Monday, October 21st, 2019
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सात दिनों मे मिलेगा किसान को चेक

waterआई एन वी सी न्यूज़ लखनऊ , उत्तर प्रदेश सरकार ने लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल विभाग में सिटीजन चार्टर लागू करते हुए लघु सिंचाई निर्माण की परियोजनाओं को और गतिशील बनाने की व्यवस्था की है। विभाग द्वारा किसानों के लिए संचालित योजनाओं में निःशुल्क बोरिंग, मध्यम गहरी बोरिंग एवं नलकूप निर्माण, गहरी संचालित एवं नलकूप निर्माण, सामूहिक नलकूप निर्माण तथा भूजल दोहन हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत करने संबंधी योजनाएं प्रमुख हैं। इन योजनाओं के सफल बनाने एवं समयबद्ध संचालन के लिए गतिविधियां चिन्हित करके निर्धारित अवधि में इन मामलों का निस्तारण न करने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर कार्यवाही का भी प्राविधान किया गया है। घोषित सिटीजन चार्टर के तहत मध्यम गहरी बोरिंग एवं गहरी बोंरिंग तथा नलकूप निर्माण के लिए किसानों द्वारा सहायक अभियंता लघु सिंचाई को प्रार्थना पत्र देने पर निश्चित अवधि में कार्यवाही करना अनिवार्य होगा। किसानों द्वारा प्रार्थना पत्र प्राप्त होने के दो दिन के अन्दर सहायक अभियंता प्रार्थना पत्र को अधिशाषी अभियंता को प्रेषित करेंगे। अधिशाषी अभियंता एक सप्माह में सर्वे एजेन्सी का चयन कर कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। सर्वे एजेन्सी शुल्क का ड्राफ्ट बनाकर एक दिन में सहायक अभियंता को सूचित करेंगे। प्रार्थी सर्वे शुल्क का ड्राफ्ट सहित प्रार्थना पत्र अधिशाषी अभियंता को देंगे, जो सबंधित एजेन्सी को सर्वे के लिए रिर्पोट देने हेतु अग्रसारित की जाएगी। संबंधित अधिकारी एजेन्सी द्वारा किए गए सर्वे रिर्पोट लघु सिंचाई विभाग को प्रेषित करेंगे। अधिशाषी अभियंता/सहायक अभियंता तीन दिन में प्रार्थी को अवगत करायेंगे। अवर अभियंता/सहायक अभियंता बोरिंग, नलकूप निर्माण का प्राक्कलन 07 दिन में तैयार करेंगे। सहायक अभियंता दो दिन में प्रार्थी को आवश्यक धनराशि जमा करने हेतु रजिस्ट्रर्ड पत्र द्वारा अवगत करायेंगे। प्रार्थी द्वारा वांछित धनराशि जमा करने पर अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। सहायक अभियंता लक्ष्य के अनुसार वरीयता क्रम निर्धारित करते हुए प्रार्थी को सूचित करेंगे। मुख्य अभियंता 45 दिन में पी.वी.सी. पाइप/अन्य सामग्री उपलब्ध करायेंगे। सहायक अभियंता/अधिशाषी अभियंता 45 दिन में बोरिंग का कार्य पूर्ण कराकर 30 दिन में, अवर अभियंता/सहायक अभियंता किसान को निर्धारित प्रपत्र निर्गत करेंगे ओर बोरिंग का हस्तान्तरण सुनिश्चित करेंगे। अवर अभियंता/सहायक अभियंता द्वारा 15 दिन में स्थल सत्यापन एवं अधिशाषी अभियंता को रिर्पोट प्रस्तुत की जाएगी। सात दिन में सहायक अभियंता मध्यम गहरी बोंिरंग एवं गहरी बोरिंग तथा नलकूप निर्माण संबंधी चेक किसान को उपलब्ध कराना सुनिचित करेंगे। भूजल विकास दोहन हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत करने की भी व्यवस्था सिटीजन चार्टर में की गई है। प्रार्थी द्वारा भूजल विकास/दोहन हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र का आवेदन करने पर कार्यवाही शुरु की जाएगी। भूगर्भ जल निदेशालय द्वारा संबंधित क्षेत्रीय खण्ड से दो दिन में सूचना प्राप्त करने हेतु पत्र भेजा जाएगा। खण्ड द्वारा 15 दिन में संबंधित खण्डीय अधिकारी को वांछित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। निदेशालय द्वारा इसका परीक्षण पांच दिन में सुनिश्चित किया जाएगा। हाइड्रोजियोलाॅजिस्ट निदेशक भूगर्भ जल को प्रार्थी को स्वीकृत/अस्वीकार के संबंध में अवगत करान सुनिश्चित करेंगे। प्रार्थी द्वारा निर्धारित शुल्क जमा करने पर अगिम कार्यवाही की जाएगी। आवश्यक औपचारिकताओं की पूर्ति के उपरान्त सीनियर हाइड्रोजियोलाॅजिस्ट द्वारा निदेशक स्तर प्रार्थी को अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत करने का प्राविधान नागरिक अधिकार पत्र में किया गया है। सरकार द्वारा लघु एवं सीमान्त किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं में अनुदान भी अनुमन्य कराया जा रहा है। निःशुल्क बोरिंग योजना में सामान्य श्रेणी के लघु कृषकों के लिए रु0 5000, सीमान्त कृषकों के लिए रु0 7000, अनुसूचित जाति व जनजाति के लघु/सीमान्त कृषकों के लिए रु0 10,000 पप्मसेट लगवाये जाने के लिए, सामान्य श्रेणी के लघु कृषकों के लिए रु0 4500, सीमान्त कृषकों के लिए रु0 6000 अनुसूचित जाति व जनजाति के लघु/सीमान्त कृषकों के लिए रु0 9,000 का अनुदान दिया जाता है। गहरी बोरिंग एवं मध्यम बाेिरंग के सभी श्रेणी के लाभार्थी कृषकों के लिए क्रमशः रु0 1.78 लाख तथा रु0 1.53 लाख के अनुदान का प्राविधान किया गया है। सामूहिक नलकूप योजना के तहत अनुसूचित जाति/जनजाति के न्यूनतम 51 प्रतिशत लाभार्थियों और सभी श्रेणी के न्यूनतम 10 कृषकों के समूह को इकाई लागत का शत-प्रतिशत, अधिकातम 05 लाख रुपये के अनुदान का प्राविधान किया गया है। इसी प्रकार इसी योजना (सामान्य) के तहत जाति/जनजाति, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक वर्गों तथा न्यूनतम किसानों के समूह जिसमें 51 प्रतिशत लघु/सीमान्त किसान हो, को ईकाई लागत का 75 प्रतिशत, अधिकतम 3.92 रुपये का अनुदान प्रदान करने की व्यवस्था है।

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