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Friday, September 25th, 2020

सीलमपुर-जाफराबाद हिंसा में दो एफआईआर दर्ज, आज भी बंद हैं दिल्ली-नोएडा के ये रास्ते


जामिया के बाद दिल्ली का उत्तर पूर्वी इलाका मंगलवार दोपहर को सुलग उठा। सीलमपुर और जाफराबाद इलाके में दोपहर को नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन के लिए एकत्रित हुई भीड़ उग्र हो गई और देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसा में तब्दील हो गया। नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने डीटीसी की कलस्टर बस और दिल्ली पुलिस के वज्र वाहन की तोड़फोड़ की है। वहीं दो दर्जन से ज्यादा निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इस घटना में थाना सीलमपुर इलाके के एक पुलिस बूथ में भी आग लगा दी। हालांकि बुधवार को हालात सामान्य हो गए हैं और सभी मेट्रो स्टेशन खोल दिए गए हैं। वहीं दिल्ली से नोएडा आने जाने वाले कुछ रास्ते तीसरे दिन भी बंद हैं जिसके चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ दिल्ली के शाही इमाम का भी बयान आया है।

दो एफआईआर दर्ज

दिल्ली पुलिस ने जाफराबाद में हुई हिंसा के संबंध में आईपीसी की धाराओं के तहत दंगा भड़काने और पब्लिक संपत्ति बर्बाद करने के आरोप में दो एफआईआर दर्ज की हैं। अब तक पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है जिनके आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच चल रही है। एक एफआईआर बृजपुरी में पत्थरबाजी के लिए भी की गई है।

नागरिकता संशोधन कानून से भारतीय मुस्लिमों का कुछ लेना-देना नहीं है- बुखारी

सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत मुस्लिम शरणार्थी जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आएंगे उन्हें भारतीय नागरिकता नहीं मिलेगी। इसका उन मुसलमानों से कुछ लेना-देना नहीं है जो भारत में रह रहे हैं।

CAA और NRC में है अंतर- बुखारी

शाही इमाम बुखारी ने ये भी कहा कि नागरिकता संशोधन कानून(CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण(NRC) में बहुत अंतर है। एक सीएए है जो कानून बन चुका है और दूसरा एनआरसी है जिसकी सिर्फ घोषणा हुई है और वह कानून नहीं बना है।

शाही इमाम ने कहा विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार, लेकिन संयम से करें

दिल्ली में जामिया और सीलमपुर हिंसा के बाद दिल्ली के शाही इमाम अहमद बुखारी सामने आए हैं और उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन करना भारत के लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है, कोई ऐसा करने से हमें नहीं रोक सकता। हालांकि यह बहुत महत्वपूर्ण बात है कि यह प्रदर्शन नियंत्रण में किया जाए और हम अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें ये सबसे अहम हिस्सा है।

जामिया हिंसा के बाद पुलिस द्वारा फाइल की गई एफआईआर से पता चलता है कि पुलिस ने हिंसा रोकने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए 75 आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया था। इसमें ये भी कहा गया है कि 7-8 बच्चे और कुछ उपद्रवी विश्वविद्यालय के अंदर से पत्थरबाजी भी कर रहे थे।
इसी एफआईआर में ये भी कहा गया है कि पुलिस कैंपस के अंदर एक सीमित फोर्स के साथ दाखिल हुई थी ताकि उपद्रवियों की पहचान हो सके और छात्रों की सुरक्षा की जा सके।
 

सीलमपुर-जाफराबाद हिंसा में दो एफआईआर दर्ज, आज भी बंद हैं दिल्ली-नोएडा के ये रास्ते

दिल्ली के सीलमपुर में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन हिंसक हो जाने के बाद मंगलवार को सात मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही बंद कर दी गई थी और ट्रेनें भी वहां नहीं रुक रही थीं। लेकिन बुधवार सुबह सभी मेट्रो स्टेशनों के हर गेट खोल दिए गए हैं और सेवाएं सामान्य हो गई हैं। PLC.

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