Friday, July 3rd, 2020

साल की अंतिम एकादशी सफला एकादशी है बेहद खास

22 दिसंबर, रविवार को पौष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। धार्मिक शास्त्रों में इसे सफला नामक एकादशी कहा गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी मनोकामना सफल करने वाली एकादशी है। धार्मिक पुराणों में बताया गया है कि जो व्यक्ति विधिवत रूप से इस एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण करता है उसे वर्षों तक तपस्या करने का पुण्य प्राप्त होता है।

पद्म पुराण में सफला एकादशी व्रत के महात्म्य का वर्णन मिलता है। भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया है कि सफला एकादशी व्रत के देवता श्री नारायण हैं। जो व्यक्ति सफला एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करता है और रात्रि में जागरण करता है, ईश्वर का ध्यान और श्री हरि के अवतार एवं उनकी लीला कथाओं का पाठ करता है उनका व्रत सफल होता है। इस प्रकार से सफला एकादशी का व्रत करने वाले पर भगवान प्रसन्न होते हैं। व्यक्ति के जीवन में आने वाले दुःखों को पार करने में भगवान सहयोग करते हैं। जीवन का सुख प्राप्त कर व्यक्ति मृत्यु के पश्चात सद्गति को प्राप्त होता है।सफला एकादशी की कथा
पद्म पुराण में सफला एकादशी की जो कथा मिलती है उसके अनुसार महिष्मान नाम का एक राजा था। इनका ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक पाप कर्मों में लिप्त रहता था। इससे नाराज होकर राजा ने अपने पुत्र को देश से बाहर निकाल दिया। लुम्पक जंगल में रहने लगा।

पौष कृष्ण दशमी की रात में ठंड के कारण वह सो न सका। सुबह होते होते ठंड से लुम्पक बेहोश हो गया। आधा दिन गुजर जाने के बाद जब बेहोशी दूर हुई तब जंगल से फल इकट्ठा करने लगा। शाम में सूर्यास्त के बाद यह अपनी किस्मत को कोसते हुए भगवान को याद करने लगा। एकादशी की रात भी अपने दुखों पर विचार करते हुए लुम्पक सो न सका।

इस तरह अनजाने में ही लुम्पक से सफला एकादशी का व्रत पूरा हो गया। इस व्रत के प्रभाव से लुम्पक सुधर गया और इनके पिता ने अपना सारा राज्य लुम्पक को सौंप दिया और खुद तपस्या के लिए चले गए। काफी समय तक धर्म पूर्वक शासन करने के बाद लुम्पक भी तपस्या करने चला गया और मृत्यु के पश्चात विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ।

अगर आप व्रत नहीं करते हैं
जो लोग यह व्रत नहीं कर पाते हैं उनके लिए शास्त्रों में यह विधान है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करें। दैनिक जीवन के कार्य करते हुए भगवान का स्मरण करें। संध्या के समय भी भगवान की पूजा करें और आरती के बाद भगवान की कथा का पाठ करें। एकादशी के दिन चावल से बना भोजन, लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा का सेवन न करें। PLC.

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