Thursday, February 27th, 2020

वंसुधरा हत्याकांड - राजा भैया को उम्र कैद की सजा

invcहेमंत पटेल ,
आई एन वी सी ,
भोपाल,
 राजधानी भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र के बहुचर्चित फेशन डिजाइनर छात्रा वंसुधरा बुंदेला हत्याकांड के मामले मंे आज अदालत ने मुख्य आरोपी राजा भैया उर्फ अशोक वीर विक्रम सिंह सहित पांच आरोपियो को उम्र की कैद की सजा सुनाई। अपर सत्र न्यायाधीश संजीव कालगांवकर ने वंसुधरा हत्याक ांड मंे सुनाए 124 पृष्ठों के फैसले में मुख्य आरोपी राजा भैया को वंसुधरा की हत्या करने और षडय़ंत्र करने पर उम्र कैद एवं 500 रूपये तथा अवैध हथियार के मामले में तीन वर्ष के कारावास एवं 500 रूपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
्रन्यायालय ने इस मामले के अन्य आरोपी भूपेन्द्र सिंह उर्फ हल्के सिंह को उम्र कैद षडयंत्र करने पर 14 वर्ष और साक्ष्य छुपाने पर तीन वर्ष के कारावास तथा 500 रूपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपी पकंज शुक्ला और अभिमन्यु सिंह को उम्र कैद और 500 रूपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। इसी प्रकार आरोपी रामकिशन उर्फ छोटू को उम्र कैद और साक्ष्य छुपाने पर तीन वर्ष एवं 500 रूपये के अर्थदंड की सुनाई।
यायालय ने एक महिला आरोपी रोहिणी शुक्ला उर्फ रिम्पी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है तथा एक नाबालिक आरोपी का मामला बाल न्यायालय को भेज दिया। अभियोजन के अनुसार 11 दिसंबर 2009 को तड़के भोपाल जिले के मिसरोद थाना क्षेत्र में आरोपी राजा भैया और उनके साथियों ने आईपीएस स्कूल के पीछे रतनपुर के मुरारी घाट पर फैशन डिजाइनर छात्रा वसुुंधरा के सिर के पीछे गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी। वसुंधरा की हत्या करने के बाद उसके शव को पास के खेत में फेंक दिया गया था।
        पुलिस ने घटना की सूचना पर वसुंधरा का शव बरामद कर प्रकरण दर्ज कर लिया था। जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी राजा भैया सहित अन्य आरोपियो को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इस
मामले में 17 मार्च 2010 को न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। पुलिस द्वारा प्रस्तुत की गई 63 गवाहों में से 35 गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज हुए। इस मामले की लंबी सुनवाई के बाद न्यायालय ने फै सला
सुनाया।
-फांसी होती तो ज्यादा संतुष्टि मिलती हमें
वसुंधरा के माता-पिता का दिल का दर्द जुबां से छलका
-पुलिस के कड़े पहरे में कोर्ट पहुंचा भैया राजा
भोपाल। अपनी बेटी के हत्यारे भैया राजा को सजा दिलाना मेरे लिए आसान बात नहीं थी, वसुंधरा की हत्या के बाद जहां मैं अंदरूनी तौर पर टूट चुका था। बेटी को न्याय दिलाने के दौरान कई मुसीबतों का भी सामना करना पड़ा। कोर्ट में पिछले साढ़े तीन सालों से चली रही सुनवाई के दौरान मुझे व मेरे परिवार को भी जान का खतरा रहा। मैं आर्थिक तौर पर भी कमजोर हो चुका हूं। पर मेरी बेटी के हत्यारों को न्यायालय ने जो सजा दी है, मैं उसका स्वागत करता हूं। पर अगर उसे फांसी होती तो मुझे ज्यादा संतुष्टि मिलती। यह बात वसुंधरा के पिता एडवोकेट मृगेन्द्र सिंह कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद कही।
ऐसे इंसान को सजा दिलाना......
मृगेन्द्र सिंह बुंदेला खुद छतरपुर जिला न्यायालय में एडवोकेट हैं। उन्होंने बताया कि वे शुरू से ही अपनी बेटी वसुंधरा के हत्यारों को सजा दिलाने के हर संभव प्रयास करते रहे। क्योंकि भाजपा के पूर्व विधायक और बाहुबली नेता भैयाराजा जैसे इंसान को सजा दिलाना मेरे लिए इतना आसान नहीं था। आज न्यायालय में सभी पांच आरोपियों को जो सजा सुनाई है, मैं उसका स्वागत करता हूं।
आर्थिक तौर पर कमजोर हो चुका हंू-
