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Thursday, September 24th, 2020

शोहरत के शिखर को छूता श्री रामलीला क्लब बराड़ा**

निर्मल रानी**,,

हमारे देश में तमाम धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं विभिन्न प्रकार के धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन समय-समय पर करती रहती हैं। श्री रामलीला क्लब नामक संस्थाएं भी देश के अधिकांश çज़लों, शहरों व $कस्बों में श्री रामलीला मंचन,दशहरा तथा दूसरे कई धार्मिक आयोजनों में मश$ग़ूल देखी जा सकती हैं। परंतु हरियाणा के अंबाला çज़ले के अंतर्गत् धार्मिक व सामाजिक आयोजन करने वाले बराड़ा $कस्बे के श्री रामलीला क्लब ने अपनी कारगुज़ारियों के बल पर विEस्तरीय शोहरत का जो स्थान प्राप्त किया है निश्चित रूप से उसका मु$काबला देश का कोई भी क्लब अथवा धार्मिक आयोजन अंजाम देने वाली कोई भी संस्था नहीं कर सकती। श्री रामलीला क्लब बराड़ा के संस्थापक अध्यक्ष व सूत्रधार हैं राणा तेजिंद्र सिंह चौहान। इžो$फा$क से इस वर्ष क्लब की स्थापना के 2भ् वर्ष भी पूरे हो चुके हैं। क्लब को अपने रजत जयंती वर्ष में दूसरी बार लि का रिकॉर्ड 2013 से नवाज़ा गया है। इसके पूर्व भी वर्ष 2011 का लि का रिकॉर्ड श्री रामलीला क्लब बराड़ा को प्राप्त हो चुका है। गौरतलब है कि यह क्लब गत् 6 वर्षों से लगातार दुनिया के सबसे ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण करता आ रहा है। और प्रत्येक वर्ष यह अपने ही पिछले रिकॉर्ड को तोड़ता रहा है। इस प्रकार लि का रिकॉर्ड में श्री रामलीला क्लब बराड़ा ने जहां 2009 में 17भ् $फुट ऊंचे रावण के पुतले के निर्माण के लिए वर्ष 2011 में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई तथा इसे राष्ट्रीय रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र देकर स मानित किया गया तथा 2011 की लि का बुक में भी उसका सचित्र उल्लेख किया गया वहीं वर्ष 2011 में बनाए गए 18भ् $फुट ऊंचे रावण के पुतले के निर्माण के लिए वर्ष 2013 के लि का बुक ऑ$फ रिकॉर्ड में इस पुतले का उल्लेख किया गया तथा राष्ट्रीय कीर्तिमान 2013 का प्रमाणपत्र भी जारी किया गया। इस प्रकार श्री रामलीला क्लब बराड़ा देश का पहला ऐसा क्लब बन गया है जिसने कि दो बार लि का रिकॉर्ड हासिल किया हो तथा अपने ही द्वारा बनाए जाने वाले कीर्तिमान को स्वयं ही तोड़ा हो। उल्लेखनीय है कि लिमका रिकॉर्ड 2011 व 2013 के प्रमाण पत्रों में दोनों बार क्लब के साथ-साथ संस्थापक अध्यक्ष राणा तेजिंद्र सिंह चौहान के नाम का विशेष रूप से çज़क्र किया गया है। तेजिंद्र चौहान रावण के दुनिया के इस सबसे ऊंचे पुतले के निर्माण के कारणों पर प्रकाश डालते हुए यह बताते हैं कि समाज में निरंतर बढ़ती जा रही बुराईयों को प्रतिबिंबित करने हेतु ही उनका क्लब प्रत्येक वर्ष रावण की ऊंचाई में भी निरंतर कुछ न कुछ बढ़ोत्तरी करता रहता है। और कितना ही ऊंचा होने के बावजूद बुराईयों का प्रतीक यह रावण का विशालकाय पुतला बुराईयों का अंत करने के संकल्प व प्रतीक स्वरूप आç$खरकार विजयदशमी