Tuesday, March 31st, 2020

स्वास्थ्य बर्बाद होने का खुलासा : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने आज पेश होंगे नगर निगम

imagesआई एन वी सी, संवाददाता, भोपाल, भानपुर कचरा खंती से निकलने वाले धुएं से लाखों लोगों की जिंदगी और हजारों एकड़ कृषि भूमि तबाह हो चुकी है। हाईकोर्ट ने इसी वजह से नगर निगम प्रशासन को चार साल पहले साफ-साफ आदेशित किया था कि, कचरा खंती में किसी भी हालत में आग नहीं लगे और खंती को समयबद्ध योजना बनाकर शहर के बाहर शिफ्ट करने की कार्रवाई करें। इसके बाद भी नगर निगम के अधिकारियों ने आपराधिक लापरवाही बरतते हुए खंती में लगातार आग लगी रहने दी और शिफ्टिंग की फाइल को ठंडे बस्ते में पटक दिया है।  यह गुहार लगाते हुए भानपुर कचरा खंती हटाओ अभियान समिति के अध्यक्ष अशफाक अहमद और उपाध्यक्ष तुलसीराम गौर ने बुधवार को राज्य मानव अधिकार आयोग को ज्ञापन सौंपते हुए लगाई है। इन्होंने बताया कि, कचरा खंती में 1974-75 से शहरभर का कचरा डंप किया जा रहा है। नगर निगम हर रोज शहरभर से 400 टन से ज्यादा कचरा बटोर कर इस खंती में अवैज्ञानिक तरीके से फेंक रहा है। कचरे में शहरभर के अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट, इंडस्ट्रीयल वेस्ट सहित मरे और सड़े हुए जानवर के साथ ही भारी मात्रा में प्लास्टिक पन्नियां होती हैं। इनको डिस्पोज करने के लिए नगर निगम के पास न तो कोई विशेषज्ञ दल है और न ही कोई संसाधन हैं। नतीजे में आस पास की करीब ढाई लाख की आबादी को कचरा खंती में आग लगने के बाद निकलने वाले जहरीले धुएं और असहनीय बदबू को भुगतना पड़ता है। इससे कमोबेश हर घर में बीमार पडे हैं और हर कोई खांसता रहता है और तेज जलन होने से आंखों से आंसू बहते रहते हैं। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि, लाखों लोगों को जीते जी नरक भोगना पड़ रहा है। नगर निगम प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया इसके बाद भी आज तक कचरा खंती को शहर के बाहर शिफ्ट करने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। जब भी नगर निगम के अफसरों से इस बारे में शिकायत की जाती है तो हर बार यही आश्वासन मिलता है कि, खंती को आदमपुर छावनी में शिफ्ट करने की प्लानिंग चल रही है। ऐसे में मानव अधिकार आयोग से मांग की गई है कि, खंती को तत्काल बंद करवा कर शहर के बाहर पूर्व से तयशुदा आदमपुर छावनी में शिफ्ट करवाने की कृपा करें। महीनेभर से धधक रही है खंती की आग : आयोग के सामने पेश की गई याचिका में बताया गया है कि, हाईकोर्ट के कडे आदेशों के बाद भी खंती में नगर निगम कर्मचारी आग लगा रहे हैं, जिसके कारण महीनेभर से आग धधक रही है और जहरीले धुएं के कारण इलाके में कोहरा छाया रहता है। आस पास के पांच किलोमीटर के दायरे में सांस लेना दूभर हो गया है और गहरे काले धुएं के कारण दस-पंद्रह कदम आगे का कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। इसकी तस्दीक भानपुर रेलवे ओवर ब्रिज से गुजरने वालों से की जा सकती है। जबकि, खंती के जहरीले धुएं के कारण आस पास की 40 से ज्यादा बस्तियों के रहवासियों, विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं, कई अस्पताल में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं एंव बीमार रोगियों के स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ रहा है। कचरा खंती के जहरीले धुएं के कारण आस पास के गांवों के किसान बर्बाद हो चुके हैं, क्योंकि खेतों में खंती के कचरे में आने वाली प्लास्टिक पन्नियां भर जाती हैं। इससे खेतों की न तो जुताई हो पाती है और न ही फसल पैदा हो पा रही है। खंती में नगर निगम कर्मचारियों द्वारा आग लगाने के बाद भड़कने वाली चिंगारियों के कारण फसलों में आग लग जाती है। इस बारे में नगर निगम के अधिकारियों को कई बार शिकायत करने के बाद भी खंती में आग लगाना बंद नहीं किया गया है। एनजीटी के सामने आज होगी पेशी : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सामने गुरुवार को नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगरीय प्रशासन विभाग के संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को पेश होकर जवाब देना है। एनजीटी ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के मानक नियमों एवं प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किए बगैर शहरभर से इकट्ठा किए गए कचरे को फेंके जाने के नतीजे में आस-पास की ढाई लाख से ज्यादा की आबादी के नारकीय जीवन जीने और पर्यावरण चौपट करने पर जवाब मांगा है। आचार संहिता की आड़ मे बचने की तैयारी  :  सूत्रों के अनुसार एनजीटी के सामने जवाबदेही से बचने के लिए चुनावी आचार संहिता की आड़ ली जा सकती है। सूत्रों का दावा है कि, नगर निगम की ओर से खंती को शिफ्ट करने और डिस्पोजल प्लांट लगाने की समानांतर कार्रवाई की कहानी सुनाई जा सकती है। इसके साथ ही चार साल पहले दिए गए हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के बजाय आए दिन खंती में आग लगाने और लाखों लोगों की जिंदगी नरक बना देने पर स्पष्ट जवाब भी नहीं आएगा।

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