साढ़े तीन सालों तक भोपाल में चली सुनवाई के दौरान महिने ने एक से ज्यादा बार केस के सिलसिले में न्यायालय आना-जाना पड़ता था। इस बीच मैं आर्थिक तौर और शारीरिक तौर से कमजोर हो चुका हूं। इसी बीच मेरी बायपास सर्जरी भी हो चुकी है।
होई कोर्ट में करेंगे अपील-
मृगेन्द्र सिंह ने बताया कि भैयाराजा समेत पांचों आरोपियों को तो सजा सुनाई हो चुकी है। पर अब उनका अगला कदम भोपाल जिला न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आभाव में बरी की गई रिम्पी को सजा दिलाना है। वह उसको सजा दिलाने के लिए हाई कोर्ट में भी अपील करेंगे।
रिम्पी का बरी होना हमारे लिए दुखद-
इस मौके पर वशुंधरा की मॉ भारती सिंह ने बताया कि मेरी बेटी की हत्या में रिम्पी भी बराबर की भागीदार है। कोर्ट ने उसे बरी कर दिया, यह हमारे लिए दुखद है। हमने तो न्यायालय में आरोपियों को फांसी की सजा दिलाने के लिए अपील की थी। अब मेरी बेटी के हत्या में भागीदारी करने वाले रिम्पी को सजा दिलाना बाकी है।
घटिया इंसान है वह
मृगेंद्र सिंह का कहना था कि भैया राजा घटिया और निकृष्ट इंसान है। पहले मेरे पिता फिर मैंने उसके लिए कई केस लड़े। वह मेरे मामा हैं, लेकिन मेरी बेटी जो उनकी नातिन थी, उसके साथ ऐसा काम किया। वारदात के बाद हमें बरगलाने का काम किया। बोले, तुम्हें छतरपुर सांसद बहला रहे हैं, उनके चक्कर में मत आना, मैंने कह दिया था, मैं वकील हूं कोई लालीपाप नहीं खाता हूं।
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कार्ट की कार्रवाई पर एक नजर-
जिला न्यायालय में नवम अपन जिला एंव सत्र न्यायाधीश संजीव कालगांवकर की अदालत में गुरूवार को वसुंधरा बुंदेला हत्याकांड में अंतिम फैसला सुनाया जाना था।  इसके लिए उपसंचालक अभियोजन राजेश रायकवार ने बुधवार को भी शहर के आला पुलिस अफसरों से सुनवाई के दौरान कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में चर्चा कर ली थी।
-गुरूवार सुबह करीब 10.20 पर सीएसपी सलीम खान के नेतृत्व में एक पुलिस टीम इस हत्याकांड के आरोपी भैयाराजा और अन्य आरोपियों को सेंट्रल जेल से कोर्ट लेकर पहुंचे।
-सुबह 10.20 बजे ही मजिस्ट्रेड संजीव कालगांवकर अपने आफिस पहुंच गए। दस मिनट बाद भैयाराजा को पुलिस के पहरे में कोर्ट में पेश किया गया।
-इस दौरान भैयाराजा को कटघरे में खड़ा किया गया, जबकि भूपेन्द, पंकज को कटघरे के पास खड़ा किया गया। जहां पर भैयाराजा की पत्नी आशा रानी उनके पास खड़ी हुई। वहीं वशुंधरा के पिता मृगेन्द्र सिहं व मॉ भारती सिंह कोर्ट में मौजूद थी। इस प्रकरण के सभी शेष आरोपियों को सुनवाई कक्ष के बहार रखा गया।
-सुनवाई के दौरान अभियोजन ने आरोपियों को फांसी की सजा की मांग की।
-मजिस्ट्रेड ने करीब 11 बजे भैयाराजा समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया।
-इस बहुचर्चित हत्याकांड में करीब 124 पन्नों का आदेश निकाला गया।
भारी पुलिस बल तैनात-
वसुंधरा हत्याकांड में अंतिम फैसला सुनाए जाने के मद्देनजर कोर्ट में तीन सीएसपी, चार थाना प्रभारियों के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया गया। जिसमें महिला सबइंस्पेक्टर, समेत कई महिला पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए थे।
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सजा सुनते ही रोने लगी आशारानी और बेटियां
करीब 11.30 बजे मजिस्ट्रेट ने भैयाराज समेत पांच आरोपियों को अजीवन कारावास की सजा सुनाई तो वहां पर मौजूद भैयाराजा की पत्नी आशारानी और दो बेटियों की आंखों से आंसू छलकने लगे। दोनों बेटियां अपने पिता के गले लगकर रोने लगी। जिन्हें देखकर भैयाराजा भी रोने लगे थे। कोर्ट के अंतिम फैसले के समय कोर्ट परिसर में भैयाराजा के करीब 50 रिश्तेदार व करीबी मौजूद थे। जो भैयाराजा को लॉकअप में ले जाने के तुरंत बाद कोर्ट से बाहर निकल गए। जबकि पुलिस ने भैयाराजा और अन्य आरोपियों को लॉकअप तक पहुंचाया।

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