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Thursday, April 22nd, 2021

वह क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता ?

 -तनवीर जाफरी - 


                             कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले दिनों तिरुअनंतपुरम में एक सभा में यह कह दिया कि - 'पहले के 15 साल मैं उत्तर भारत से सांसद था। मुझे वहां दूसरे तरह की राजनीति का सामना करना पड़ता था। केरल आना मेरे लिए ताज़गी भरा रहा, क्योंकि यहां के लोग मुद्दों की राजनीति करते हैं और सिर्फ़ सतही नहीं, बल्कि मुद्दों की तह तक जाते हैं।' इस वाक्य में केवल एक तुलनात्मक नज़रिया पेश किया गया है जो किसी भी तरह से उत्तर भारतीयों का अपमान नहीं नज़र आता। बल्कि सही मायने में राहुल की यह टिप्पणी केरल में 6 अप्रैल को विधानसभा की 140 सीटें  पर होने जा रहे आम चुनावों के मद्देनज़र राज्य के लोगों को ख़ुश करने की मंशा के तहत की गयी थी न कि उत्तर भारतीयों का अपमान करने के नज़रिये से। परन्तु किसान आंदोलन,भीषण मंहगाई,तेल-गैस व ट्रेन भाड़े के मूल्यों में हो रही ज़बरदस्त बढ़ोत्तरी व बेरोज़गारी के विरुद्ध उठती युवाओं की प्रबल आवाज़ से देश के लोगों का ध्यान भटकाने के लिए सत्ता व मीडिया की जुगलबंदी ने राहुल गांधी के इस बयान को उत्तर भारतीयों के अपमान के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया। विदेश मंत्री जय शंकर सहित अनेक केंद्रीय मंत्री राहुल गाँधी पर उत्तर दक्षिण के लोगों को बांटने  व उत्तर भारतीय मतदाताओं को अपमानित करने का आरोप लगा रहे हैं तो कुछ नेता राहुल को एहसान फ़रामोश तक कह रहे हैं। ग़ौर तलब है कि जिस केरल के लोगों की उन्होंने तारीफ़ की यह देश का वही इकलौता राज्य है जिसे शत प्रतिशत साक्षर होने का प्रमाण पत्र दशकों से केंद्र सरकार ही जारी करती रही है। क्या केरल को ऐसा प्रमाण पत्र देना अन्य राज्यों को अशिक्षित बताने जैसा है ?आंकड़े बताते हैं कि यू पी एस सी की परीक्षाओं में बिहार व उत्तर प्रदेश के लोग सबसे अधिक चुने जाते हैं। यदि इस सच्चाई को बयान किया जाता है तो क्या यह अन्य राज्यों के लोगों का अपमान है ? परन्तु सम्मान,अपमान और एहसान फ़रामोश और एहसानमंदी की इस बहस में यह सवाल तो ज़रूर उठता है कि आख़िर देश की जनता व मतदाताओं का अपमान कहते किसे हैं और वक़्त वक़्त पर यह 'कारगुज़ारी ' आख़िर कौन लोग अंजाम देते हैं ?
                                            क्या जब देश के लोगों से चुनाव पूर्व कहा जाता है कि 'बहुत हुई मंहगाई की मार', और मंहगाई कम करने के नाम पर जनता से वोट ठग लिए जाते हैं।और चुनवोपरांत मंहगाई कम होने के बजाए आसमान छूने लगे, क्या यह जनता का अपमान नहीं ? देश के बेरोज़गारों को दो करोड़ नौकरी देने के नाम पर वोट लिया जाए और बाद में दस करोड़ से अधिक लोगों को बेरोज़गारी के मुंह में धकेल दिया जाए यह सत्ता पर विश्वास करने वाले बेरोज़गार युवाओं के साथ विश्वासघात है या नहीं ? देश के जिन मतदाताओं ने अपने भविष्य के सुनहरे सपने संजोते हुए सत्ता सुख भोगने का अवसर दिया, उनके सपनों को चकनाचूर करना भारतीय मतदाताओं के साथ एहसान फ़रामोशी करना नहीं तो और क्या है ? जब देश का अन्नदाता अपनी ज़मीन व अपने अस्तित्व को बचाने के लिए आंदोलनरत हो और सत्ताधीश उन पर देश विरोधी,ख़ालिस्तानी जैसे न जाने कितने आक्षेप मढ़ने लगें वह देश के लोगों का अपमान है या नहीं ? जब सैकड़ों किसान इसी आंदोलन के दौरान दम तोड़ने लगें और कई किसान निराश होकर आत्म हत्या तक करने पर उतारी हो जाएं दूसरी तरफ़ सत्ता के पास उनके परिजनों लिए शोक व संवेदना के दो शब्द कहने और उनको श्रद्धांजलि देने तक की फ़ुरसत न हो यह पूरे देश के किसानों के अपमान की श्रेणी में आता है या नहीं ? मंहगाई कम होने की आस में बैठी आम, मध्यम व ग़रीब वर्ग की देश की जनता को इधर उधर लाने ले जाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पैसेंजर ट्रेन्स के किरायों में दो और तीन गुना वृद्धि कर दी जाए, यह क्या उत्तर तो क्या दक्षिण बल्कि पूरे देश लोगों के साथ धोखा व उनकी उम्मीदों का अपमान नहीं तो और क्या ? परन्तु राहुल गांधी का कथन शायद इन्हें उपरोक्त अपमानजनक परिस्थितियों से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण नज़र आता है।
