विदेशों में जमा कालेधन के खिलाफ मोदी सरकार की लड़ाई को शुक्रवार एक महत्वपूर्ण सफलता मिली। स्विट्जरलैंड ने दूसरी बार भारत को स्विस बैंक के भारतीय खाताधारकों का ब्योरा सौंपा है। भारतीय नागरिकों और संस्थानों के फाइनेंशियल अकाउंट्स का यह ब्योरा स्विट्जरलैंड के साथ किए गए सूचनाओं का स्वत: आदान-प्रदान एईओआई के तहत मिला है।

भारत उन 86 देशों में शामिल है, जिनके साथ स्विट्जरलैंड के संघीय कर प्रशासन एफटीए ने इस साल एईओआई पर ग्लोबल स्टैंडर्ड्स फ्रेमवर्क के तहत फाइनेंशियल अकाउंट्स का ब्योरा साझा किया है। एफटीए ने एक बयान में कहा इस साल सूचना के आदान-प्रदान में लगभग 31 लाख वित्तीय खाते शामिल हैं। वर्ष 2019 में भी करीब इतने ही खातों की जानकारी दी गई थी। हालांकि, बयान में 86 देशों के बीच भारत के नाम का अलग से उल्लेख नहीं था, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि भारत उन प्रमुख देशों में है जिनके साथ स्विट्जरलैंड ने स्विस बैंकों के ग्राहकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के वित्तीय खातों के बारे में विवरण साझा किया है। अधिकारियों ने आगे कहा कि स्विस अधिकारियों ने भारत के अनुरोध पर पिछले एक साल में 100 से अधिक भारतीय नागरिकों और संस्थाओं के बारे में जानकारी साझा की है, जिनके खिलाफ कर चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों की जांच चल रही थी। अधिकारियों ने हालांकि गोपनीयता का हवाला देते हुए भारतीयों के मौजूदा खातों की संख्या या इनमें जमा धनराशि के बारे में ब्यौरा देने से इनकार किया। स्विस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी में पहचान, खाता और वित्तीय जानकारी शामिल है। इन जानकारी से कर अधिकारियों को यह पता करने में मदद मिलेगी कि क्या करदाताओं ने कर रिटर्न में अपने वित्तीय खातों के बारे में सही जानकारी दी है। गौरतलब है कि भारत को एईओआई के तहत स्विट्जरलैंड से पहला ब्योरा सितंबर 2019 में मिला था, जब स्विट्जरलैंड ने 75 देशों के साथ सूचना साझा की थी। PLC.

 
 

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