Thursday, February 27th, 2020

सहायक धंधे ग्रामीण आर्थिकता का प्रारूप बदलने के पूरी तरह समर्थ : रणिके

guljar singh ranikeआई एन वी सी, पंजाब, पंजाब सरकार द्वारा ऋण अधीन कृषि और बेरोजगार नवयुवकों को कृषि से सम्बन्धित सहायक धंधों के प्रति जागरूक करने के लिए पशु पालन विभाग द्वारा नई रणनीति बनाई गई है। जिसके तहत बकरी पालन, सुअर पालन और अन्य सहायक धंधों को राज्य के समूचे जिलों तक ले जाया जायेगा। इसके साथ ही राज्य के डेयरी किसानों की आमदन बढ़ाने के उद्धेश्य से दूध का उत्पादन बढ़ाने की नई तकनीक की जानकारी के लिए उच्च स्तर पर दूध उत्पादक जागरूकता शिविर लगाने की योजना तैयार कर ली गई है। यह जानकारी आज यहां राज्य के पशु पालन मच्छली पालन और डेयरी विकास मंत्री स. गुलजार सिंह रणिके ने दी। उन्होंने बताया कि दूध उत्पादकों को डेयरी फार्मिंग के व्यवसायिक प्रशिक्षण देने के लिए विभाग के सभी प्रशिक्षण केन्द्रों पर 45 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जायेगा। जिसमें डेयरी फार्मिंग के प्रबन्ध की विभिन्न तकनीकों का ज्ञान देने के अतिरिक्त पशुओं के कृत्रिम गर्भदान और गभ्भण चैक के अतिरिक्त दूध से विभिन्न दूध पदार्थों की बनावट सम्बन्धी अमली प्रशिक्षण दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 21812 किसानों को ब्लॉक स्तरीय एक दिवसीय, 5745 पढ़े लिखे बेरोजगारों को 15 दिनों और 1208 डेयरी फार्मरों को 45 दिनों का डेयरी उद्यम प्रशिक्षण दिया जा चुका है। पंजाब में श्वेत क्रान्ति लाने के लिए अपनी वचनबद्धता दौहराते हुए उन्होंने कहा कि पशु पालन के धंधे में लघु किसानों को जोड़े रखने के उद्धेश्य के लिए सामान्य वर्ग हेतू 25 प्रतिशत और अनुसूचित जातियों के लिए 33 प्रतिशत सबसिडी दुधारू पशुओं की खरीद, कट्टियों- बच्छियों के पालन और दूध व दूध पदार्थ बनाने के यूनिट लगाने के लिए दी जायेगी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष इस स्कीम अधीन नौ करोड़ रूपये की राशि उपलब्ध करवाई गई थी जबकि वर्तमान वर्ष दौरान यह लक्ष्य बीस करोड़ रूपये (दुगने से अधिक) निश्चित किया गया है। मंत्री ने बताया कि पंजाब उन 14 राज्यों में शामिल हैं जिनमें भारत सरकार के दूध की उपज दुगनी क रने के लिए नैशनल डेयरी प्लांट कार्यक्रम चालू किया है। इस स्कीम तहत 6.37 करोड़ रूपये जारी की जा चुकी है।जिसके तहत सीमन बैंक नाभा का नवीनीकरण किया जाना है। रणिके ने बताया कि विभाग द्वारा इस समय 85 प्रतिशत गाएं और 45 प्रतिशत भैंसे बनावटी गर्भदान के लिए सेवाएं पशु पालकों को प्रदान की जा रही हैं। जोकि आगामी वर्षों में बढ़ा कर 95 प्रतिशत गाएं और 60 प्रतिशत भैंसे करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम अधीन पंजाब में वर्तमान वर्ष दौरान पशुओं की नसल सुधारने के लिए राशन संतुलन और दूध की प्रोसैसिंग समर्था बढ़ाने के लिए कार्य शुरू किये जाएंगें। स. रणिके ने बताया कि पंजाब देश की कुल दूध पैदावार में नौ प्रतिशत से अधिक हिस्सा डालता है और यहां प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 961 ग्राम है जोकि पूरे भारत में सबसे अधिक है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 256 ग्राम है। उन्होंने बताया कि कृषि के सहायक धंधे पशु पालन और डेयरी क्षेत्र, ग्रामीण आर्थिकता का प्रारूप बदलने के पूरी तरह समर्थ हैं क्योंकि यह देश के कुल घेरलू उत्पादन में 5.9 प्रतिशत योगदान डाल रहे हैं।

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