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Thursday, December 3rd, 2020

सरकार जनता को बिजली संकट से निजात दिलाने के लिए गम्भीरता से प्रयास कर रही है: मुख्यमंत्री

Chief Minister of Uttar Pradesh,  Akhilesh Yadav meeting Piyush Goyal,  Akhilesh Yadav, Piyush Goyal,Akhilesh Yadav with Piyush Goyalआई एन वी सी न्यूज़ नई दिल्ली , उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने बिजली के क्षेत्र में केन्द्र सरकार से राज्य को पूरा सहयोग देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जनता को बिजली संकट से निजात दिलाने के लिए गम्भीरता से प्रयास कर रही है। इसके मद्देनजर भारत सरकार को उत्तर प्रदेश को अधिक से अधिक मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अक्टूबर, 2016 से ग्रामीण इलाकों में न्यूनतम 16 घण्टे तथा शहरी क्षेत्रों में 22 से 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री आज नई दिल्ली में केन्द्रीय ऊर्जा एवं कोयला राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल के साथ एक बैठक में विचार-विमर्श कर रहे थे। इस मौके पर विद्युत उत्पादन, पारेषण एवं वितरण सम्बन्धी विभिन्न प्रकरणों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में कोयले की उपलब्धता के सम्बन्ध में भी विचार-विमर्श किया गया। श्री यादव ने केन्द्रीय मंत्री से राज्य सरकार की विद्युत उत्पादन इकाइयों को निर्धारित मात्रा में कोयला उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि इकाइयांे द्वारा पूरी क्षमता से विद्युत उत्पादन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि राज्य सरकार की अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, पारीछा तथा पनकी स्थित उत्पादन इकाइयों को लिंकेज के मुताबिक कोयला नहीं उपलब्ध कराया गया। उन्होंने उत्पादन इकाइयों के लिए मानसून से पूर्व पर्याप्त मात्रा में कोयले का भण्डारण सुनिश्चित कराने का आग्रह करते हुए कहा कि ऐसा करने से मानसून के दौरान कोयले की निकासी एवं आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद बिजली उत्पादन नहीं घटेगा। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय विद्युत उत्पादन इकाइयों द्वारा प्रदेश के लिए स्वीकृत मात्रा में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए इस बात पर बल दिया कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्य को निर्धारित कोटे के अनुरूप बिजली आपूर्ति नहीं की जा रही है। उन्होंने ऊर्जा मंत्री से दादरी थर्मल पावर प्लाण्ट द्वारा राज्य को वर्तमान में दस प्रतिशत विद्युत आपूर्ति के स्थान पर 40 प्रतिशत तक बढ़ाये जाने का अनुरोध करते हुए कहा कि यह इकाई उत्तर प्रदेश में ही स्थित है। इसलिए गृह राज्य होने के नाते यह सुविधा निश्चित रूप से मिलनी चाहिए, क्योंकि दूसरे राज्यों को ऐसा लाभ दिया जा रहा है। इसी प्रकार उन्होंने राज्य की आवश्यकताओं को देखते हुए निरस्त किए गए चेन्दीपाड़ा कोल ब्लॉक के स्थान पर नए कोल ब्लॉक को आवन्टित करने का आग्रह भी किया। जिससे हरदुआगंज 1ग660, पनकी 1ग660, मेजा 2ग660 स्टेज-प्प्, जवाहरपुर 2ग660 तथा ओबरा-सी 2ग660 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता की नई परियोजनाओं हेतु कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने निजी क्षेत्र में स्थापित हो रही ललितपुर बिजली परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस परियोजना के लिए मंहगी दर पर कोयले के आवंटन से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने इस सम्बन्ध में विद्युत उत्पादन इकाइयों के लिए विशेष ध्यान रखने का आग्रह भी किया, ताकि राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। श्री यादव ने केन्द्र सरकार से अनुरोध किया कि कोयला मंत्रालय को ईंधन आपूर्ति समझौते (एफ0एस0ए0) के तहत उत्पादन इकाइयों को लिंकेज कोल का पूरा कोटा उपलब्ध कराने के निर्देश देने चाहिए। इसके साथ ही, केन्द्र सरकार को बन्दरगाहविहीन उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को कोल आवंटन की वर्तमान नीति की भी समीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि ऐसे प्रदेशों को सस्ती दर पर कोल आयात की सुविधा नहीं मिल पाती है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एम0ओ0यू0 आधारित बिजली उत्पादन परियोजनाओं को कोल लिंकेज स्वीकृत न होने के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इससे विकासकर्ता कम्पनियां अपनी वित्तीय देनदारियों का भुगतान नहीं कर पा रही हैं। साथ ही, परियोजनाएं अपने निर्धारित समय से काफी विलम्बित हो चुकी हैं। कोल लिंकेज न होने के फलस्वरूप निवेशकर्ता हतोत्साहित हो रहे हैं और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर इसका दूरगामी असर पड़ रहा है। यह सर्वविदित है कि उत्तर प्रदेश में पीक पीरियड में विद्युत की मांग के सापेक्ष आपूर्ति में लगभग 2500 से 4500 मेगावाट की कमी रह जाती है। राज्य सरकार इस गैप को कम करने की लगातार कोशिश कर रही है। इसके साथ ही, राज्य सरकार वर्ष 2019-20 से 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति की योजना पर कार्य कर रही है। बिजली की मांग और आपूर्ति के अन्तर को कम करने में एम0ओ0यू0 रूट की परियोजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। इसलिए केन्द्र सरकार को तत्काल इन योजनाओं के कोल लिंकेज के लिए कदम उठाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2016 तक राज्य को केस-1 बिडिंग के तहत 6000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलेगी। इसके पारेषण के लिए पश्चिमी क्षेत्र से उत्तरी क्षेत्र को सुचारु विद्युत आपूर्ति हेतु कोरीडोर को सुदृढ़ करना जरूरी है। साथ ही, ललितपुर को समीपवर्ती 765 के0वी0 बीना आई0एस0टी0एस0 सबस्टेशन से जोड़ा जाना भी जरूरी है। उन्होंने श्री गोयल से इस सम्बन्ध में पी0जी0सी0आई0एल0/सी0टी0यू0 को जरूरी निर्देश देने का अनुरोध किया। साथ ही, विभिन्न वितरण एवं पारेषण कार्याें के लिए पावर सिस्टम डेवलेपमेन्ट फण्ड से राज्य को 2635 करोड़ रुपए अवमुक्त करने का अनुरोध भी किया। श्री यादव ने बिजली मंत्रालय द्वारा अक्टूबर, 2012 में घोषित की गई फाइनेन्शियल रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम के विषय में कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में इस स्कीम के पुनरावलोकन की आवश्यकता है, क्यांेकि यह वित्तीय वर्ष 2013-14 में  ही लागू हो पाई। जबकि बैंकों ने इसके लिए वित्तीय वर्ष 2012-13 को पहला वर्ष माना था। उन्होंने कहा कि इस स्कीम के अन्तर्गत आने वाले विभिन्न बिन्दुओं पर विचार करते हुए उन्हें तर्कसंगत बनाना होगा। उन्होंने बिजली दरों के समय से निर्धारण तथा योजना में शामिल राज्यों को ऋण पर नेशनल इलेक्ट्रीसिटी फण्ड से ब्याज अनुदान दिए जाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युत योजना (आर0जी0जी0वी0वाई0) के सन्दर्भ में कहा कि अनुमोदित लागत और टेण्डर लागत में अन्तर के बावजूद परियोजना की लागत में बढ़ोत्तरी का प्राविधान नहीं है। जबकि 10वीं और 11वीं पंचवर्षीय योजना में टेण्डर लागत को ध्यान में रखकर परियोजना लागत में बढ़ोत्तरी की गई थी। उन्होंने 50 परियोजनाओं के लिए लगभग 1412 करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी को स्वीकृत करने का अनुरोध किया। श्री यादव ने कहा कि 11वें प्लान के अन्तर्गत इस योजना में 22 जिलों को सम्मिलित किया गया था, जबकि 12वें प्लान के तहत 64 जिलों को स्वीकृत किया गया है। 