Dr. Raman Singh INVC NEWSआई एन वी सी न्यूज़
रायपुर,
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के सूखा प्रभावित किसानों और खेतिहर श्रमिकों को राहत पहुंचाने के लिए आज यहां कई महत्वपूर्ण अतिरिक्त पैकेजों का ऐलान किया। उन्होंने इस बारे में विधानसभा में विस्तार से वक्तव्य दिया और उसके बाद सदन के बाहर विधानसभा परिसर में भी इस संबंध में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि और किसान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। सूखे के संकट की इस घड़ी में सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उनके हित में हर वो उपाय करने के लिए कटिबद्ध है, जो उनके लिए हितकारी हों।
मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के अन्नदाता किसानों को सूखे के दुष्प्रभाव से बचाने और राहत देने के लिए की गयी अतिरिक्त राहत पैकेजों की घोषणाएं इस प्रकार हैं- (1)राज्य के सभी सूखा प्रभावित किसानों के खरीफ 2015 के अल्पकालीन कृषि ऋणों को ब्याज रहित मध्यकालीन ऋणों में परिवर्तन की सुविधा दी जाएगी, अथवा उन्हें आंशिक ऋण माफी के विकल्प दिए जाएंगे। लगभग पांच लाख किसान परिवारों को इसका लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को 37 पैसे आनावारी तक के अधिक सूखा प्रभावित गांवों में ऋण परिवर्तन पर इस वर्ष 2015-16 में 30 प्रतिशत, अगले वर्ष 2016-17 में 50 प्रतिशत और वर्ष 2017-18 में 20 प्रतिशत वार्षिक ब्याज रहित किश्तों में भुगतान की सुविधा मिलेगी। शेष गांवों में दो बराबर ब्याज रहित किश्तों में दो वर्ष में भुगतान किया जा सकेगा। विकल्प में 75 प्रतिशत ऋण जमा करने की दशा में 25 प्रतिशत ऋण माफ किया जाएगा। (2) मनरेगा योजना के तहत सूखा प्रभावित तहसीलों में 150 दिन के स्थान पर 200 दिनों तक रोजगार दिया जाएगा। (3) सूखा प्रभावित 117 तहसीलों में इस वर्ष भू-राजस्व (लगान) की वसूली को स्थगित रखा गया था, उसे अब माफ किया जाएगा। (4) सूखा प्रभावित तहसीलों में खरीफ वर्ष 2015 के सिंचाई टैक्स की जो वसूली अभी स्थगित की गयी है, उसे भी माफ किया जाएगा। (5) सूखा प्रभावित किसानों को उनकी बेटियों की विवाह के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत अब तक दी जाने वाली 15 हजार रूपए की सहायता राशि को बढ़ाकर 30 हजार रूपए किया जाएगा। (6) नगर पंचायत क्षेत्रों में मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए आवश्यकतानुसार विभागीय मद से रोजगारमूलक कार्य शुरू कराएं जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि किसानों के व्यापक हित में लिए गए इन फैसलों से प्रदेश के सूखा प्रभावित किसानों को अवश्क लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सूरक्षित करने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। भविष्य में भी जब जरूरत होगी, हमारी सरकार किसानों के हित में उनके साथ खड़ी रहेगी। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ किसानों का प्रदेश है और राज्य सरकार हमेशा किसानों के हितों के लिए काम करती आ रही है। प्रदेश के अन्नदाता किसानों के परिश्रम से खाद्यान्न उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है और प्रदेश सरकार को तीन बार राष्ट्रीय कृषि कर्मण पुरस्कार से नवाजा गया है।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इस वर्ष मानसून के दौरान अल्प वर्षा के कारण हमारे प्रदेश के सूखे स्थिति निर्मित हो गयी है। सितम्बर के महीने में जैसे ही राज्य शासन को यह आभास होने लगा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में अल्पवर्षा के कारण सूखे की स्थिति बन रही है,  तभी से हमारी सरकार ने किसानों की खरीफ फसल को बचाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
उन्होंने बताया कि इन फैसलों के तहत (1) असाध्य विद्युत पम्पों के विद्युतीकरण के लिए सरगुजा और बस्तर विकास प्राधिकरण, पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण तथा अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण से 37 करोड़ 20 लाख रूपए का अनुदान स्वीकृत कर ऐसे पम्पों के विद्युतीकरणकी व्यवस्था की गयी। (2) सिंचाई पम्पों को निःशुल्क बिजली देने के लिए निर्धारित सीमा में 1500 यूनिट की वृद्धि की गयी। (3) सिंचाई पम्प विद्युतीकरण के सभी लंबित आवेदन पत्रों पर तत्काल विद्युतीकरण किया गया। किसानों को स्थायी, अस्थायी जैसा भी बन सका, विद्युत कनेक्शन प्रदान किया गया। (4) किसानों को चौबीसों घंटे विद्युती आपूर्ति की व्यवस्था की गयी। (5) डीजल पम्पों के माध्यम से पानी लेकर यथासंभव खरीफ फसलों को बचाने का प्रयास किया गया। (6) जल उपयोगिता समितियों की बैठक लेकर सिंचाई जलाशयों में उपलब्ध पानी से किसानों को सिंचाई के लिए पानी दिया गया। (7) सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार मनरेगा के तहत रोजगारमूलक कार्य खोलकर रोजगार देने की व्यवस्था की गयी, ताकि काम की तलाश में लोगों को बाहर न जाना पड़े।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके बाद भी अवर्षा की स्थिति बनी रही, तो पुनः कई निर्णय लिए गए। इन फैसलों के तहत (1) नजरी आनावारी के आधार पर प्रदेश की 150 तहसीलों में से 117 तहसीलों को सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया। (2) सूखा प्रभावित तहसीलों में भू-राजस्व की वसूली स्थगित की गयी। (3) सूखा प्रभावित क्षेत्रों के प्रत्येक गांव में जरूरतमंद लोगों के लिए एक क्ंिवटल चावल रखने की व्यवस्था की गयी। (4) सूखे को प्राकृतिक आपदाओं की सूची में शामिल किया गया। (5) सूखा प्रभावित किसानों को ग्रामवार विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया, तथा उन्हें राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत 33 प्रतिशत से अधिक फसल हानि पर आर्थिक सहायता का वितरण शुरू कर दिया गया है। इसके लिए सभी जिलों को आवंटन उपलब्ध कराया गया है। (6) सभी सूखा प्रभावित किसानों को आगामी खरीफ सीजन 2016 में उनकी पात्रता के अनुरूप अधिकतम एक क्विंटल धान बीज निःशुल्क देने का निर्णय लिया गया है। (7) प्रत्येक जिले में किसान-मितान केन्द्र स्थापित कर किसानों की समस्याओं को सुनने और उनका निरकारण करने की व्यवस्था की गयी है।

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