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Wednesday, December 2nd, 2020

संगम की रेती पर अखबारों व किताबों की भी है दुनिया

mahakumbh storyआई एन वी सी , प्रवीण राय,
 इलाहाबाद,
आचार्य श्री चन्द्र नि:शुल्क वाचनालय में प्राचीन के साथ बाल साहित्य का अद्भुत संग्रह - 22 अखबारों समेत महिला पत्रिकाओं का अद्भुत संग्रह
 
यदि आप अखबार व किताबों की संगति के बिना नहीं रह सकते और संगम स्नान के लिए आये हुए हैं तो फिक्र करने की कोई बात नहीं। संगम की रेती पर बहुभाषी अखबारों, महिला पत्रिकाओं, प्राचीन से लेकर बाल साहित्य तक की नि:शुल्क व्यवस्था चन्द्र नि:शुल्क वाचनालय में की गयी हैे। इस वाचनायलय की विशेषता यह है कि यह मेले में शोर-शराबे से दूर है और यहां सैकड़ों की संख्या में किताब व अखबार के शौकीनों के बैठने की व्यवस्था की व्यवस्था है। वाचनालय से पहले एक चित्र प्रदर्शनी भी लगायी गयी है जिसमें वैदिक व प्राचीन साहित्य की परंपराओं को दिखाया गया है ताकि यहां आने वाले श्रद्धालु सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में जान सकें। वाचनालय में भारत के विविध क्षेत्रों से आये श्रद्धालुओं के लिए 22 अखबार भी उपलब्ध हैं और ये गुजराती,बंग्ला,उर्दू, अंग्रेजी,मलयालयम, कन्नड़ आदि भाषाओं में मौजूद हैं ताकि देश के दूर-दराज से आने वाले बहुभाषी क्षेत्रों के लोग भी अपनी भाषा में महाकुंभ में होने वाली गतिविधियों को जान सकें। मेले के सेक्टर नंबर-4 में त्रिवेणी मार्ग पर दाएं से दूसरे कैंप में यह वाचनायलय  प्राचीनतम अखाड़ों में से एक पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण द्वारा संचालित हैै। इस वाचनालय में अखबारों के अतिरिक्त साप्ताहित,पाक्षिक व मासिक पत्रिकाएं भी उपलब्ध हैं। यहां उपलब्ध पत्रिकाओं में अहा जिंदगी, इण्डिया टुडे, आउट लुक,फ्रंट लाइन, प्रतियोगिता दर्पण जैसी पत्रिकाएं जहां बुद्विजीवियों का मनोरंजन करती हैं वहीं बाल हंस, नंदन, चाचा चौधरी, नागराज की दुनिया, पंचतंत्र,तेनालीराम, झांसी की रानी,मदर टेरेसा आदि पुस्तकें बच्चों का स्वस्थ मनोरंजन करती हैं। महिलाएं भी साहित्य से वंचित न रहें इसके लिए भी यहां पूरा प्रबंध किया गया है और इनके लिए अनोखी, रूपायन, गृहशोभा, सखी, गृहलक्ष्मी, कादम्बिनी व वनिता जैसी पत्रिकाओं का संकलन किया गया है।  इस वाचनालय में रांगेय राघव की रत्ना की बात, अकबर वीरबल, पर्यावरण, फक्कड़ मसीहा, हर्षवर्द्धन,स्वामी गड.गेश्वरानंद व डा. बिनदू जी महराज बिन्दू का अभिनंदन ग्रंथ ‘गुरू-वेद ज्योति:’ व ‘स्वर्ण जयंती’ उपलब्ध हैं।

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