Tuesday, February 18th, 2020

हमारा विषय है कम लागत पर बड़े पैमाने में रोजगार देना : उपेन्‍द्र त्रिपाठी

s2014060954303आई एन वी सी, दिल्ली,
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री उपेन्‍द्र त्रिपाठी ने आज ‘’रेगुलेटरी एंड फाइनेंशल बैरियर्स एंड चैलेंजिज इन पावर जैनरेशन फ्रॉम बॉयोमास’’ विषय पर एक कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस मौके पर श्री त्रिपाठी ने जैविक ऊर्जा उत्‍पादन के महत्‍व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपने हाई प्‍लांट लोड फैक्‍टर, कम उत्‍पादन लागत, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता और जैविक ऊर्जा के प्रमुख उत्‍पादक किसानों को होने वाले आर्थिक लाभों की वजह से जैव ईंधन, ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत के रूप में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसीलिए जैविक ऊर्जा का उत्‍पादन करना मंत्रालय के लिए एक महत्‍वपूर्ण विषय है। उन्‍होंने बताया कि भारत में इस समय जैविक ऊर्जा सयंत्रों की कुल क्षमता तकरीबन 4700 मेगावॉट है। श्री त्रिपाठी ने जैविक ऊर्जा परियोजनाओं के संचालन पर आने वाली उच्‍च लागत का जिक्र करते हुए कहा कि अनेक लाभों के बावजूद कई जैविक ऊर्जा परियोजनाओं को इस वक्‍त समस्‍याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार ऐसा खास तौर पर, जैविक ऊर्जा के दामों में लगातार होती वृद्धि के कारण हुआ है। दूसरी तरफ, जैविक ऊर्जा पर लगने वाले करों को एसईआरसी द्वारा जैविक ऊर्जा की बढ़ती लागत के अनुरूप संशोधित नहीं किया गया है। इसके अलावा, करों को तय करने के लिए एसईआरसी द्वारा कुछ अन्‍य मानदंडों की दरों में मौजूद असंगतियों पर ध्‍यान देकर उन्‍हें दुरूस्‍त किया जाना जरूरी है। मौजूदा वक्‍त में वित्‍तीय संस्‍थानो ने भी जैविक ऊर्जा परियोजनाओं पर पैसा लगाने में रूचि नहीं दिखाई, जिससे इस क्षेत्र में नये निवेश के लिए समस्‍याएं खड़ी हो गई हैं। जैविक ऊर्जा का वितरण करने वाली वितरण कंपनियों ने भी सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। इस क्षेत्र की तरक्‍की के लिए ये कंपनियां भी सक्रिय और उत्‍साहजनक भूमिका निभा सकती थी। श्री त्रिपाठी ने स्थिति में सुधार के लिए राज्‍य बिजली नियामक आयोगों से केंद्रीय बिजली नियामक आयोग (सीईआरसी) द्वारा हाल ही में अधिसूचित किये गये संशोधित नियमों का संज्ञान लेने की अपील की है, जिससे इनका लाभ जैविक ऊर्जा के उत्‍पादकों तक पहुंचाया जा सके, ताकि उनके संयंत्रों को कम खर्च में चलाया जा सके। सीईआरसी ने कुछ महत्‍वपूर्ण मानदंडों की दरों को स्‍वीकृति दी है और ईंधन के दामों में स्‍वतंत्र सर्वेक्षण पर आधारित वार्षिक संशोधन करने की सिफारिश भी की है। मंत्रालय ने जैविक ऊर्जा क्षेत्र को प्रभावित करने वाले कुछ महत्‍वपूर्ण मुद्दों के शीघ्र समाधान के प्रयास शुरू कर दिये हैं। इस कार्यशाला का आयोजन मंत्रालय द्वारा इस विषय से जुड़े सभी लोगों को एकसाथ लाने के लिए किया गया था, ताकि वे मिलकर विचार-विमर्श करें, जिससे जैविक ऊर्जा-क्षेत्र के सामने आ रही समस्‍याओं को दूर करके इस क्षेत्र को अपेक्षित गति प्रदान की जा सके। कार्यशाला में सीईआरसी, एसईआरसी के अध्‍यक्षों और सदस्‍यों के अलावा राज्‍य ऊर्जा विभागों, राज्‍य नोडल एजेंसियों और 15 से अधिक राज्‍यों की वितरण कंपनियों के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इसके अलावा, कार्यशाला में यूएनडीपी, वित्‍तीय संस्‍थानों, इंडियन बॉयोमास पावर एसोसिएशन और बॉयोमास प्रोजेक्‍ट डिवेलपर्स के अधिकारियों ने भी भाग लिया। कार्यशाला में जैविक ऊर्जा क्षेत्र को गति प्रदान करने के लिए राज्‍य स्‍तर पर नियामक और वित्‍तीय प्रशासन में जरूरी परिवर्तन लाने की आवश्‍यकता पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान पंजाब, हरियाणा और राजस्‍थान के उदाहरण सामने रखे गये जहां निवेश के अनुकूल नीतियों को अपनाया गया, जिसके चलते इस क्षेत्र के विकास में मदद मिली। इस कार्यशाला का आयोजन जैविक ऊर्जा परियोजना के तहत नवीन और नवीकरणीय मंत्रालय तथा यूएनडीपी/जीईएफ द्वारा संयुक्‍त रूप से किया गया। कार्यशाला में उपरोक्‍त परियोजना के क्रियान्‍वयन में आई समस्‍याओं और चुनौतियों से प्राप्‍त अनुभवों पर विचार-विमर्श किया गया। इस विचार-विमर्श का उद्देश्‍य चिन्हित की गई रूकावटों को दूर करके पर्यावरण के अनुकूल जैविक खाद ऊर्जा तकनीकी को अपनाना है, जिससे इस क्षेत्र को अधिक से अधिक वित्‍तीय सहायता मिल सके ताकि जैविक ऊर्जा के कारोबार को बढ़ाया जा सके।

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