Sunday, December 15th, 2019

सिख हमेशा से देश के प्रति वचनबद्ध

आई एन वी सी न्यूज़ नई दिल्ली, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी( डी.एस.जी.एम.सी.)द्वारा जलियाँवाला बाग नरसंहार की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर इंडिया गेट में एक विशेष आयोजन किया गया। जिसमेंशब्द गायन एवं सिक्खां के शानदार इतिहास के बारे नाटक ‘‘निओटियों दी ओट’’ की पेशकारी से अपने गौरवमयी विरासत एवं इतिहास से नई पीढ़ी को जागरूक करने का यत्न किया गया। इस अवसर परलोगां ने शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए कैंडल मार्च भी निकाला। शहीदों को श्रद्धांजलि भेंट करते डी.एस.जी.एम.सी. के अध्यक्ष स. मनजिन्दर सिंह सिरसा ने कहा कि 100वर्ष पहले ब्रिटिश हकूमत ने शांतिपूर्वक तरीके से अपने अधिकारों की मांग कर रहे हमारे भाईयों एवंबहिनों को गोली मारकर शहीद किया। उन्होंने कहा कि यह नरसंहार, जिसकी इतिहास में कोई बराबरी नहीं मिलती, ने भारत की आजादी के संघर्ष की दशा ही बदल दी। उन्होंने कहा कि 100वीं वर्षगांठ केअवसर पर देश भर में बड़े स्तर में प्रोग्राम आयोजित होने चाहिये थे ताकि हमारी नई पीढ़ी को हमारे गौरवमयी विरासत एवं इतिहास से अवगत करवाया जाता। उन्होंने कहा कि उन्हें दुःख है कि इसऐतिहासिक दिवस की महत्वता को सरकारों ने एवं लोगों ने चुनाव के शोर-शराबे में भुला दिया है। स. सिरसा ने कहा कि दिल्ली एवं देश की राजधानी से इस दिन को याद करते हुए प्रोग्राम अवश्य आयोजित होने चाहिये थे। पर अफसोस है कि किसे ने भी इस दिवस को याद तक नहीं किया। इसके प्रोग्रामोंके बारे में पहल करने की तो दूर की बात है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश लोग आज भी नरसंहार को याद कर रहे हैं एवं ब्रिटिश सरकार की संसद में भी इस पर चर्चा हुई है जहाँ ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने इस कत्लेआमपर अफसोस तो जाहिर किया है पर ब्रिटिश फौज की कार्यवाही के बदले माफी नहीं मांगी। उन्होंने कहा कि वे महसूस करते हैं कि यदि हम नई पीढ़ी को अपने इतिहास के बारे में खास तौर पर आजादी मांगने से किये गये जुल्म के बारे एवं यातनाओं के बावजूद हमारे लोगों खासतौर पर पंजाबियोंएवं सिखों द्वारा जालिमों के आगे हार न मानने के बारे बता न सके तो यह बहुत बड़ी कोताही होगी। उन्होंने कहा कि पंजाबियों ने जालिमों को चुन-चुन कर बदले लिये एवं उन्हें सबक भी सिखाये गये।उन्होंने कहा कि शहीद ऊधम सिंह ने जलियाँवाला बाग नरसंहार का कत्ल जरनल डायर को मार कर लिया एवं इस तरह अन्यों को भी सबक सिखायें गये जिन्होंने हम भारतीयों को कुचलने का यत्न किया।उन्होंने कहा कि पंजाबियों ने फैसला कर लिया कि जब तक आजादी नहीं मिलती हमलोग चैन से नहीं बैठेंगे तथा शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू एवं अन्य योद्धों ने आजादी के संघर्ष का नेतृत्व तब तककिया जब तक आजादी मिल नहीं गई। स. सिरसा ने कहा कि डी.एस.जी.एम.सी. ने आज का समारोह लोगां को अपने गौरवमयी विरासत एवं खासतौर पर इस दिन के इतिहास से अवगत करवाने के लिए आयोजित किया है। उन्होंने कहा कि 100विद्यार्थियों ने सामूहिक तौर पर ‘‘देह शिवा बर मोहि इहै...’’ शब्द का गायन किया है जिससे गुरू साहिबान के सिक्खों पर कृपा की बदौलत दलेरी एवं पंजाबियों एवं सिखों के देश एवं कौम के प्रति समर्पण कोदर्शाया गया। उन्होंने कहा कि नानक ‘‘निओटियाँ की ओट’’ में गुरू नानक देव जी से लेकर महाराजा रणजीत सिंह तक के शासनकाल का जिक्र किया है एवं यह बताया गया कि कैसे अंग्रेजों ने हमारा राज्य छीना एवं कैसेहमलोगों ने संघर्ष कर देश के लिए आजादी हासिल की। उन्होंने कहा कि सिख हमेशा से देश के प्रति वचनबद्ध रहे है और आज भी वे देश की सेवा में सब से आगे है। स. सिरसा ने कहा कि डी.एस.जी.एम.सी. ने पहले भी ऐसे विलक्षण प्रोग्राम आयोजित किये हैं। ताकि लोगों को अपना इतिहास, अमीर विरासत एवं गुरू साहिबानों की शिक्षाओं से जागरूक करवाया जा सके।उन्होंने कहा कि सिखों ने कभी भी अकाल पुरूख की कृपा नहीं भूली और न ही भूलेंगे एवं डी.एस.जी.एम.सी.भविष्य में भी ऐसे प्रोग्राम करवाती रहेगी। उन्होंने देश को भरोसा दिया कि हमलोग, पंजाबीयों एवंसिखों ने हमेशा देश की लड़ाई लड़ी है एवं भविष्य में भी देश सेवा जारी रहेगी। इस अवसर पर डी.एस.जी.एम.सी. के महासचिव स. हरमीत सिंह कालका ने कहा कि जलियाँवाला बाग नरसंहार अंग्रेजों के ताबूत में आखिरी कील साबित हुई। उन्होंने कहा कि इस कत्लेआम के बाद आजादीके संघर्ष को और तेज कर दिया एवं कुछ ही वर्षा मेंं हमें आजादी हासिल हो गई। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही दुखभरी व्यथा है कि ब्रिटिश सरकार इस कत्लेआम के 100 वर्ष बीत जाने के बाद भी माफीमांगने को तैयार नहीं है। इस अवसर पर पटना साहिब प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह ने आई संगतों का धन्यवाद किया। इसके अलावा उपाध्यक्ष कुलवंत सिंह बाठ, सीनियर उपाध्यक्ष बीबी रणजीत कौर, संयुक्तसचिव हरविन्दर सिंह के.पी. एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भारी संख्या में उपस्थित थे।



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