की संध्या को अगि्न के हवाले कर दिया जाता है। इस प्रकार इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की जाती है कि समाज में बुराई चाहे जितना विकराल रूप क्यों न धारण कर ले परंतु अंततोगत्वा उसका विनाश सुनिश्चित ही होता है। ठीक धू-धू कर जलते हुए दुनिया के सबसे ऊंचे रावण के विशालकाय पुतले की तरह। चौहान के अनुसार बराड़ा में निर्मित किए जाने वाला यह विशाल पुतला अपने-आप में मंहगाई,मिलावट$खोरी,चरित्र हनन, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता, जातिवाद, अहंकार, असमानता, कन्या भ्रुण हत्या, छुआछूत, अशिक्षा, दहेज प्रथा, अज्ञानता व अंधविEास जैसी तमाम बुराईयों को प्रतीकस्वरूप अपने-आप में समाहित करता है। रावण के इस विEवि यात पुतले की और भी कई विशेषताएं हैं। इस पुतले के निर्माण हेतु तथा इसे भव्य, संुदर व आकर्षक बनाने हेतु परियोजना निर्देशक की çज़ मेदारी तेजिंद्र चौहान द्वारा स्वयं निभाई जाती है। एक कलाकार होने के नाते वे स्वयं यह निधüारित करते हैं कि रावण की लंबाई-चौड़ाई, उसकी साज-सज्जा तथा उसका रंग व अन्य तमाम अंगों का निधüारण किस प्रकार सुनिश्चित करना है। इस परियोजना में आगरा से आए मुस्लिम कारीगर व उसके परिवार के लोग सहभागी होते हैं। इस मुस्लिम परिवार के रहने-सहने का पूरा $खर्च क्लब द्वारा उठाया जाता है। यहां तक कि इस परिवार की धार्मिक ज़रूरतों को भी क्लब समय-समय पर पूरा करता है। इस मुस्लिम परिवार के अतिरिक्त और भी सभी धमोZ व जातियों के लोग मिलकर रावण के इस विशालकाय पुतले के निर्माण में दिन-रात एक कर अपना पूरा योगदान देते हैं। श्री रामलीला क्लब बराड़ा सर्वधर्म संभाव व सांप्रदायिक सौहाद्रü के लिए भी देश के समक्ष एक सुंदर मिसाल पेश करता है। जहां चौहान इस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष हैं वहीं इस क्लब के संयोजक की भूमिका अदा करते हैं प्र यात लेखक,स्तंभकार एवं हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य तनवीर जा$फरी। रावण के पुतले की प्रसिद्धि के साथ-साथ श्री रामलीला क्लब को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि के शिखर तक ले जाने में तनवीर जा$फरी की भी बहुत अहम भूमिका है। जा$फरी को विEास है कि दो बार लि का रिकॉर्ड प्राप्त करने वाले श्री रामलीला क्लब बराड़ा को न केवल तीसरी बार भी एक और लि का रिकॉर्ड हासिल होगा बल्कि यह क्लब यथाशीघ्र गिनीज़ बुक वल्र्ड रिकॉर्ड भी प्राप्त कर लेगा। इस वर्ष दशहरा महोत्सव के आयोजन के कार्यक्रम के विषय में जा$फरी ने बताया कि अपने रजत जयंती वर्ष के अवसर पर इसी वर्ष अक्तूबर माह में आयोजित होने वाले दशहरा महोत्सव के अवसर पर क्लब द्वारा एक बड़ी योजना तैयार की जा रही है। इस वर्ष दशहरा महोत्सव के अवसर पर पांच दिवसीय सांस्कृतिक मेले का आयोजन किए जाने का प्रस्ताव है। बराड़ा में बीस अक्तूबर से 24 अक्तूबर तक होने वाले इस आयोजन में गीत-संगीत, कवि स मेलन, कबaी,नृत्य-लोकनृत्य तथा लोकसंगीत के कई आयोजन प्रस्तावति हैं। पांच दिनों तक लगातार चलने वाले इस मेले में विभिन्न प्रकार