शब्द साधक सम्मानों की घोषणा : भोपाल के कथाकार स्वयं प्रकाश को शिखर सम्मान

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आई एन वी सी न्यूज़ 

नई  दिल्ली ,

हिन्दी साहित्यिक पत्रिका ‘पाखी’ द्वारा प्रति वर्ष दिये जाने वाले हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित जे.सी. जोशी स्मृति शब्द साधक सम्मानों की घोषणा कर दी गई है। इस वर्ष के प्रस्तावित ‘पाखी महोत्सव-2109’ में मूर्धन्य कवि स्वर्गीय केदार नाथ सिंह को वर्ष 2016 का ‘शब्द साधक शिखर सम्मान’ दिया जा रहा है। स्वर्गीय केदारनाथ सिंह,हिन्दी कविता के समकालीन परिदृश्य में प्रकाश स्तंभ की तरह हैं।वे अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरा सप्तक के कवि रहे। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा उन्हें वर्ष 2013 का ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था।वे यह पुरस्कार पाने वाले हिन्दी के 10वें लेखक थे।केदारनाथ सिंह की कविता का अनुवाद लगभग सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेज़ी, स्पैनिश, रूसी,जर्मन और हंगेरियन आदि विदेशी भाषाओं में भी हुए हैं।

इसी के साथ वर्ष 2016 का ‘शब्द साधक रचना सम्मान’ मनोज रूपड़ा को उनके उपन्यास ‘काले अध्याय’ के लिए दिया जायेगा।वर्ष 2016 का ‘शब्द साधक अनुवाद सम्मान’ अजय चौधरी को उनकी पुस्तक ‘शस्त्र विराम'(लियो टॉलस्टॉय की विश्व प्रसिद्ध  कृति “War and Peace” )के लिए दिया जायेगा।वर्ष 2016 का ‘शब्द साधक अन्य भाषा रचना सम्मान’ उर्दू के ख्याति प्राप्त लेखक खालिद जावेद को उनकी पुस्तक ‘मौत की किताब’ के लिए दिया जायेगा और ‘शब्द साधक कविता सम्मान’ सूरज सहरावत को दिया जायेगा। सूरज सहरावत को यह सम्मान कविता की विधा में उनके अभी तक के समग्र योगदान के दृष्टि गत दिया जा रहा है।

इसी क्रम में वर्ष 2017 का ‘शब्द साधक शिखर सम्मान’ हिन्दी कथा साहित्य में प्रथम पंक्ति के रचनाकार असगर वजाहत को दिया जा रहा है। असगर वजाहत उन विरले कहानीकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने पूरी तरह अपनी प्रतिबद्धता बनाये रखते हुए भाषा और शिल्प के सार्थक प्रयोग किये हैं। वे न केवल अपनी गति बनाए हुए हैं बल्कि उनके रचना-संसार में संवेदना के धरातल पर कुछ परिवर्तन भी आए हैं। हास्य, व्यंग्य और खिलंदड़ापन के साथ-साथ अब उनकी कहानी में गहरा अवसाद और दुःख शामिल हो गया है। बहुआयामी जटिल यथार्थ और आम आदमी की पीड़ा को व्यक्त करने के लिए वे नए’हथियारों की तलाश’ में दिखाई पड़ते हैं।
इसी के साथ वर्ष 2017 का ‘शब्द साधक अनुवाद सम्मान’ ख्याति प्राप्त अनुवादक डॉ. प्रभाती नैटियाल को स्पैनिश से हिन्दी में कई महत्वपूर्ण कृतियों के अनुवाद के लिए दिया जायेगा।डॉ प्रभाती नौटियाल रचनाओं को स्पैनिश से हिन्दी में अनुवाद करने वाले एक समर्पित व्यक्तित्व हैं। स्पैनिश साहित्य, भाषा तथा लेटिन अमेरिकी संस्कृति व सभ्यता से संदर्भित कृतियों के हिन्दी अनुवाद के लिए आपको विशेष ख्याति प्राप्त है।जोस मोर्त्ती की कविताएं, मेक्सिको का संक्षिप्त इतिहास, वास्कोडिगामा की पहली समुद्री यात्रा रोजनामचा(पुर्तगाली) के हिन्दी अनुवादक समेत अन्य अनेक महत्वपूर्ण अनुवाद कार्य आपने किये हैं।

वर्ष 2017 का ‘शब्द साधक जनप्रिय लेखक सम्मान’ कथाकार मनीष वैद्य को उनकी कहानी संग्रह ‘फुगाटी का जूता’ के लिए दिया जायेगा।मनीष वैद्य सामाजिक सरोकार व सकारात्मक पत्रकारिता के साथ-साथ उल्लेखनीय कथा साहित्य भी रच रहे हैं। ‘फुगाटी का जूता’ तथा ‘टुकड़े-टुकड़े धूप’ इनके महत्वपूर्ण व चर्चित कहानी संग्रह हैं।

