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Thursday, May 6th, 2021

श्वेता मिश्र की पाँच कविताएँ

श्वेता मिश्र की पाँच कविताएँ 
1. निशान
पतीले में आग पर रखा दूध ले रहा था उबाल पर उबाल क्षण भर को फिसलती नज़र और एक उबाल ...बिखर गया दूध ह्रदय पटल पर स्मृतियों का उबाल उठती गिरती बीती यादों की तरंगे एक स्मृति की कोर में उलझी स्मृति एक उबाल और बिखर गया हथेली पर एक उबाल ही था या फूटा कोई ज्वालामुखी लावा फूट कर फैला था तपिस बढ़ती रही मुरझाए आँचल के कोने की एक ठंडी फुहार तपिस अब भी बाकी है और आग पर पड़ा है बिखरे दूध का निशान !!
2.लफ्ज़
हस्ते मुस्कुराते इठलाते जलते बुझते जगमगाते लफ्ज़ लफ्ज़ कहलाते हैं ! किरदारों में ढलते खुशियों और उदासियों की चादर से निकलते बर्फ में जमते धूप में पिघलते पतझड के पीले पत्तों से एक उम्र ये लफ्ज़ भी जी जाते हैं !!
3.चिनार
झरोखे से झांकता चिनार झुक कर निहारता पत्तों की सुर्ख रंगीनियाँ आँखों की लालिमा बताता कभी हवाओं के संग उड़ आता कभी बिछ के कितनी यादों को जगाता और कभी आँचल की तरह आ घेरता पतझड़ में गिर के गालो पर बोसे दे जाता वो चिनार जो दहलीज़ पर खड़ा है अतीत से निकल आज में चल पड़ा है सुर्ख होती पत्तियों की झंकार साज़ छेड़ रही है वीरानियों में ठूंठ होते पेड़ सुफेदी की बाट जोह रही है!!
4.मैं
मैं बोनसाई धरती की कोख से गयी जाई ज़मीन से उखाड़ गमले में गयी बसाई शाखों को कटवाई बंद कमरे की झीनी धूप पाई दर्द को भी सिकन नही आई सिंचन को थोडा जल पाई खिल के पत्तों ने मुस्कान अपनी जताई कभी धूप कभी छावं नियति अपनी पाई मैं बोनसाई वजूद पेड़ का पौधा बन सिमट आई सुखन औरों में अपनी मुस्कुराहट पाई
5.एकाकी मन
जब भी होता एकाकी मन चुपके से तुम्हारी बातें मन के कोने से निकल कर मुखातिब हो आती हैं 'अकेली रहोगी' बात इतनी सी मन में तूफ़ान मचा जाती है एक एक हार्फ़ की टूटी किरचें मन को लहूलुहान कर जाती हैं आँगन की मिटटी अब भी गीली होगी मन के किसी कोने में आस जगा जाती हैं अनभिज्ञं नही मन मेरा भी तुझे भूलने की चाह में मुझे तिल-तिल मिटा जाती हैं
Shweta mishra,Shweta mishr,writer Shweta mishra,poet Shweta mishra,Shweta mishra poetपरिचय - :
श्वेता मिश्र शिक्षा- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से स्नातकोत्तर
सम्प्रति- फैशन डिजाइनर
लेखन विधाएँ-कविता गजल नज़्म कहानी
प्रकाशित कृतियाँ- कविता ग़ज़ल लेख कहानी (कई मासिक-पत्रिका एवं वेब-पत्रिका में निरंतर प्रकाशित)
ई-मेल-mshwetaa@gmail.com पूरा पता- suite 4 .Covenant University ,Canaanland ,Ota,Ogun state ,Nigeria

Comments

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Users Comment

Shweta Misra, says on December 15, 2014, 5:07 PM

यदि उत्कृष्ट लेखन की प्रेरणा मिलती रहे तो जरुर ......कविता की सराहना के लिए सादर आभार आपका ... !!

Shweta Misra, says on December 15, 2014, 4:18 PM

आपका हार्दिक आभार कविता पसंद करने के लिए व कीमती प्रतिक्रिया देने हेतु...... सादर !!

Shweta Misra, says on December 15, 2014, 4:17 PM

i am really appreciate it ..... Regards

Shweta Misra, says on December 15, 2014, 2:14 PM

एकाकी मन...... मेरी रचना पसंद आयी आपके सराहना भरे शब्दों की शुक्रगुजार हूँ ....सादर

Jugal kishor, says on December 15, 2014, 11:35 AM

बढिया कविताएँ ! बधाई हो श्वेता ! लेखन में काफी कुछ करने का इरादा लग रहा हैं !

Minakshi Nadda, says on December 15, 2014, 9:27 AM

शानदार कविताएँ हैं ! पढ़ने के बाद बहुत कुछ याद दिला गईं ! साभार श्वेता ,बधाई !!

Indarani Mukhrjee, says on December 15, 2014, 10:24 AM

I am extremely impressed with your writing skills

Madhu Gupta, says on December 15, 2014, 8:23 AM

एकाकी मन...बहुत कुछ कह जाती हैं ! बहुत ही शानदार कविता लिखी हैं आपने ! बधाई की आप सच में पात्र हैं !