आई एन वी सी न्यूज़
रायपुर,
शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा है कि प्रदेश में एक भी विद्यालय ऎसा नहीं होना चाहिए जहां पर आईसीटी लैब नहीं हो। उन्होंने विद्यालयों में ख्राब पड़े कम्प्यूटर त्वरित ठीक कराने, आईसीटी लैब से संबंधित अन्य समस्याओं के निराकरण और इन्टरनेट कनेक्टिविटी सभी विद्यालयों में आवश्यक रूप से हो जाए, इसे भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

श्री डोटासरा बुधवार को शिक्षा संकुल में समग्र शिक्षा अभियान के विडियो कॉन्फ्रेन्स कक्ष से प्रदेश के 33 जिलों के शिक्षा अधिकारियो ंसे एक-एक कर संवाद कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न जिलों के शिक्षा अधिकारियों से शैक्षिक विकास से संबंधित मुद्दों पर दो घंटे से अधिक समय तक खुलकर चर्चा की। उन्हेांने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बाल सभाएं बच्चों के विकास के लिए उपयोगी हों। वहां पर बच्चों के लिए 15 अगस्त तक आवश्यक रूप से भामाशाहों के सहयेाग से अंग्रेजी-हिन्दी शब्द कोश, ज्ञानवद्र्धन की किताबें आदि का वितरण भी किया जाए। उन्होंने बच्चों की सृजनात्मक क्षमता वद्धि वाली गतिविधियो को बाल सभाओं का नियमित अंग बनाए जाने के निर्देश भी दिए। प्रत्येक शनिवार को एक घंटे 20 मिनट की होने वाली बालसभाओं के बारे में जिले भर के अधिकारियों ने सकारात्मक पहल बताते हुए इनके अच्छे परिणाम आने की संभावना जताई।

शिक्षा मंत्री ने विडियो कान्फ्रेन्स में मॉडल विद्यालयेां के संचालन, विद्यालयों के नियमित निरीक्षण और शालादर्पण को अपडेट किए जाने के संबंध में भी अधिकारियों केा आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शालादर्पण पर जो सूचनाएं ऑनलाईन मांगी जाएं उन्हें ऑफलाईन नहीं लिया जाए। यह गलत परम्परा है। उन्होंने कस्तूरबा गॉंधी आवासीय विद्यालयों में गुणवत्ता का भोजन दिए जाने, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखे जाने के साथ ही विद्यालयों केा मिलने वाली ग्रांट का समुचित उपयोग किए जाने के भी निर्देश दिए।

श्री डोटासरा ने कहा कि हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि प्रदेश के सभी विद्यालय भौतिक सुविधाओं से संपन्न हों। इसके लिए स्थानीय भामाशाहों से भी सहयोग लिया जाए। उन्होंने आईसीटी लैब को और अघिक उपयोगी बनाए जानें, जहां पर यह काम नहीं कर रहीं वहां विशेष रूप से उन्हें सुचारू किए जाने और इनमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी और जनप्रतिनिधियों का जुड़ाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग पर उनसे ही विद्यालयों में नवीन कार्यों और प्रदत्त सुविधाओं का लोकार्पण करवाया जाएए ताकि विद्यालयों से उनका सीधे जुड़ाव हो सके।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की यह मंशा है कि शिक्षा विभाग में तमाम कार्य पूर्ण पारदर्शिता से संपन्न हों। इसके लिए निदेशालय से संबंधित सभी कार्य ऑनलाईन किए जाएं। शिक्षकों, कर्मचारियों की सेवा संबंधित समस्याओं, उनके द्वारा किए जाने वोल कार्यो को भी ऑनलाईन किया जाए ताकि सभी स्तरों पर पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने विद्यालयों की समस्याओं, आवश्यकताओं पर अधिकारियों द्वारा नियमित संवाद कर उनके निराकरण के प्रयास किए जाने पर भी जोर दिया। उन्हाेंने कहा कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी को मिले, इसकी नियमित मोनिटरिंग अधिकारी करे।

शिक्षा मंत्री ने विडियो कॉन्फ्रेन्स के दौरान शिक्षा विभाग के अंतर्गत जिलों की विभिन्न आधारों पर रहने वाली रैंकिग के बारे में भी विशेष रूप से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जो जिले रैंकिंग में पिछड़े हैं, वे अपना रवैया सुधार लें अन्यथा संबंधित अधिकारियेां के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नीचे के स्तर पर कार्य नहीं हो रहा, यह बहाना नहीं चलेगा। उन्होंनें शिक्षा में बेहतरीन रैंकिंग के लिए चूरू जिले के शिक्षा अधिकारियों की सराहना भी की।

शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री भास्कर ए. सांवत ने जिलों में पदस्थापित अधिकारियों से जिलावार संवाद करते हुए कहा कि विद्यालय निरीक्षण के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा जाए। उन्होने कहा कि विद्यालय अवलोकन के लिए उच्च स्तर से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी और नीचे के अधिकारी तक के नियम तय किये हुए हैं, इनकी पालना आवश्यक रूप से सुनिश्चित की जाए। स्कूल शिक्षा परिषद् के आयुक्त श्री प्रदीप कुमार बोरड़ ने शिक्षा अधिकारियों को विद्यालयों में रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करने के कार्यों को प्रभावी रूप में संपादित किए जाने पर जोर दिया। राज्य परियोजना निदेशक डॉ. एन.के गुप्ता ने कहा कि विद्यालयों की सतत मोनिटरिंग अधिकारी करे, इसी से अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

समग्र शिक्षा अभियान के पोर्टल का लोकार्पण – शि़क्षा मंत्री श्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने इससे पहले शिक्षा संकुल के सभागार में समग्र शिक्षा के समन्वित पोर्टल का लोकार्पण किया। उन्हेांने इस मौके पर कहा कि सर्व शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा अभियान के एक होने के बाद से ही विभिन्न स्तरों पर शिक्षकों और कर्मचारियों से संबंधित आंकड़ों के ऑनलाईन की एकरूपता में समस्या आ रही थी। इसीलिए समग्र शिक्षा के इन्टीग्रेटेड पोर्टल की शुरूआत की गयी है। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल पर शिक्षकों, कर्मचारियों के साथ ही विद्यार्थियों के बारे में तमाम सूचनाएं अपडेट रहेगी।

श्री डोटासरा ने कहा कि शिक्षा के अंतर्गत समग्र शब्द के साथ न्याय करने वाला यह पोर्टल विद्यालयों की मोनिटरिंग में भी विशेष रूप से फायदेमंद रहेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश भी दिए कि पोर्टल पर सभी प्रकार की सूचनाएं अद्यतन रखी जाए। उन्होंने पोर्टल पर शिक्षा सें संबंधित उपयोगी सूचनाओं का भी समावेश नियमित किए जाने पर जोर दिया।

शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री भास्कर ए. सावंत ने पोर्टल की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। समग्र शिक्षा आयुक्त श्री प्रदीप कुमार बोरड़ और राज्य परियोजना निदेशक डॉ. एन. के. गुप्ता ने समग्र शिक्षा इन्टीग्रेटेड पोर्टल को शिक्षा विभाग का एक ही स्थान पर तमाम जानकारियॉं का ऑनलाईन मंच बताया।



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