के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। तनवीर जा$फरी का मानना है कि वे भविष्य में बराड़ा में आयोजत होने वाला दशहरा महोत्सव मेला हरियाणा के सूरजकुंड में आयोजित होने वाले शिल्प मेले से भी अधिक प्रसिद्धि प्राप्त करेगा। उनकी इच्छा है कि हरियाणा के पर्यटन मानचित्र में बराड़ा का नाम भी गौरवपूर्ण तरी$के से दर्ज हो। बराड़ा में इस वर्ष दशहरा महोत्सव के अवसर पर शुरु किया जाने वाला यह पांच दिवसीय मेला क्लब की ओर से अब प्रत्येक वर्ष लगता रहेगा तथा इसमें निरंतर बढ़ोत्तरी होती रहेगी। शोहरत के शिखर को छू लेने के बावजूद श्री रामलीला क्लब बराड़ा को प्रत्येक वर्ष कुछ नकारात्मक हालात से भी रूबरू होना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये पुतले के निर्माण पर $खर्च करने वाले इस क्लब के पास स्वयं का दशहरा ग्राऊंउ नहीं है। परिणामस्वरूप रावण दहन के आकर्षक व रंगारंग कार्यक्रम हेतु आयोजकों को लगभग प्रत्येक वर्ष किसी न किसी नए मैदान की तलाश करनी पड़ती है तथा किसी के खेत कभी निज्शुल्क तो कभी किराए पर लेने पड़ते हैं। जबकि इस आयोजन की लगातार बढ़ती शोहरत के परिणामस्वरूप यहां आने वाले लाखों दर्शकों के हुजूम में प्रत्येक वर्ष बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इस आयोजन को देखने हेतु केवल बराड़ा अथवा अंबाला ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा व कई पड़ोसी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश,हिमाचल प्रदेश, पंजाब,ज मु-कश्मीर, चंडीगढ़ तथा राजस्थान आदि क्षेत्रों से हज़ारों दर्शक आते हैं। ज़ाहिर है इस वर्ष आयोजित होने वाले पांच दिवसीय मेले के कारण तथा विE के सबसे ऊंचे रावण जिसकी लंबाई इस वर्ष 192 $फुट होना प्रस्तावित है के लगातार पांच दिन तक खड़े रहने की योजना के कारण इस बार दर्शकों व भक्तजनों की भीड़ में और इज़ा$फा होने की पूरी संभावना है। और जिस प्रकार क्लब द्वारा इस वर्ष पांच दिवसीय मेले की शुरुआत की जा रही है तथा योजना के अनुसार यह सिलसिला यदि भविष्य में भी जारी रहा तो निश्चित रूप से क्लब को एक बड़े व निर्मित ढांचे की स्थायी रूप से आवश्यकता पड़ेगी। ज़ाहिर है इसके लिए एक बड़े $फंड की भी ज़रूरत है। ऐसे में सरकार तथा क्षेत्र के संपन्न लोगांे को चाहिए कि वे क्लब की इस महत्वाकांक्षी योजना में अपना पूरा सहयोग दें तथा इस आयोजन की सफलता तथा भविष्य के निरंतर एवं सफल संचालन हेतु क्लब के लिए आयोजन स्थल हेतु पर्याप्त ज़मीन की व्यवस्था करें।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर निर्मल रानी गत 15 वर्षों से देश के विभिन्न समाचारपत्रों, पत्रिकाओं व न्यूज़ वेबसाइट्स में सक्रिय रूप से स्तंभकार के रूप में लेखन कर रही हैं.

Nirmal Rani (Writer) 1622/11 Mahavir Nagar Ambala City  134002 Haryana phone-09729229728

*Disclaimer: The views expressed by the author in this feature are entirely her own and do not necessarily reflect the views of INVC

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