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राजभवन,
भारत रत्न डा0 भीम राव अम्बेडकर की 125 वीं जयंती के अवसर पर नगर निगम में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल डा.कृष्णकांत पाल ने कहा कि एक समतामूलक समाज की स्थापना के लिए डा. अम्बेडकर की जयंती को राष्ट्रीय समरसता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। देशभर में प्रारम्भ किए गए ‘ग्रामोदय से भारत उदय अभियान’ से सामाजिक सद्भाव के साथ ही ग्रामीण जीवन में बड़ा परिवर्तन आएगा।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी द्वारा मध्यप्रदेश के महू (MHOW) जो बाबा साहब की जन्मस्थली है, से इस अभियान का शुभारम्भ किया जा रहा है। ग्रामोदय से भारत उदय अभियान का मुख्य उद्देश्य भारतीय ग्रामीण जीवन और ग्रामीण अर्थव्यस्था को विकास के पथ पर आगे बढ़ाते हुए पूरे राष्ट्र को विकास के पथ पर आगे ले जाना है। ग्राम्य विकास हेतु चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जमीनी हकीकत को समझना तथा जरूरत के मुताबिक उनमें बेहतरी के लिए कदम उठाना इस योजना का बड़ा लक्ष्य है। इस अभियान के माध्यम से यह प्रयास किया जायेगा कि लोगों को विकास योजनाओं की जानकारी समय से मिले और लोग उसका भरपूर लाभ उठायें।
राज्यपाल ने कहा कि डाॅ0 बाबा साहेब अम्बेडकर को जब याद करते हंै तो सबसे पहले संविधान की बात याद आती है। बाबा साहब की दिव्य दृष्टि और उनके राष्ट्र के प्रति ठोस विचारों से ही यह सम्भव हो सका। हमारा संविधान सिर्फ एक कानूनी मार्गदर्शन की व्यवस्था तक ही सीमित नही है, वह एक समाजिक दस्तावेज भी है और जितनी उसकी कानूनी सामथ्र्य की हम सराहना करते हैं, उतनी ही उसके सामाजिक दस्तावेज की ताकत की भी सराहना करनी चाहिए और उसको जी करके दिखाना, यह हम लोगों को दायित्व बनता है।
राज्यपाल ने कहा कि बाबा साहब अम्बेडकर कहा करते थे कि हिन्दुस्तान में औद्योगीकरण होना जरूरी है और वे कहते थे कि दलितों के पास जमीन नही हैं। औद्योगीकरण इसलिए भी होना चाहिए कि समाज के दलित पीडि़त शोषित और वंचितों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो।
बाबा साहब अम्बेडकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और एक स्वस्थ सामाजिक व्यवस्था के प्रति व्यापक सुधारवादी नजरिया रखतेे थे। सामाजिक समानता, सौहार्द और आपसी भाईचारा जो कि बाबा साहब के लिए सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य थे, वही ‘इस ग्रामोदय से भारत उदय अभियान’ में निहित है। सरकारी विकास योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों का आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण हो, लोगों को आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों, बिना किसी भय और भेदभाव के सभी अपना एवं अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें तथा समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान दें। ग्रामीणों के सामाजिक उत्थान और समरसता के लिए इन्हीं महान लक्ष्यों को पूरा करने के उद्देश्य से इस अभियान को प्रारम्भ किया जा रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि यह अभियान, 14 अप्रैल 2016 को डा0 भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयंती से आरम्भ होगा और 24 अप्रैल 2016 को पंचायती राज दिवस के दिन इसका समापन होगा। राज्य सरकारों और पंचायतों के सहयोग से केन्द्र सरकार इस अभियान का आयोजन करेगी। अभियान का लक्ष्य समस्त ग्रामों में पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करके सामाजिक सद्भाव बढ़ाना है साथ ही ग्रामीण विकास को बढ़ावा देकर किसानों की प्रगति और गरीब लोगों की जीविका के लिए एकीकृत प्रयास करना है। जनसहयोग और जनता की भागीदारी से ही हमें लक्ष्य हासिल हो सकेगा।
राज्यपाल ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा बाबा साहब के जन्मदिवस 14 अप्रैल को ‘राष्ट्रीय बन्धुत्व भाव समरसता दिवस’ के रूप में भी मनाने का निर्णय लिया गया है। निश्चित रूप से यह बाबा साहब को सबसे विनम्र श्रद्धंाजलि होगी। उन्होंने अपना सारा जीवन राष्ट्रीय एकता, मानव स्वतंत्रता, समता, समानता, सांप्रदायिक सद्भाव, गैर-बराबरी की समाप्ति के साथ ही गरीब और दलित समाज का उत्थान करके एक मजबूत समाज की रचना में लगाया।
