Monday, February 17th, 2020

सबरीमाला मंदिर की पंरपरा सुरक्षित रहे

आई एन वी सी न्यूज़
नई दिल्ली, अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रप्रकाष कौषिक, राष्ट्रीय महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा एवं राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री वीरेष त्यागी ने एक संयुक्त वक्तव्य के द्वारा कहा है कि सबरीमाला मंदिर की पंरपरा का पालन हो तथा मंदिर की परंपरा सुरक्षित रहे।

उन्होंने कहा कि सबरीमाला में आज जिस तरह की परिस्थिति बनी है उसके लिए केवल सीपीएम सरकार व उनके द्वारा पोषित हिन्दू फोबिया से ग्रस्त कुछ तथा-कथित मानवाधिकार ही जिम्मेदार हैं। महिलाओं को अधिकार दिलाने की आड़ में ये तत्व वास्तव में हिन्दू आस्था को ही कुचलने का प्रयास करते रहें हैं। इन तत्वों ने कभी पादरी द्वारा बलात्कार से पीड़ित नन के लिए आवाज नहीं उठाई अपितु, पीड़ित नन को वेष्या कहने का दुस्साहस किया है। मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेष पर भी उनकी जवान को लकवा मार जाता हैं। महिला अधिकारां की रक्षा में सीपीएम का रिकार्ड हमेषा संदिग्ध रहा है। प्रवेष की मांग करने वाला कोई भी आस्थावान नहीं है। अपितु अब इस तरह की महिलाएं सामने आ रही हैं जो हिन्दू विरोधी हैं। वे या तो इसाई, मुस्लिम या कम्युनिस्ट हैं।

हिन्दू महासभा नेताओं ने यह भी कहा कि हिन्दू कभी महिला विरोधी नहीं रहा हैं। परंतु हर मंदिर की कुछ परंपराएं रहती हैं जिनका सम्मान प्रत्येक को करना चाहिए। इन्ही विविध परम्पराओं के कारण अनेकता में एकता भारत की विषेषता बन गई। ऐसा लगता है ये सब लोग मिलकर भारत की आत्मा पर ही प्रहार करना चाहते हैं। भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जहां पुरूषों का प्रवेष वर्जित हैं। क्या ये  लोग उन परंपराओं को पुरूष विरोधी कहेंगे? हिन्दू फोबिया से ग्रस्त कुछ कथित बुद्धिजीवियों ने अय्यपा के भक्तों के लिए गुंड़े शब्द का प्रयोग किया है। इन अपषब्दों के लिए हिन्दू महासभा उनकी निंदा करती हैं लाखों भक्त सड़क पर उतरे हैं परंतु हिंसा की बात छोड़िये, कभी किसी के लिए अपषब्द का भी प्रयोग नहीं किया गया। उनके इस शांतिपूर्ण आंदोलन की प्रषंसा करने की जगह अपषब्दों का प्रयोग कर वे अपनी मानसिकता को स्पष्ट कर रहें हैं। उन को समझना चाहिए कि हिन्दू हमेषा परिवर्तनषील रहा है। क्या दक्षिण के मंदिरों में दलित पुजारियों को स्वीकार नहीं किया गया? परन्तु यह परिवर्तन इन आस्थावानों के अंदर से ही आना चाहिए। कोई भी बाहय तत्व इनको थोप नहीं सकता।

हिन्दू महासभा नेताओं ने कहा कि सबरीमाला की यह पंरपरा किसी को अपमानित नहीं करती, कष्ट नहीं देती । यह परंपरा पूर्ण रूप से संविधान की धारा 25 के अंतर्गत ही है। इसलिए यह लड़ाई संविधान के दायरे में रहकर संविधान की भावना की रक्षा करने के लिए ही हैं। तीन तलाक के कानून का विरोध करने वाले मुंह से इस आंदोलन का विरोध कर सकते है?

सीपीएम सरकार ने देवसवोम बोर्ड का संविधान इस प्रकार बदल दिया है कि वे हिन्दू मंदिरों को गैर हिन्दुओं के हवाले कर सकें। अखिल भारत हिन्दू महासभा उनके इस संविधान विरोधी और हिन्दू विरोधी षड्यंत्र की कठोरतम शब्दों में निंदा करते हुए चेतावनी देती हैं। कि वह हिन्दुओं को कुचलने का अपना अपवित्र षड्यंत्र बंद करे। केरल तक सिमट गए हैं। उन्हें हिंदू आस्था का सम्मान करना चाहिए। केरल की सीपीएम सरकार अपनी गलती स्वीकार कर उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करे।

   

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