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Wednesday, December 2nd, 2020

विश्व पुसतक मेले से बॉलीवुड तक गूंजेगी हरियाणा की बहादुर शिक्षिका के लिए इंसाफ की आवाज

संदीप मलिक, शिक्षिका सुशील कुमारी,sushila ki bat ,सुशीला की बातसंदीप मलिक, आई एन वी सी, जींद, शिक्षिका सुशील कु मारी के जीवन पर िलखी गई पुसतक का िवमोचन िदलली मे शुर हो रहे िवश पुसतक मेले मे िकया जाएगा। ‘मेरे ददर को... इनाम िमला, इंसाफ नहीं’ हिरयाणा की एक िनडर िशिकका सुशील कु मारी के अपहरण और िनमरम हतया की सचची घटना पर आधािरत पुसतक है। इस पुसतक के लेखक युवा टीवी पतकार अनुराग ढांडा है। अनुराग ढांडा िफलहाल आजतक चैनल मे कायररत है। हिरयाणा की िशका और राजनीित के अपराधीकरण पर िलखी इस िकताब पर बॉलीवुड की भी नजर है। बॉलीवुड के एक बडे डायरेकटर इस पुसतक पर िफलम बनाने की योजना बना रहे है और लेखक से िवमशर के बाद िवश पुसतक मेले मे ही इसकी घोषणा की जा सकती है। इंटरनेट पर ये िकताब पहले ही लोगो की पसंद बन चुकी है। इस पुसतक का ऑनलाइन िवमोचन पोथी डॉट कॉम वेबसाइट पर िकया जा चुका है। हाल ही मे हिरयाणा सरकार ने िदवंगत िशिकका सुशील कु मारी के नाम पर सवरशेष अधयापन का पुरसकार घोिषत िकया है। लेिकन ये कहानी हिरयाणा की उसी बहादुर िशिकका सुशील कु मारी को दो दशको से नहीं िमले इंसाफ की मांग को लेकर है। करीब दो दशक पहले नकल रोकने की कोिशश मे िशिकका सुशील कु मारी ने अपनी जान गंवाई थी। उनके इसी बिलदान के िलए हिरयाणा सरकार ने साल 2011 मे सुशील कु मारी समृित पुरसकार की घोषणा की है लेिकन सुशील कु मारी का पिरवार अब भी उसके िलए इंसाफ हािसल करने की लडाई लड रहा है। सालो कोटर के चककर लगाने के बाद भी सुशील कु मारी की हतया के आरोिपयो को सजा नहीं िमलने से आहत पिरवार की आवाज को अनुराग ढांडा ने अपनी कलम के जिरए बुलंद िकया है। सता के नशे मे चूर कु छ लोगो ने महज इसिलए सुशील कु मारी का अपहरण कर हतया कर दी थी कयोिक उसने आरोिपयो के कहने पर एक छाता को नकल करवाने से इंकार कर िदया था। इस पुसतक मे ततकालीन सरकार मे बैठे नेताओं और सीबीआई जांच पर गंभीर सवाल खडे िकए गए है। बदलते समाज मे नारी पर हो रहे अतयाचार के िखलाफ आवाज उठ रही है। युवा सडको पर उतर कर मिहलाओं पर हो रही जयादती का िवरोध करने लगे है। भष िससटम और राजनीित व अपराध के िरशतो पर भी सवाल खडे िकए जा रहे है। लेिकन कया वाकई समाज मे मिहलाओं के िखलाफ होने वाला अतयाचार एक नया िसलिसला है या िफर दशको पहले से मिहलाओं को एक कमजोर िशकार समझ कर उन पर हमला होता आ रहा है। कया समाज या कानून हर मिहला पर होने वाले अतयाचार को सबक िसखाता है या िफर हाल ही मे हुए िदलली गैगरेप जैसे कु छ पाचािरत मामलो पर ही लोगो की नजर जाती है। कु छ हाई पोफाइल मामलो मे ही कानून सही फै सले सुनाता है और पुिलस की जांच भी कु छ मामलो मे ही सही िदशा लेती है। बाकी उन मिहलाओं के ददर का कया, िजनकी कहानी अनसुनी रह गयी। जो कोटर मे महज एक फाइल बनकर रह गये। िजनको सरकारो ने इनाम तो िदए लेिकन कानून इंसाफ नहीं दे पाया। टीवी पतकािरता मे युवा पीढी के पतकार अनुराग ढांडा ने अपनी नयी पुसतक ‘मेरे ददर को इनाम िमला, इंसाफ नहीं’ मे इनहीं सुलगते सवालो के बीच बहस खडी करने का हौसला िदखाया है। करीब दो दशक पुरानी एक सचची घटना पर आधािरत इस पुसतक के जिरए अनुराग ढांडा की कोिशश राजनीित और कानून का वो िघनौना चेहरा िदखाने की है िजसकी वजह से कई लोग, कई पिरवार, इंसाफ पाने के िलए चककर काटते- काटते जीवन िबता देते है। पुसतक मे कु ल दस अधयाय है िजनमे कमवार अधयािपका सुशील कु मारी के अपहरण और हतया की पूरी घटना, पुिलस जांच, राजनीितक हसतकेप, सामािजक आंदोलन, मिहला दकता सिमित की जांच िरपोटर, सीबीआई जांच और कानूनी लडाई का वणरन िकया गया है। पहले अधयाय मे पुसतक की शुरआत वतरमान घटनाकम से की गई है िजसमे मुखयमंती भूपेनद हुडडा ने हाल ही मे िशिकका सुशील कु मारी के नाम पर एक पुरसकार की घोषणा की है। अपनी तािकर क कमता िदखाते हुए लेखक ने यहीं से सवाल खडे िकए है िक िजस अधयािपका के नाम पर राजय सरकार सवोचच पुरसकार की घोषणा कर रही है, समाज के पित सुशील कु मारी के कायर के िलए उसे मरणोपरानत इनाम दे रही है। उस अधयािपका को इंसाफ कब िमलेगा ? शी अनुराग ढांडा ने पुसतक मे घटना को लेकर ततकालीन जन आकोश और आंदोलन का भी वणरन िकया है। उन सभी संगठनो व लोगो के योगदान का भी वणरन है िजनहोने जन आकोश को जन आंदोलन बनाने का कायर िकया। इस वणरन के जिरए शायद लेखक ये बताने की कोिशश करता है िक कै से लोगो के गुससे से उभरे जन आंदोलन को राजनीितक रसूख के इसतेमाल से बेअसर कर पूरे के स को फाइलो मे बंद कर िदया गया। दो दशक पहले इस मामले को लेकर पूरे राजय मे लोगो का आकोश उबाल पर था। िशिकका सुशील कु मारी के अपहरण की घटना के िवरोध मे लाखो लोग सडको पर उतर आये थे। आज वो के स महज सुशील कु मारी के पिरवार की लडाई बनकर रह गयी है, एक ऐसी लडाई िजसमे राजनैितक चालबािजयो के आगे अब सुशील के बूढे िपता कमजोर पड रहे है।

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