12वें प्लान के अन्तर्गत इस योजना में 100 से अधिक की आबादी वाले मजरों को लक्ष्य बनाया गया है, जबकि 11वें प्लान में योजना के तहत 300 से अधिक की आबादी वाले मजरों को शामिल किया गया था। प्रदेश सरकार द्वारा सभी 75 जिलों के 100 से अधिक की आबादी वाले समस्त मजरों के विद्युतीकरण के प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजे गए हैं। परन्तु अभी भी 11 जिले इस योजना में शामिल नहीं किए गए हैं। उन्होंने अवशेष 11 जिलों के लगभग 1000 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को भी योजना में शामिल किए जाने का अनुरोध किया। श्री यादव ने घाटमपुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट (3ग660 मेगावाट) के विषय में कहा कि इस परियोजना के लिए केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा शीघ्र पर्यावरणीय क्लीयरेन्स उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने इसके लिए केन्द्रीय मंत्रिमण्डल की एस्टिमेट कमेटी द्वारा अनुमोदन प्रदान किए जाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने 2ग्660 मेगावाट की करछना तापीय विद्युत परियोजना के लिए संगम पावर जनरेशन कम्पनी को पूर्व में आवंटित कोयला ब्लाक को यथावत बनाए रखने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कृषि फीडर को अलग करने की योजना पर कार्य कर रही है, ताकि कृषि कार्यों एवं ग्रामीण इलाकों के लिए बेहतर विद्युत आपूर्ति की जा सके। इसके क्रियान्वयन के सम्बन्ध में दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत केन्द्र सरकार के स्तर से लगभग 07 हजार करोड़ रुपए की आर्थिक मदद की जरूरत होगी। इसी प्रकार ग्रामीण उपभोक्ताओं के विद्युत मीटर की स्थापना के लिए भारत सरकार से 02 हजार करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में विद्युत वितरण नेटवर्क के विस्तार के लिए इंटीग्रेटेड पावर डेवलेपमेन्ट स्कीम के तहत राज्य को 06 हजार करोड़ रुपए की मदद दिए जाने का भी अनुरोध किया। श्री यादव ने रीस्ट्रक्चर्ड एक्सिलिरेटेड पावर डेवलपमेन्ट एण्ड रिफॉर्म प्रोग्राम (आर0ए0पी0डी0आर0पी0) के तहत  पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के मुरादाबाद, सहारनपुर, गाजियाबाद तथा मेरठ नगरों के लिए पूर्व में प्रेषित प्रस्ताव को संशोधित कर लगभग 1652 करोड़ रुपए़, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के वाराणसी, इलाहाबाद तथा गोरखपुर नगरों के लिए लगभग 1941 करोड़ रुपए तथा अन्य छोटे विभिन्न नगरों के लिए लगभग 162 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। साथ ही, उन्हांेने कानपुर नगर के लिए 1433 करोड़ रुपए के प्रेषित प्रस्ताव को स्वीकृत करते हुए धनराशि राज्य सरकार को उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने गैर-परम्परागत ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश में किए जा रहे कार्याें का उल्लेख करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा सौर ऊर्जा के लिए कम से कम 500 मेगावाट की परियोजना की स्थापना में भूमि उपलब्ध कराने में दिक्कत आ रही है। इसलिए एक ही स्थान पर विशाल परियोजना स्थापित करने के स्थान पर जालौन एवं झांसी में संयुक्त रूप से 500 मेगावाट की परियोजना स्थापित करने की अनुमति प्रदान की जाए। इसी प्रकार एन0एच0पी0सी0 तथा नेडा का संयुक्त उपक्रम स्थापित करने के लिए तेजी से पहल की जाए। गौरतलब है कि श्री गोयल नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री भी हैं।

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