Saturday, July 4th, 2020

संजय तिवारी “राष्ट्रवादी” की कविता " ऐ ज़िन्दगी "

ऐ  ज़िन्दगी
ए ज़िन्दगी तुझे और जीने को दिल चाहता है, मौत के तसब्बुर से भाग जाने को दिल चाहता है ! अतीत की गलियों में लौट जाने को दिल चाहता है, फिर बचपना दिखाने को दिल चाहता है ! लोरियां सुनके सोने को दिल चाहता है, माँ के आँचल में छुपने को दिल चाहता है ! वक़्त ठहर जाये ये दिल चाहता है, रेत को मुट्ठी में समेटने को दिल चाहता है ! दिल से दिल लगाने को दिल चाहता है, ए ज़िन्दगी तुझे और जीने को दिल चाहता है ! रंजिशें तमाम भूल जाने को दिल चाहता है, गिले-शिकवे मिटाने को दिल चाहता है ! बेचैन हसरतों को जगाने को दिल चाहता है, रुश्बाइयों से भाग जाने को दिल चाहता है ! रूठों को मनाने को दिल चाहता है, खुद मान जाने को दिल चाहता है ! ज़िन्दगी को जिंदादिल बनाने को दिल चाहता है, ए ज़िन्दगी तुझे और जीने को दिल चाहता है ! कुछ नया गुनगुनाने को दिल चाहता है, एक नया सुर सजाने को दिल चाहता है ! एक नया अफ़साना बनाने को दिल चाहता है, सबको अपना बनाने को दिल चाहता है ! किसी का प्यार पाने को दिल चाहता है, प्यार अपना लुटाने को दिल चाहता है ! प्यार में किसी के खुद को मिटाने को दिल चाहता है, ए ज़िन्दगी तुझे और जीने को दिल चाहता है ! कुछ कर दिखाने को दिल चाहता है, मादरे वतन पे मिट जाने को दिल चाहता है ! आज कुछ नया कर दिखाने को दिल चाहता है, ए ज़िन्दगी तुझे और जीने को दिल चाहता है !
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SANJAYTIWARI RASHTVADI, sanjay tiwari poetपरिचय -:
संजय तिवारी “राष्ट्रवादी”
विश्व कीर्तिमान धारक, राष्ट्रपति पुरुष्कार विजेता, पूर्व राष्ट्रीय  खिलाड़ी “मल्ल्खाम्भ
दायित्व  : महामंत्री : संस्कार भारती, झाँसी ,  सचिव : अक्स नाट्य एवं कला संसथान, झाँसी
अभिरुचि  : अभिनय, रंगमंच, लेखन, समाजसेवा एवं स्रजनात्मक कार्य
सम्प्रति : सेल्स मेनेजर (फार्मा कंपनी)
संपर्क - : निवास – 2494/1 साहनी विहार, मसीहागंज, सीपरी झाँसी (उप्र) संपर्क :
9451264760 /  7618815130       ईमेल : sanjaywrh@gmail.com

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