Saturday, December 7th, 2019

वायु प्रदूषण कर रहा शरीर के हर हिस्से को प्रभावित

आई एन वी सी न्यूज़  

नई  दिल्ली ,


वायु प्रदूषण से जन जीवन में स्वास्थ्य संकट पैदाहो गया है और इस विकट समस्या का निदान कैसे करें यह हमारे समाज के सामने सबसे बड़ीचुनौती है। हाल में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ने 400 का निशान पार करलिया है जो मान्य स्तरों से बहुत अधिक खतरनाक स्तर है।


 हवा में मौजूद बारीक कण (10 से कम पीएम के मैटर),ओजोन, सल्फर डायआॅक्साइड, नाइट्रिक डायआॅक्साइड, कार्बन मोनो और डायआक्साइडसभी सांस की नली में सूजन, एलर्जी और फेफड़ों को नुकसान पहंुचाते हैं। हवा कीगुणवत्ता में गिरावट प्रति वर्ष 30 लाख लोगों की असमय मृत्यु की वजह बनती है।


 ‘‘हमारे फेफड़ों पर वायु प्रदूषण का असर इस परनिर्भर करता है कि हवा में किस प्रकार के प्रदूषक हैं और उनका क्या मिश्रण है; प्रदूषककितना सघन हैं और आपके फेफड़ों में कितनी मात्रा में प्रदूषक पहंुच रहे हैं।विशेष कर इन दिनों भयानक स्माॅग और प्रदूषण की वजह से धूम्रपान नहीं करनेवालों को भी सीओपीडी और फेफड़ों की अन्य जानलेवा बीमारियों का बहुत खतरा है,’’ डॉ  राकेश चावला, सीनियर कंसलटेंट, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, सरोज सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली  ने बताया ।


  मानव शरीर के अधिकांश अंगों और कार्य तंत्रोंपर वायु प्रदूषण का बुरा असर होता है और यह सांस की कई बीमारियों जैसे क्राॅनिकआब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज़ (सीओपीडी), दमा, क्राॅनिक ब्रोंकाइटिस और यहां तक किफेफड़ों के कैंसर की भी बड़ी वजह है और इन समस्याओं को यदि पहले से होें बढ़ादेती है। फेफड़ों को नुकसान पहंुचाने के साथ-साथ प्रदूषण का मनुष्य केमस्तिष्क, नर्वस सिस्टम, पाचन तंत्र, किडनी और युरिनरी सिस्टम और दिल पर भी बहुत बुराअसर होता है।


‘‘आंखों में जलन, पानी आना और लाल होना, नाकबंद रहना, नाक बहना, बार-बार छींक, सिरदर्द, सांस फूलना, खांसी, छाती मेंभारीपन जैसे लक्षणों से आप समझ सकते हैं कि हवा की गुणवत्ता में गिरावट आईहै और इससे बचने की जरूरत है। ये लक्षण कितने गंभीर होंगे यह प्रदूषण के स्तर,एक्सपोजर (प्रत्यक्ष सामना) और निजी स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करेगा। परिवेश मेंप्रदूषण की अधिकता से दिल का दौरा, स्ट्रोक और सीओपीडी का खतरा भी बढ़ताहै,’’ डाॅ. चावला ने बताया।


 स्वास्थ्यके इन दुष्परिणामों से बचने का सबसे सही समाधान इन प्रदूषकों के प्रत्यक्ष प्रकोप सेबचना, अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाना (हवा शुद्ध करने का प्राकृतिक उपाय), दहन(जैसे पराली जलाना और वाहन प्रदूषण) रोकना है। नियमित व्यायाम, सांस के व्यायाम,स्वस्थ आहार जैसे सामान्य उपायों पर विशेष ध्यान देकर इनकी आदत डालनी होगी।ताजे फलों और सब्जियों से एंटी-आॅक्सीडेंट मिलते हैं जो फेफड़ों औरशरीर के अन्य अंगों को प्रदूषकों से बचाते हैं। भरपूर पानी पीने और जूस लेनेसे शरीर के अंदर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। आंखों और चेहरे कोबार-बार धोने, नाक और मुंह को मास्क से ढक कर रखने से प्रदूषण केदुष्परिणाम कुछ कम होते हैं।


पर्यावरणसंरक्षण के लिए फाॅसिल फ्यूल (जीवाष्म ईंधन), कोयले, गैसोलीन और लकड़ी के बदलेऊर्जा के गैर-पारंपरिक स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा/ पवन बिजली/हाइड्रो-पावरको अपनाना होगा। डीज़ल/ पेट्रोल वाहनांे के चलने पर धीरे-धीरे रोक लगानाऔर इनके बदले इलैक्ट्रिक वाहन अपनाना होगा। निजी वाहन का चलन कम करने के लिएसार्वजनिक परिवहन की बेहतर सुविधा देनी होगी। हवा की गुणवत्ता में गिरावट कोसंभालने की दिशा में ये कुछ महत्वपूर्ण कदम लेने होंगे।


पराली(अन्य कचरा) जलाने पर रोक, फसल अवशेष (पराली) के बेहतर रखरखाव के उपाय करनेहोंगे क्योंकि इस सीजन में हर साल एनसीआर में पराली जलाने से धुंध और स्माॅगकी भयानक समस्या होती है। बेहतर शहरीकरण के लिए उचित नगर नियोजन और पेड़काटने पर रोक लगाना होगा क्योंकि पेड़-पौधे हवा शुद्ध करने के कुदरती उपायहैं। घरेलू बागबानी के पौधे भी वायु प्रदूषण कम करने में सहायक होते हैं।


सांस कीइन समस्याओं का खतरा विशेष कर बच्चों, बुजुर्गों और क्राॅनिक बीमारी से ग्रस्तलोगों को अधिक होता है। स्वस्थ व्यक्ति जो खुली जगह पर काम या व्यायाम करते हैंउन्हें भी ये लक्षण महसूस होते हैं।


‘‘प्रदूषणजिन दिनों अधिक हो आपके लिए सबसे सही उपाय प्रदूषित हवा से खुद को बचाना है।इसलिए मुख्य सड़कों और भीड़ भरी गलियों में जाने से बचने की हर संभव कोशिककरें। चेहरे का मास्क (एन 95 या समतुल्य) पहनना लाभदायक है। प्रदूषण से बचने के लिएव्यक्तिगत प्रयास में आप चेहरे का मास्क लगा सकते हैं और घर से बाहर जाने से परहेजकर सकते हैं। बाजार में कई प्रकार के मास्क उपलब्ध हैं जैसे एन 95, कैम्ब्रिज मास्क,वाॅग मास्क, रेस्प्रो मास्क आदि। इनके फिल्टर और इनसे मिलने वाले सुरक्षा के स्तरअलग-अलग हैं,’’ उन्होंने बताया।

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