भारतीय संविधान की रचना में बाबा साहब की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका  रही है। हमारा संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को अवसर की समानता का अधिकार देता है। बाबा साहब के प्रति सच्ची श्रद्धा व्यक्त करने के लिए आज हमें जाति, वर्ग और सामाजिक असमानता के सभी आधारों को मिटाते हुए, समानता और बंधुत्व की भावना का संकल्प भी लेना होगा। जब तक हम अपने समाज में व्याप्त गैर-बराबरी को समाप्त नहीं करेंगे तब तक हमें आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिलेगा।
विकास योजनाओं का लाभ समाज के अन्तिम छोर के अन्तिम व्यक्ति तक पहँुचना आवश्यक है। इसके लिए अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु   शत-प्रतिशत प्रतिबद्वता आवश्यक है।
बाबा साहब का मानना था कि लोगों के आर्थिक विकास में सरकारों का सबसे बड़ा योगदान होता है। उनकी पुस्तक ैजंजम ंदक डपदवतपजपमे सामाजिक मेनिफेस्टो तो थी ही, एक आर्थिक मेनिफेस्टो भी थी। इस पुस्तक में उन्होंने भूमि अधिकारों के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर एक व्यापक विजन दिया है।
आज से लगभग 100 वर्ष पूर्व 1918 में एक थीसिस  ैउंसस भ्वसकपदहे ंदक ज्ीमपत त्मउमकपमे में उन्होंने किसानों की समस्याओं के साथ ही ग्रामीण श्रमिकों की समस्या पर भी विमर्श किया था।
बाबा साहब ने कहा था कि ‘‘राज्य का दायित्व है कि वह लोगों के आर्थिक जीवन की ऐसी योजना बनाये, जो उच्च उत्पादकता की ओर ले जाये, लेकिंन ऐसा करते समय दूसरे अवसर बंद नहीं होना चाहिए। इसके अलावा यह उद्यम उपलब्ध कराये जाएं, उसका जो कुछ लाभ हासिल हो, सबको बराबर वितरण करे।‘‘ डाॅ0 बाबा साहब ने कहा था कि‘‘ कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है, लेकिंन इसके लिए पूंजी और मशीनरी में बढो़त्तरी के साथ-साथ प्रयास करें कि  भूमि और श्रम की उत्पादकता बढ़ाई जा सके। अतिरिक्त श्रमिकों को गैर कृषि उत्पादक क्षेत्र में लगाने से कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाला दबाव एकदम से कम हो जायेगा।‘‘ और भारत में उपलब्ध भूमि पर अत्यधिक प्रैशर भी खत्म हो जायेगा‘‘ इसके अलावा ‘‘जब इन श्रमिकों को कृषि तथा औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादक कार्यो में लगाया जायेगा, तो वे न केवल आजीविका कमा लेगें, बल्कि अधिक उत्पादन करेगें और अधिक उत्पादन का अर्थ है-अधिक पूंजी। संक्षेप में हालांकि यह चाहे जितना विचित्र लगे परन्तु भारत का औद्योगीकरण ही भारत की कृषि समस्याओें का सबसे कारगर उपचार है।‘‘
राज्यपाल ने कहा कि डा0 अम्बेडकर शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे कारगर औजार मानते थे जो सत्य है। शिक्षा आमजन को निरक्षरता से मुक्त करने के साथ ही उन्हें अन्याय एवं शोषण के विरूद्ध लड़ने की शक्ति भी प्रदान करती है। सम्पूर्ण समावेशी विकास के लिए हमें अपने गांवों को शिक्षित बनाना आवश्यक है। शिक्षित गांववासी न सिर्फ अपने विकास के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाने में सक्षम होंगे बल्कि वे इन योजनाओं को और बेहतर बनाने में सरकार की सहायता कर सकेंगे। एक पढ़ा लिखा नौजवान जब गांव में आधुनिक तकनीकी एवं प्रबंधन के साथ खेती करता है तो उसका लाभ कई गुना बढ़ जाता है। इसी संदर्भ में स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए आज आवश्यकता इस बात की भी है कि  विकास योजनाओं के साथ-साथ शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान दिया जाय। बाबा साहब ने इसीलिए संविधान में प्रत्येक नागरिक हेतु शिक्षा का प्राविधान किया था जिसे अब मूलभूत अधिकारों में शामिल कर लिया गया है।
राज्यपाल ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को सामाजिक सद्भाव व समतामूलक समाज की संकल्पना को साकार करने का संकल्प भी दिलाया। इस अवसर पर विधायक राजकुमार, देहरादून के मेयर विनोद चमोली, जिला पंचायत अध्यक्ष चमन सिंह, राज्यपाल के सलाहकार, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
इससे पूर्व राज्यपाल ने घंटाघर स्थित डा. भीमराव अम्बडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि प्रदान की। राजभवन में भी राज्यपाल ने डा.अम्बेडकर के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और राजभवन के अधिकारियों व कार्मिकों को सामाजिक समरसता से परिपूर्ण समाज के निर्माण की शपथ भी दिलाई।

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