राजेंद्र उपाध्याय   

नई दिल्ली.  केंद्रीय कपड़ा मंत्री थिरु दयानिधि मारन ने उद्योग को आश्वस्त किया है कि कपड़ा उद्योग को राहत प्रदान करने के लिए सरकार लघु, मध्यम और लम्बे समय के लिए उचित कदम उठाएगी। वे कल यहां भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (सीआईटीआई), सूती वस्त्र निर्यात संवर्धन परिषद (टीईएक्सपीआरओसीआईएल), परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) और सिंथेटिक तथा रेयॉन वस्त्र निर्यात संवर्धन परिषद (एसआरटीईपीसी) की ओर से इकरा प्रबंधन परामर्शदात्री सेवा लि. (आईएमएसीएस) द्वारा कराए गए धीमी अर्थव्यवस्था का वस्त्र एवं परिधान उद्योग पर प्रभाव शीर्षक से अध्ययन रिपोर्ट जारी कर रहे थे।
 
 थिरु मारन ने कहा कि अल्पावधि की रणनीति के एक भाग के रूप में सरकार वित्तीय बनावट का पुनर्गठन, सेवाकर से छूट, लदान से पूर्व और पश्चात के ऋणों की ब्याज दरों में कमी और टर्मिनल उत्पाद शुल्क और केन्द्रीय बिक्री कर के बकाया की तीव्र निकासी को सुविधाजनक बनाने का प्रयास करेगी। मध्यावधि की रणनीति के भाग के रूप में सरकार 11वीं पंचवर्षीय योजनावधि में प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (टीयूएफएस), एकीकृत कपड़ा पार्क के लिए योजना (एसआईटीपी) और सूती उद्योग संबंधी प्रौद्योगिकी अभियान के कार्यान्वयन पर विशेष जोर देगी। दीर्घावधि की रणनीति के रूप में अवसंरचना में सुधार, श्रम कानून में सुधार और वैश्विक चलन के अनुसार उद्योग द्वारा नए व्यवसायोन्मुख सृजन की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय जल्दी ही राष्ट्रीय फाइबर नीति बनाने के लिए परामर्शदात्री प्रक्रिया प्रारंभ करेगा। उन्होंने सभी पणधारकों और वस्त्र उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले एकल मंच के सृजन करने के लिए अपना समर्थन देने हेतु आगे आने के लिए उद्योग का आह्वान किया।
 
 थिरु मारन ने कहा कि भारतीय वस्त्रों और परिधानों के निर्यात के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ प्रमुख बाजार हैं और वे अपनी वापसी दर्शा रहे हैं। तथापि, वस्त्र और परिधान निर्यात के लिए नये बाजारों जैसे खाड़ी के सहयोगी देशों (जीसीसी) नामत: बहरीन, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, रूस और ओसेनिया को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार नये बाजारों में सुअवसर प्राप्त करने, पड़ोसी देशों से प्रतिस्पर्धा करने और विकसित देशों द्वारा अपनाए जा रहे सुरक्षात्मक उपायों से पार पाने में मदद करेगी।
 
 उन्होंने दोहराया कि सरकार आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में एक करोड़ रोजगार अवसरों का सृजन करने, विश्व स्तर की विनिर्माणकर्ता क्षमताओं की कला का उत्थान, विनिर्माण में प्रभुत्वपूर्ण वैश्विक स्थान प्राप्त करने तथा वस्त्र और परिधान के निर्यात बढ़ाने और आयात के दबाव को कम करने, वस्त्र उद्योग को उपकरणयुक्त बनाने और विकसित हो रहे घरेलू बाजार में अपना प्रभुत्व बनाए रखने का प्रयास करेगी।
 
 इस अवसर पर रीता मेनन, सचिव वस्त्र ने भी संबोधित किया और सीआईटीआई डायरेक्ट्री 2009 को जारी किया। इसके अलावा वस्त्र और परिधान उद्योग पर धीमी अर्थव्यवस्था का प्रभाव अध्ययन रिपोर्ट का सारांश पेश करते हुए वस्त्र और परिधान उद्योग के विकास पर प्रभाव डालने वाली मुख्य नीति के विशेष पहलुओं पर अध्ययन में प्रकाश डाला गया है, जिनमें सूती धागा और मानवनिर्मित धागे से संबंधित नीति, कड़े श्रम कानून, टीयूएफएस निधि के वितरण मे विलम्ब आदि शामिल हैं. 

 उच्च वृध्दि दर प्राप्त करने के लिए अवसंरचना अवरोधों को दूर कर प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना, करों का यौक्तिकीकरण और श्रम कानूनों में लचीलापन लाने आदि की सिफारिश की गई.

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