                                         पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ ने बजट सत्र के दौरान सदन में दिये गए अपने भाषण में टोपियां पहन कर आने वाले विधायकों पर बड़ा आपत्तिजनक कटाक्ष करते हुए कहा -' कि ढाई साल का बच्चा टोपी पहने व्यक्ति को गुंडा समझता है'। सर पर टोपी धारण करने वालों का यह अपमान है या नहीं ? हमारे देश में टोपी धारण करने की कितनी पुरानी परंपरा है। हिमाचल प्रदेश की रंग बिरंगी टोपियां कितनी लोकप्रिय हैं। मुरली मनोहर जोशी जैसे भाजपा के मार्ग दर्शक प्रायः यही टोपियां पहनते हैं। सबसे अधिक व सबसे भिन्न भिन्न प्रकार की रंग बिरंगी टोपियां व हैट आदि तो स्वयं नरेंद्र मोदी जी ही धारण करते रहे हैं। नेहरू टोपी,गांधी टोपी,कश्मीरी टोपी आदि टोपियों तो अपने आप में ब्रांड बन चुकी हैं। मोरारजी देसाई,चौधरी चरण सिंह,गोविन्द बल्लभ पंत,जैसे सैकड़ों सम्मानित लोग व स्वतंत्रता सेनानी टोपियां धारण किया करते थे। महाराष्ट्र में भी टोपियां धारण करने का पुराना चलन है। अन्ना हज़ारे जिनकी टोपी 'मैं अन्ना हूँ ' ने देश में वह क्रांति पैदा की जिसपर सवार होकर आज सत्ताधारियों को इस तरह की अनाप शनाप बातें कहने का मौक़ा मिल रहा है। क्या यह सब बातें सर पर टोपी रखने वाले भारतीयों के अपमान की श्रेणी में नहीं आतीं ? योगी ने यह भी कहा कि हमारी इस विधायिका को लोग यह न मान लें कि यह ड्रामा कंपनी है। कोई लाल टोपी, कोई नीली टोपी, कोई पीली टोपी और कोई हरी टोपी पहन कर आ गया है। ड्रामा पार्टी में ही हम लोग यह सब देखते थे।' निर्वाचित सदस्यों,जन प्रतिनिधियों को ड्रामा कंपनी का सदस्य बताना मतदाताओं का अपमान नहीं परन्तु यदि राहुल गाँधी का किसी धर्म स्थान में बैठने का तरीक़ा भिन्न हो तो उन्हें बैठने का तरीक़ा बताया जाने लगता है।
                    हद तो यह कि भाजपा अध्‍यक्ष जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के इस बयान को 'बांटो और राज करो ' की राजनीति का हिस्सा बता दिया। जबकि पूरा देश देख रहा है कि समग्र भारतीय समाज से लेकर ताज़ा तरीन किसान आंदोलन तक को बांटने और ख़ुद राज करने जैसे षड़यंत्र कौन रचता आ रहा है। हैरत की बात यह है कि आज जिस गोदी मीडिया को किसान आंदोलन,बेरोज़गारी,मंहगाई,तेल व ट्रेन भाड़े की बढ़ती क़ीमतों पर बहस करनी चाहिये वह राहुल गाँधी के उत्तर दक्षिण जैसे अगंभीर विषय पर डिबेट कराने में लग गया। बेशक,देश की जनता स्वयं देख व समझ रही है कि वास्तव में देश की जनता का अपमान कब होता है और कौन कर रहा है।  बक़ौल अकबर इलाहाबादी -'हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम- वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता?

 

About the Author
Tanveer Jafri
Columnist and Author

Tanveer Jafri, Former Member of Haryana Sahitya Academy (Shasi Parishad),is a writer & columnist based in Haryana, India.He is related with hundreds of most popular daily news papers, magazines & portals in India and abroad. Jafri, Almost writes in the field of communal harmony, world peace, anti communalism, anti terrorism, national integration, national & international politics etc.

He is a devoted social  activist for world peace, unity, integrity & global brotherhood. Thousands articles of the author have been published in different newspapers, websites & news-portals throughout the world. He is also recipient of so many awards in the field of Communal Harmony & other social activities.
Contact – : Email – tjafri1@gmail.com –
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