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Saturday, September 19th, 2020

सुखबीर बदल ने दी टाईटलर मामले में दखल

jagdish tytlerआई एन वी सी,
पंजाब,
माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली अंदर 1984 में हुए सिक्ख कत्लेआम के प्रमुख सुत्रधार जगदीश टाईटलर के मामले में दखल देने से इंकार करने के आज  किए गये फैंसले का स्वागत करते, पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कहा है कि यह फैसला पिछले ३० वर्षो से पीडि़तों को इंसाफ मिलने के रास्ते में रोड़ा बनी बैठी कांग्रेस की अध्यक्षता वाली केंद्रीय सरकार के मुंह पर करारा थप्पड़ है। उन्होंने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब यह आशा बंध गई है कि १९८४ में कांग्रेस सरकार द्वारा चुन चुन कर करवाये गये सिक्खों के कत्लेआम के दोषियों को शायद कोई ना कोई सज़ा मिल जाये। आज यहां जारी किए गये एक प्रेस बयान में सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमं़त्री के कत्ल के बाद करवाया गया सिक्ख कत्लेआम आज़ाद भारत में किसी धार्मिक अल्पसंख्यक के उपर किया गया सबसे घिनौना जुर्म था। उन्होंने कहा कि इस भयानक कार्य में निर्दोष बुजुर्गो, बच्चों व महिलाओं सहित हज़ारों निर्दोष सिक्खों को जिंदा जला दिया गया था। दिल्ली की सडक़ों पर तीन दिन तक होता रहा मौत का यह तांडव नाच उस समय के प्रधानमंत्री की शह पर जगदीश टाईटर व सज्जन कुमार जैसे प्रसिद्ध कांग्रेसी नेताओं का खेल था इसलिए केंद्र की इस कांग्रेस सरकार ने इस मामले में जांच को सही दिशा की तरफ मोड़ा ही नही। स बादल ने कहा कि कांग्रेस सरकार दोषियों को सज़ा देने का रास्ता बार बार इसलिए रोक रही है क्योंकि इसके साथ ही सारी साजिश स्पष्ट होगी जिसमें कांग्रेस के बड़े नेता शामिल हैं। स बादल ने कहा कि केंद्र की कांग्रेसी सरकार ने इस कत्लेआम के पीडि़तों को इंसाफ मिलने में ना केवल रोड़े ही अटकाये हैं बल्कि दोषियों को सरकार और पार्टियों में उंचे पदों के साथ निवाज़ कर सिक्खों के जख्मों पर नमक छिडक़ा है। उन्होंने कहा कि यह अति नाज़ुक मामला कमीशनों के चक्करों में डाला की आज तक किसी एक दोषी को भी सज़ा नही मिली। स बादल ने कहा कि केंद्र  में अटल बिहारी वाजपयी की अध्यक्षता में बनी सरकार दौरान जांच सही दिशा की ओर चली थी और इंसाफ की किरण दिखाई देने लग पड़ी थी। पर २००४ में पुन: बनी कांग्रेस सरकार ने सारी जांच को दुबारा ठंडे बस्ते में डाल दिया। स बादल ने कहा कि तीन दहाके बीत जाने के प्श्चात भी सिक्ख कत्लेआम के दोषियों को सजाये ना मिलना जहां देश की ज़मीर पर कलंक हैं वहीं देश के ज्यूडीश्यल सिस्टम पर भी सवालिया निशाना खड़ा करती है। उन्होंने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई यह टिपपणी, की इस केस में पहले ही तीन दशक बीत चुके हैं और इस अब और नही लटकाया जा सकता, ही मामले की गंभीरता व त्रासदी को खुद ब खुद बयान करती है।

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