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Sunday, October 25th, 2020

सर्दियों में आॅफ सीजन होने के कारण पर्यटकों को आर्थिक लाभ भी होगा : रावत

harish rawat char dham yatra invc newsआई एन वी सी न्यूज़, दिल्ली, उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई शीतकालीन चारधाम यात्रा से देश विदेश के पर्यटक  बहुआयामी पर्यटन का आनंद उठा सकते हैं। सर्दियों में पहाड़ों में मौसम खुला रहता है और बरसात की भांति बादल फटने, बाढ़ व भूस्खलन की सम्भावनाएं बहुत कम होती हैं। नई दिल्ली के प्रेस क्लब में मीडिया से वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शीतकालीन चारधाम यात्रा व पर्यटन के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि इस दौरान पर्यटन तुलनात्मक रूप से अधिक सुविधाजनक व किफायती है।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उŸाराखण्ड में पारम्परिक चारधामों की यात्रा अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवम्बर तक लगभग 6 महिनों के लिए संचालित होती है। यात्रा समाप्ति पर चारों धामों के कपाट बंद हो जाने पर यमुनोत्री धाम की मूर्ति खरसाली, गंगोत्री की मुखबा, केदारनाथ की ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ व बद्रीनाथ जी की मूर्ति नृसिंह मंदिर जोशीमठ में स्थापित कर पूजा की जाती है। तीर्थ पुरोहितों व पण्डा समाज के विद्वान लोगों के अनुरोध पर राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा की तर्ज पर ही खरसाली, मुखबा, ऊखीमठ व जोशीमठ के लिए शीतकालीन चारधाम यात्रा प्रारम्भ की है। इससे पर्यटकों के लिए पर्यटन के नए अवसर मिलेंगें। सर्दियों में उŸाराखण्ड आकर धार्मिक पर्यटन के साथ ही साहसिक पर्यटन, इको पर्यटन, वाईल्डलाईफ पर्यटन का लाभ उठा सकते हैं। शीतकाल में गोविंदघाट के लिए भी यात्रा का संचालन किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि सर्दियों में जहां मैदानी क्षेत्रों में बहुत ज्यादा धुंध व ठंड रहती है वहीं पहाड़ों में मौसम खुला रहता है और अच्छी धूप रहती है। सर्दियों में पहाड़ों की खिली धूप का आनंद ही अलग है। इस दौरान हिमाच्छादित हिमालय के भव्य दर्शन किए जा सकते हैं। पारम्परिक चारधाम यात्रा के अधिकांश समय पहाड़ों में बरसात होती है जबकि सर्दियों में बादल फटने, बाढ़ आने, भूस्खलन होने की सम्भावनाएं ना के बराबर होती है। भूस्खलन ना होने से सड़कें भी बंद नहीं होती हैं। कुल मिलाकर सर्दियों में पर्यटकों का प्राकृतिक अवरोधों से सामना नहीं होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्दियों में आॅफ सीजन होने के कारण पर्यटकों को आर्थिक लाभ भी होगा। अपेक्षाकृत कम दरों पर आवासीय व टैक्सी आदि की सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। धार्मिक पर्यटन के अलावा पर्यटन की दूसरी गतिविधियों से भी लाभान्वित हो सकते हैं। उŸारकाशी के द्यारा,चमोली के औली, रूद्रप्रयाग के दुगलविट्टा-चोपता में बर्फ की उपलब्धता से स्कीईंग का आनंद लिया जा सकता है। यहां के बुग्याल दर्शनीय हैं। प्रदेश के अधिकांश राष्ट्रीय पार्क 15 नवम्बर से खुल जाते हैं। वाईल्डलाईफ के पे्रमी इसका लाभ उठा सकते हैं। शीतकालीन चारधाम यात्रा मंदिरों के आसपास सातताल ट्रैक, हर्षिल से पंचमुखी महादेव, दुगलविटा-चोपता-तुंगनाथ-चंद्रशीला, क्वारीपास-औली-ताली-खुलरा, जोशीमठ-कलपेश्वर आदि टैªक्स पर ट्रैकिंग की जा सकती है। पर्यटक गंगा, यमुना आदि नदियों में रिवर राफ्टिंग का आनंद प्राप्त किया जा सकता है। उŸाराखण्ड का पर्यटन विभाग द्वारा माउन्टेन बाईकिंग कम्पीटीशन भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के बाद उŸाराखण्ड में सड़कें दुरूस्त कर  दी गई हैं। आधारिक संरचना विकसित की गई हैं। इसी का परिणाम है कि इस वर्ष चारधाम यात्रा का सफलतापूर्वक संचालन किया गया। लगभग  4 लाख श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए। हिमालयी महाकुम्भ नंदा राजजात यात्रा भी कुशलतापूर्वक सम्पन्न की गई। उŸाराखण्ड आना अब पूरी तरह से सुरक्षित है। प्रदेश के विभिन्न स्थानों को हवाई सेवाओं सेजोड़ा जा रहा है। चारों धाम के लिए हेलीकाॅप्टर सुविधाएं उपलब्ध हैं। हिमालय दर्शन नामक योजना प्रारम्भ की गई है। इसमें हेलीकाप्टर से वृहद हिमालय के दर्शन किए जा सकते हैं।

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