question-mark{ सुरेश पाठक (सुभाष) }
लोकपाल विधेयक  पास हो गया, भ्रष्टाचार निरोधक एक नया कानून, बडी ख़ुशी की बात है, और सभी बधाई के पात्र है चाहे  वो आंदोलनकारी हों या राजनैतिक  दल।बडी बात यह है कि अगर कानून कमजोर होगा पर उसे लागु करने वाले सशक्त एवं निष्ठावान होंगे तो देश आगे बढ़ पायेगा पर अगर कानून मजबूत होगा पर उसको लागु करने वाले सशक्त एवं निष्ठावान नहीं होंगे तो देश आगे नहीं बढ़ पायेगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त हथियार के रूप में आखिरकार साढ़े चार दशक बाद यानी करीब 46 साल बाद अब देश को लोकपाल कानून मिलने का रास्ता साफ हो गया है। राज्यसभा के बाद  लोकसभा ने भी संशोधित लोकपाल बिल को हरी झंडी दिखाई। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही लोकपाल कानून वजूद में आ जाएगा। लोकसभा चुनाव के बाद नई सरकार ही लोकपाल की नियुक्ति कर पाएगी क्योंकि कानून बन जाने के बाद सरकार को अब इसकी नियमावली व ढांचा तैयार करने के लिए कुछ समय चाहिए। सरल भाषा मै समझे कि लोकपाल है क्या, और इसका मकसद क्या है? एक स्वतन्त्र संस्था का गठन किया जाएगा, जिसका नाम होगा लोकपाल यह संस्था सरकार से बिल्कुल पूरी तरह से स्वतन्त्र होगी। यह एक भ्रस्टाचार निरोधक कानून है । आज जितनी भी भ्रष्टाचार निरोधक संस्थाएं हैं जैसे सीबीआई, सीवीसी, डिपार्टमेण्ट विजिलेंस, स्टेट विजिलेंस डिपार्टमेण्ट, एण्टी करप्शन ब्रांच यह सारी की सारी संस्थाएं पूरी तरह सरकारी शिकंजे के अन्दर हैं। लोकपाल का मकसद है आम जनता को रोज़मर्रा के सरकारी कामकाज में रिश्वतखोरी से निजात दिलवाना और भ्रष्ट लोगों को सज़ा। क्योंकि यह एक ऐसा भ्रष्टाचार है जिसने गांव में वोटरकार्ड बनवाने से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक में लोगों का जीना हराम कर दिया है। इसके चलते ही एक सरकारी कर्मचारी किसी आम आदमी के साथ गुलामों जैसा व्यवहार करता है। }

लोकपाल के कुछ  बिंदु  इस प्रकार है । केंद्र के स्तर पर लोकपाल और राज्यों के स्तर पर लोकायुक्त। लोकपाल में एक अध्यक्ष होगा और अधिकतम आठ सदस्य। इनमें से 50 फीसदी सदस्य न्यायिक क्षेत्र से होंगे।. लोकपाल में 50 फीसदी सदस्य अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाओं में से होंगे।. अध्यक्ष और सदस्यों का चयन एक चयन समिति करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, भारत के प्रधान न्यायाधीश या प्रधान न्यायाधीश द्वारा मनोनीत सुप्रीम कोर्ट का कोई सेवारत न्यायाधीश, चयन समिति के पहले चार सदस्यों की सिफारिश के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत प्रख्यात न्यायविद। प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाया गया।. लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में हर श्रेणी के लोकसेवक आएंगे।. विदेशी योगदान नियमन कानून (एफसीआरए) के परिप्रेक्ष्य में विदेशी स्रोत से 10 लाख रुपये सालाना से अधिक दान प्राप्त कर रही सभी इकाइयां लोकपाल के दायरे में।  ईमानदार लोकसेवकों को पर्याप्त संरक्षण।. लोकपाल द्वारा संदर्भित मामलों में सीबीआई सहित किसी भी जांच एजेंसी को निर्देश देने का अधिकार लोकपाल को होगा। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति सीबीआई निदेशक के चयन में सिफारिश करेगी।. सीबीआई में अभियोजन निदेशक की नियुक्ति केंद्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर। लोकपाल द्वारा संदर्भित मामलों की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारियों के तबादले लोकपाल की मंजूरी से ही होंगे। भ्रष्ट स्रोतों से हासिल संपत्ति को सील करने का अधिकार, भले ही मुकदमा लंबित हो। प्रारंभिक जांच, जांच और मुकदमे के लिए बिल में स्पष्ट समयसीमा। विधेयक विशेष अदालतों के गठन का प्रावधान करता है। कानून लागू होने के 365 दिन में राज्यों की विधानसभाओं को लोकायुक्त के गठन के लिए विधेयक पारित करना होगा।