वर्ष 2017 का ‘शब्द साधक आलोचना सम्मान’ बजरंग बिहारी तिवारी को दिया जायेगा। बजरंग बिहारी का आलोचना क्षेत्र, भक्ति काव्य और भक्ति आंदोलन से लेकर समकालीन साहित्य तक विस्तृत है।विशेष रूप से विभिन्न भारतीय भाषाओं के दलित साहित्य में मौजूद आंतरिक एकता व वैविध्य को रेखांकित किया है।उन्होंने समकालीन भारतीय समाज और लोकतंत्र के मध्य एक रचनात्मक संसार विकसित किया है।

वर्ष 2017 का ‘शब्द साधक कविता सम्मान’ 1990 के बाद कविता के स्वर में बदलाव लाने वाले कवियों में अग्रणी कवि महेश आलोक को दिया जायेगा।महेश आलोक को यह सम्मान कविता की विधा में उनके समग्र योगदान के दृष्टि गत दिया जा रहा है। उनका पहला संग्रह ‘चलो खेल  जैसा कुछ खेलें’ कोई 18 वर्ष पहले प्रकाशित हुआ था। जबकि दूसरा संकलन ‘छाया का समुद्र’ हालिया प्रकाशित हुआ है।

इसी क्रम में 2018 का ‘शब्द साधक शिखर सम्मान’ अग्रणी कथाकार स्वयं प्रकाश को दिया जा रहा है। भोपाल निवासी कथाकार स्वयं प्रकाश अपनी कहानियों और उपन्यासों के लिए विख्यात हैं। वरिष्ठ कथाकार स्वयं प्रकाश , प्रेमचंद की परंपरा के महत्वपूर्ण कथाकार माने जाते हैं। इनकी कहानियों का अनुवाद रूसी भाषा में भी हो चुका है। कथाकार की खिलंदड़ी भाषा और अत्यधिक सहज शैली का निजी और मौलिक प्रयोग उन्हें हमारे समय का सर्वाधिक लोकप्रिय कथाकार बनाता है।

वर्ष 2018 का ‘शब्द साधक कथा सम्मान’ मीनाक्षी नटराजन को दिया जायेगा। इनकी पुस्तक ‘अपने-अपने कुरुक्षेत्र’ इन्हें सिद्धहस्त कथाकार की पहचान देता है। इस उपन्यास में मीनाक्षी ने सत्यवती , गांधारी, कुंती, शिखंडी के भीष्म के माध्यम से महाभारत-कथा के कतिपय अंतः सूत्रों का नवीन विवेचन प्रस्तुत किया है।

वर्ष 2018 का ‘शब्द साधक आलोचना सम्मान’ युवा आलोचक पल्लव को दिया जायेगा। ये अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ ही बहुआयामी सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। इन्होंने नामवर सिंह, सुरेंद्र चौधरी, विश्वनाथ त्रिपाठी व विजय मोहन सिंह की आलोचना परम्परा को युगीन सन्दर्भ के साथ नये तेवर दिए हैं। वे सैद्धांतिकी और समाज वैज्ञानिक अध्ययनों के रूबाबों में आये बिना आत्मीयता तथा सहजता से कहानी का आलोचकीय पाठ प्रस्तुत करते हैं।
वर्ष 2018 का ‘शब्द साधक अनुवाद सम्मान’ संतोष अलेक्स को प्रदान किया जायेगा। इनकी हिन्दी में अनुवाद की 15 पुस्तकें हैं।लगभग 9 किताबें अन्य भारतीय भाषाओं को भी है।इन्होंने अंग्रेज़ी के अलावा तमिल, तेलुगू और मलयालम से भी हिन्दी में अनुवाद कार्य किया है।

वर्ष 2018 का ‘शब्द साधक कविता सम्मान’ ज्योति चावला को दिया जायेगा।ज्योति चावला की कविताएं अपने समय के स्त्री विमर्श की कविताओं से इस मायने में अलग हैं कि यहां स्त्रियों का अलग-अलग रूप है। यहां स्त्री मां है, बेटी है, दोस्त है और सभी अपनी-अपनी जगह पर अपने-अपने स्तर से स्त्री के जीवन में नया सौंदर्य रच रही हैं।
ज्योति चावला को यह सम्मान कविता की विधा में उनके अभी तक के समग्र योगदान के दृष्टि गत दिया जा रहा है।

इस वर्ष से साहित्य के लिए समर्पित जीवन जीने वाले विभूतियों को ‘शब्द साधक जीवन मानक’ (Life Time Achievement Award) की शुरुआत की जा रही है। वर्ष 2018 का ‘शब्द साधक जीवन मानक’ सम्मान हिन्दी साहित्य के लिये समर्पित जीवन जीने वाले भारत भारद्वाज को दिया जा रहा है।

सभी सम्मान दिनांक 14/11/2019 एवं 15/11/2019 को आयोजित ‘पाखी महोत्सव’ में दिए जाएंगे यह महोत्सव इंदिरा गांधी कला केंद्र, सेक्टर-6 नोएडा में आयोजित होने जा रहा है।

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