्व. श्री गांधी की ही देन है जिससे देश आज आगे बढ़ पाया है। उन्होंने कहा कि स्व. श्री गांधी सबसे युवा प्रधानमंत्री थे और उनकी सोच थी देश के विकास में युवाओं की ज्यादा से ज्यादा सहभागिता हो इसलिए महिलाओं को पंचायत में 33 प्रतिशत आरक्षण, युवाओं की मतदान आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर मतदान का अधिकार उनके द्वारा दिया गया साथ ही महिलाओं सशक्तिकरण के लिये पंचायातों में 33 आरक्षण का प्रावधान करवाया। श्री धारीवाल ने कहा कि 73 वें एवं 74 वें संवैधानिक संशोधन से देश में स्वशासन को मजबूत बनाने, जवाबदेही बढ़ाने तथा जनभागीदारी में वृद्वि करने जैसे लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिली है।

मुख्य सचिव श्री डी.बी. गुप्ता ने कहा कि गांधी जी की ग्राम स्वराज्य की कल्पना को सही मायनों में स्व. श्री राजीव गांधी ने पूरा किया है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे इनकी कार्यक्षमता में वृद्वि हो। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्वशासन तथा सामाजिक आर्थिक विकास में पंचायतों की भूमिका अहम हैै।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजेश्वर सिंह ने कहा कि स्व श्री राजीव गांधी द्वारा 73 वें तथा 74 वें संवैधानिक संशोधन द्वारा पंचायती राज एवं स्वायत्त शासन संस्थाओं को मजबूत बनाकर समाज के सभी पिछड़े वर्गाें को सम्मान दिया गया है।
महापौर जयपुर नगर, श्री विष्णु लाटा, श्रीमती अंजना मेघवाल, जिला प्रमुख जैसलमेर, श्रीमती ममता देवी गागडिया, प्रधान पंचायत समिति लवाण (दौसा) तथा श्री बंशीधर गढ़वाल, सरपंच, ग्राम पंचायत नरसिंहपुरा ने ंपंचायती राज विभाग एवं नगर निगम से संबंधित अपनी उपलब्धियों एवं अनुभवों को साझा किया।

कार्यक्रम के अंत में शासन सचिव, स्वायत्त शासन श्री भवानी सिंह देथा ने सभी का आभार व्यक्त किया।

समारोह में शिक्षाविद् प्रो. सतीश कुमार और प्रो. कमलकांत पाण्डेय ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के बाद पंचायतीराज और नगरीय विकास संस्थाओं की कार्यविधि में आए सकारात्मक बदलाव पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग की राजीव गांधी जल संचय योजना का शुभारम्भ किया। उन्होंने योजना की मार्गदर्शिका का विमोचन तथा योजना की नई वेबसाइट और मोबाइल एप का लोकार्पण भी किया।

कार्यक्रम में राज्य मंत्रिपरिषद के सदस्य, विधायक, विभिन्न विभागों के अधिकारी बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।



 

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