आज किसी भी गली मोहल्ले में जनता से पूछ लीजिए कि उन्हें इन दोनों तरह के भ्रष्टाचार से समाधान चाहिए या नहीं। देश के साथ ज़रा भी संवेदना रखने वाला कोई आदमी मना नहीं करेगा, सिवाय उन लोगों के जो व्यवस्था में खामी का फायदा उठा उठाकर देश को दीमक की तरह खोखला बना रहे हैं।  सवाल इसलिए भी उठरहे हैं कि सिटीजन्स चार्टर का क्या हुआ जो अति आवश्यक हैं। मेरा मानना है कि लोकपाल या कोई भी भ्रष्टाचार निरोधक कानून,  भ्रष्टाचार जरुर रोक सकता है, अगर  लागु करने वाले उसे प्रभावशाली ढंग से लागु करे तो | कभी भी कानून गलत नही होता , कमी होती है तो उसके सही ढंग से लागु न करने में | देश व समाज की भलाई का  काम  है ईमानदारी से निभाए सब अच्छा होगा ।लोकपाल कि बात हो रही है तो अन्ना जी का योगदान कभी नहीं भूलना चाहिए जो इतिहास बन गया है । भले ही संसद ने पूरी तरह से अन्ना का जनलोकपाल न पारित किया हो, जिस पर आम आदमी पार्टी सवाल उठा रही है, लेकिन यह एक मील का पत्थर तो बना ही है। लोकपाल बिल पास होने के साथ ही अन्ना ने यह एलान भी कर दिया है कि अब वे इसे ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए आगे भी प्रयास करते रहेंगे।

भ्रष्टाचार रूपी विष चारो ओर फ़ैल चूका है | इसे उखाड़ फेंकना आसान काम नहीं | पर अगर मन में हो विश्वास हो  तो असम्भव भी सम्भव हो पता है | इसी को हमे कर के बताना है | अगर आप पर कोई हमला कर दे तो क्या उस वक्त आप हाथ पर हाथ धर कर बैठे रहोगे ? अपना स्व बचाव करना नही चाहोगे ? चाहोगे न तो कैसे करना होगा ये काम ? कोई हथियार का ही सहारा लेना होगा न | बस सशक्त एवं मजबूत लोकपाल भी भ्रष्टाचार रोकने के लिए हथियार का ही काम करेगा | अगर घोडा बेलगाम हो जाये तो लगाम नही खीचनी पडती ? क्या बेकाबू हुए बेल के नाक में नकेल नही डाली जाती ? बस सशक्त एवं मजबूत लोकपाल भी भ्रष्टाचार रोकने के लिए लगाम और नकेल का ही काम करेगा | पर हमे इस लगाम और नकेल को मजबूत बनाना होगा इतना ही नही उस का सही ढंग से इस्तमाल करना होगा| इन बातों में अगर हम सफल हो पाते है तो कोई शक नही कि हम भ्रष्टाचार को न रोक पाये |

अब सवाल यह है कि  भविष्य  में  यह कितना कारगर होगा  ?  अभी तो विधेयक पास हुआ है फिर कानून की शक्ल लेगा । एक अच्छा और सख्त लोकपाल कानून आज देश की ज़रूरत है। लोकपाल कानून शायद देश का पहला ऐसा कानून होगा जो इतने बड़े स्तर पर जन चर्चा और जन समर्थन से बन रहा है। जन्तर मन्तर पर अन्ना हज़ारे के उपवास और उससे खड़े हुए अभियान के चलते लोकपाल कानून बनने से पहले ही लोकप्रिय हो गया है। आप में से कई सोच रहें होंगे कि अन्नाजी का  साथ देनेवाले उनके टीम के सदस्य भी तो दूध के धुले नहीं हैं |  उन पर भी तो उँगलियाँ उठ रही है | वे भी तो भ्रष्ट हैं |  इस के उत्तर में  यह है कि ये तो आप कि सोच की कमी है , कारण की लबालब भरे भ्रष्टाचार के तलाब में अगर आप पथ्थर फेंकोगे तो क्या आप का कीचड के छींटों से बचना संभव है । सायद नहीं,  ऐसा नहीं है कि एक कानून के बनने मात्र से देश में भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा या इसके बाद रामराज आ जाएगा। जिस तरह भ्रष्टाचार के मूल में बहुत से तथ्य काम कर रहे हैं उसी तरह इसके निदान के लिए भी बहुत से कदम उठाने की ज़रूरत होगी और लोकपाल कानून उनमें से एक कदम है। एक कहावत है हाथ में रोटी लेने से पेट नहीं भरता उसे  तोडकर खाना भी  पडता है। कानून बनाने भर से काम नहीं चलेगा, सही तरीके से लागु भी होना चाहिए, और आशा है सुधार जरुर होगा।

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11सुरेश पाठक (सुभाष)

विशेष संवाददाता – अंतराष्ट्रीय समाचार एवम विचार निगम

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