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Saturday, September 19th, 2020

वायरस से ठीक हुए मरीज फिर सेहॉस्पिटल में भर्ती हुए - ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया

डॉक्टर हेमंत देशमुख का कहना है कि ये सारे मरीज कोरोना का इलाज कराते वक्त करीब एक महीने तक हॉस्पिटल में एडमिट रहे थे
राज्य में पिछले 24 घंटों के दौरान 10,483 नए पॉजिटिव केस सामने आए हैं और एक दिन में 300 लोगों की मौत हो गई है

कोरोनावायरस को लेकर हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। कुछ लोगों में यह वायरस अपने आप ठीक हो जा रहा है, तो कुछ ठीक हुए लोगों में यह फिर से एक्टिव हो जा रहा है। ऐसा ही एक मामला मुंबई के किंग एडवर्ड हॉस्पिटल (केईएम) का है। यहां कोरोना से ठीक होने के एक महीने बाद 22 मरीज फिर से हॉस्पिटल में भर्ती हुए हैं। इन सबने फेफड़ों में हो रही दिक्कतों की शिकायत की है।

ज्यादातर मरीजों में सांस लेने में परेशानी

केईएम हॉस्पिटल के डीन डॉ हेमंत देशमुख ने बताया कि कोरोना मुख्य रूप से फेफड़े की बीमारी है। हॉस्पिटल आने वाले सभी लोगों को सांस लेने में तकलीफ थी। उन्होंने बताया कि कोरोना से रिकवरी के बाद 'पल्मोनरी फाइब्रोसिस' होने की उम्मीद रहती है। ज्यादातर मरीजों में यही समस्या मिली है। उन्होंने बताया कि हॉस्पिटल मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था कर हैं। सारे मरीजों को पल्मोनरी फाइब्रोसिस की दवाई दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उम्र से फर्क नहीं पड़ता है। डॉक्टर देशमुख ने बताया कि 'पल्मोनरी फाइब्रोसिस' का असर लंबे वक्त रहता है। इसको कम करने के लिए मरीज को दवाई दी जा रही है।

सभी मरीज तकरीबन एक महीने तक हॉस्पिटल में भर्ती थे

हॉस्पिटल के डॉक्टर भी मरीजों में डेवलप हुए इस नए सिमटम को लेकर हैरान हैं। हॉस्पिटल के चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर अमिता अठावले का कहना है कि फिलहाल ऐसे मरीजों के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। डॉक्टर हेमंत देशमुख का कहना है कि ये सारे मरीज कोरोना का इलाज कराते वक्त करीब एक महीने तक हॉस्पिटल में एडमिट रहे थे। इस सारे लोगों को कोरोना की नई दवाइयां जैसे कि रेमडेसिवीर और टॉक्लीजुमैब दी गई थी। सभी को कोरोना जांच में नेगेटिव होने के बाद हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया है।

ब्रेन, किडनी और हार्ट पर भी कर रहा हमला

इससे पहले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान यानी एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा था कि ये वायरस किसी मरीज के सिर्फ फेफड़ों पर ही अटैक नहीं करता, बल्कि ये ब्रेन, किडनी और हार्ट को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा था कि ये अब 'सिस्टमेटिक डिजीज' बन गया है। मेडिकल साइंस की भाषा उस बीमारी को सिस्टेमेटिक डिजीज कहा जाता है, जो एक साथ शरीर के कई अंगों पर हमला करता हो। कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई मरीजों को फेफड़ों में काफी दिक्कतें आती है। हालत ये है कि कई महीनों के बाद भी ऐसे मरीजों को घर पर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है।

5 लाख के करीब पहुंचा संक्रमितों का आंकड़ा

महाराष्ट्र में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। राज्य में पिछले 24 घंटों के दौरान 10,483 नए पॉजिटिव केस सामने आए हैं। वहीं कोरोना महामारी से राज्य में एक दिन में 300 लोगों की मौत हो गई। शुक्रवार को आए संक्रमण के मामलों के बाद राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर अब 4,90,262 हो गई है। इसमें 1,45,582 एक्टिव केस हैं, जबकि 3,27,281 मरीज ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। PLC.

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