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Sunday, January 16th, 2022

वैक्सीन ही कोरोना से बचाव का मूलमंत्र

आई एन वी सी न्यूज़
जयपुर,
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग प्रदेश में 18 वर्ष एवं इससे अधिक आयु के शत-प्रतिशत लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस आयु वर्ग का कोई भी व्यक्ति वैक्सीनेशन से वंचित नहीं रहे। श्री गहलोत ने कहा कि वैक्सीन ही कोरोना से बचाव का मूलमंत्र है। ऎसे में, वैक्सीनेशन अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और लक्षित वर्ग के शत-प्रतिशत टीकाकरण के लिए जमीनी स्तर पर कार्ययोजना बनाकर काम किया जाए।

श्री गहलोत बुधवार शाम को मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कोविड-19 संक्रमण की स्थिति पर उच्च स्तरीय समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में टीकाकरण में तेजी लाने की आवश्यकता है, वहां जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा स्वयंसेवी संगठनों आदि के सहयोग से लोगों को वैक्सीन की डोज लगाने के लिए प्रेरित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि उनकी लापरवाही से दूसरों के लिए संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए जरूरी है कि जिन लोगों ने अब तक वैक्सीन की डोज नहीं लगवाई है, उन्हें यह डोज अनिवार्य रूप से लगाई जाए।

श्री गहलोत ने इस दौरान प्रदेश में कोविड वायरस के नए वेरिएंट ‘ओमिक्रॉन’ की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में यह वेरिएंट न फैले इसके लिए पूरी सतर्कता एवं चौकसी बरती जाए। एयरपोर्ट पर अन्य देशों से आने वाले यात्रियों का अधिक से अधिक आरटीपीसीआर टेस्ट किया जाए। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट पर रहते हुए आवश्यक तैयारियां रखे। उन्होंने कहा कि यद्यपि प्रदेश में इस वायरस से जो भी संक्रमित रोगी मिले हैं, उनमें गंभीर लक्षण नहीं है। उन्हें ऑक्सीजन, आईसीयू अथवा वेंटिलेटर की जरूरत अभी तक नहीं पड़ी है। इसके बावजूद हमें लगातार सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि टीकाकरण की गति बढ़ाने के लिए विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं। इसके साथ ही ओमिक्रॉन से संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज एवं जिला अस्पतालों में अलग से आईसोलेशन वार्ड स्थापित किए गए हैं। ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के सम्बन्ध में जिला स्तर तक चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री वैभव गालरिया ने बताया कि सभी पॉजिटिव रोगियों की जिनोम सिक्वेन्सिंग कराई जा रही है। टेस्टिंग की संख्या को भी बढ़ाकर अब 30 हजार प्रतिदिन किया गया है। जिन लोगों में संक्रमण मिला है, उनकी सघन कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वैक्सीन की अब तक 7 करोड़ 19 लाख डोज लगाई जा चुकी है। इनमें से 4 करोड़ 42 लाख पहली डोज तथा 2 करोड़ 77 लाख दूसरी डोज है।

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भण्डारी ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर विश्व के किसी भी देश में ओमिक्रॉन से संक्रमित रोगी की मृत्यु की कोई जानकारी फिलहाल देखने में नहीं आई है। इस वेरिएंट से संक्रमित रोगियों में बुखार, बदन दर्द, सिर दर्द, खांसी के सामान्य लक्षण देखे गए हैं। उन्होंने बताया कि ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के सम्बन्ध में चिकित्सकों, नर्सिंगकर्मियों के साथ ही निजी चिकित्सालयों एवं लैबोरेटरीज के कार्मिकों को भी पुनः प्रशिक्षण दिया गया है। अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी बैठक में अपने सुझाव दिए।

बैठक में मुख्य सचिव श्री निरंजन आर्य, पुलिस महानिदेशक श्री एमएल लाठर, प्रमुख शासन सचिव गृह श्री अभय कुमार, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्री अखिल अरोरा, स्वायत्त शासन विभाग के सचिव श्री भवानी सिंह देथा, सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशक श्री पुरूषोत्तम शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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