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Saturday, December 4th, 2021

वर्तमान की तरह राज्य का अतीत भी गौरवशाली : डॉ. रमन सिंह

invc newsआई एन वी सी न्यूज़ रायपुर, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां अपने निवास पर ‘छत्तीसगढ़ राजधानी से राजधानी’ शीर्षक पुस्तक का विमोचन किया। विषय विशेषज्ञों के आलेखों के इस महत्वपूर्ण संकलन का सम्पादन श्री आशीष सिंह ठाकुर ने किया है। विमोचन समारोह का आयोजन हरि ठाकुर स्मारक संस्थान द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित रविशंकर शुक्ल विश्व विद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एस.के. पाण्डेय ने की। पुस्तक में प्राचीन छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानियों के इतिहास से लेकर वर्तमान छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और नयी राजधानी के रूप में विकसित हो रहे नये रायपुर पर भी प्रकाश डाला गया है। मुख्यमंत्री ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान की तरह छत्तीसगढ़ का अतीत भी गौरवशाली रहा है। इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वालों और नयी पीढ़ी के लिए यह एक उपयोगी और ज्ञानवर्धक पुस्तक है। इस प्रकार की पुस्तक की जरूरत महसूस की जा रही थी। संदर्भों के हिसाब से छत्तीसगढ़ की राजधानी सिरपुर और रतनपुर भी रही। बस्तर से सरगुजा तक विभिन्न राजवाड़ों ने अपने-अपने हिसाब से राजधानी का चयन किया। आधुनिक युग में पहले सीपी एण्ड बरार, फिर मध्यप्रदेश और अब छत्तीसगढ़, याने लगभग हर 50 वर्ष में छत्तीसगढ़ का स्वरूप भी बदलता रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय में सिरपुर छत्तीसगढ़ की सभ्यता और संस्कृति का समृद्ध केन्द्र रहा। कबीरधाम (कवर्धा) जिले में सिली पचराही में हुए उत्खनन का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिली पचराही में लगभग डेढ़ हजार साल पहले पांच सांस्कृतिक धाराओं के होने के प्रमाण मिलते हैं, जिनमें जैन, बौद्ध आदि मतों के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। उन्होंने पुस्तक के सम्पादक श्री आशीष सिंह की सराहना करते हुए कहा कि यह खुशी की बात है कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास के बारे में रूचि और ललक के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारी का भी अहसास है। उन्होंने पुस्तक के संकलनकर्ता को अपने लिखने के क्रम को जारी रखने की सलाह देते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रविशंकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एस.के. पाण्डेय ने पुस्तक की विषयवस्तु की प्रशंसा करते हुए कहा कि पौराणिक काल से अब तक छत्तीसगढ़ की अलग-अलग राजधानियां रही हैं। जिनके बारे में इस पुस्तक में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने राज्य, अपने गांव और अपने इतिहास की भी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने एक अभिलेखागार की स्थापना की आवश्यकता बतायी। उन्होंने कहा कि अभिलेखागार के माध्यम से इतिहास में रूचि रखने वालों को छत्तीसगढ़ के गौरव और सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जानकारियां उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की नई राजधानी के रूप में विकसित हो रहे नया रायपुर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस सुव्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त राजधानी के रूप में नया रायपुर का विकास हो रहा है। उसकी प्रशंसा देश भर में हो रही है। आज का वर्तमान कल का इतिहास बनेगा। पुरातत्व वेत्ता श्री राहुल सिंह ने पुस्तक की विषयवस्तु पर प्रकाश डाला। विमोचन समारोह में खल्लारी के विधायक श्री चुन्नी लाल साहू, हरि ठाकुर स्मारक संस्थान के अध्यक्ष, पद्मश्री सम्मानित डॉ. महादेव प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक श्री रमेश नैयर, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. मानसिंह परमार, इतिहासकार आचार्य डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र और जनसम्पर्क विभाग के सचिव श्री जी.एस. मिश्रा सहित सर्वश्री मनीष शर्मा, प्रोफेसर घनाराम साहू और अन्य अनेक स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक और साहित्यकार उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन पुस्तक के संकलनकर्ता श्री आशीष सिंह ठाकुर ने किया। मंच संचालन श्री प्रभात मिश्र ने किया। उल्लेखनीय है कि ‘छत्तीसगढ़: राजधानी से राजधानी’ शीर्षक से प्रकाशित इस पुस्तक में राज्य के सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद स्वर्गीय पंडित लोचन प्रसाद पाण्डेय सहित सर्वश्री डॉ. लक्ष्मी शंकर निगम, सनत चतुर्वेदी, राहुल सिंह, डॉ. शिवाकांत वाजपेयी, आशीष सिंह, आचार्य रमेन्द्रनाथ मिश्र, डॉ. सुशील त्रिवेदी और डॉ. रश्मि चौबे के आलेख शामिल हैं। पुस्तक में प्राचीन छत्तीसगढ़ के इतिहास के साथ-साथ वर्तमान रायपुर शहर के इतिहास को भी रेखांकित किया गया है।

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