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Thursday, December 3rd, 2020

स्वामी प्रसाद मौर्या ने नियम 56 विधानसभा लिया अचानक वापस ,भाजपा बोली : सपा -बसपा एक ही थाली के चट्टे-बट्टे है

sp and bsp partyआई एन वी सी , दिल्ली , नेता प्रतिपक्ष श्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने आज नियम 56 विधानसभा से अचानक वापस लेकर यह साबित कर दिया कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक ही थाली के चट्टे-बट्टे है। क्योंकि सूचना देते समय वह यह भूल गये थे कि कैग कि रिपोर्ट बहुजन समाज पार्टी की सरकार के कार्यकाल के स्मारक घोटाले की भी है। स्मारक घोटाले के महत्वपूर्ण बिन्दु :-

  • मूल योजना 943.73 करोड़ की थी जबकि योजना पूरी हुई 4558.01 करोड़ रूपये में। योजना में   3614.28 करोड़ की अभूतपूर्व वृद्धि हुई।
  • इसका कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री की सामंतवादी सोच के कारण बार बार डिजाइन में बदलाव और हुए निर्माण को तोड़ना
  • स्मारक स्थल पर लगाये गये पेड़ सामान्य से 1329 प्रतिशत के अधिक रेट पर खरीदे गये।
  • पर्यावरण नियमों के विपरीत 44.23 प्रतिशत भू भाग पर पत्थर का काम किया गया।
  • “दलितों और कमजोर वर्ग के प्रति कागजी समर्पण दिखाने वाली मुख्यमंत्री ने इन स्मारकों के शिलान्यास पर मात्र 4.25 करोड़ रूपया व्यय किया था।“
जिस निर्माण एजेन्सी (उ0प्र0 निर्माण निगम) ने इन घोटालों को करने में अग्रणी भूमिका निभाई उस पर सरकार की इतनी महती अनुकम्पा थी कि वित्तीय स्वीकृत 4558.01 करोड़ का 98.61 प्रतिशत पहले ही अवंटित कर अवमुक्त कर दिया था।
 
पार्टी का मत : विधानसभा की नियमावली के अनुसार लोक लेखा समिति कैग की रिपोर्ट पर विचार करेगी। समान्यत 5 से 8 वर्ष की जांच का समय लगेगा, तब तक न भ्रष्टाचार करने वाली सरकार रहेगी और न मंत्री/नेता रहेंगे और न ही भ्रष्टाचार करने वाले यह अधिकारी रहेंगे। तब क्योंकि इस मेले में केन्द्रांश 1,141.63 करोड़ (99 प्रतिशत ) है राज्य सरकार का मात्र एक प्रतिशत है तब यदि राज्य सरकार ईमानदार है तो उपरोक्त दोनो घोटालो (स्मारक घोटाला बसपा सरकार - कुम्भ घोटाला सपा सरकार) की जांच सी0बी0आई0 से कराने की सहमति केन्द्र सरकार को भेजे।

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