ब्यूरो

नई दिल्ली. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून-नरेगा को सुदृढ बनाने के मद्देनजर राज्य सरकारों, केन्द्रीय रोजगार गारंटी परिषद् के सदस्यों, पेशेवरों, शिक्षकों, सार्वजनिक प्रतिनिधियों, नागरिक समाज के संगठनों सहित विभिन्न हितधाराकों के साथ व्यापक परामर्श के आधार पर नई पहल शुरू की है। विकेन्द्रीकरण को सुदृढ बनाना और नरेगा श्रमिकों को गतिशील बनाना, पारदर्शिता और सार्वजनिक जिम्मेदारी को मजबूत बनाना, पारदर्शिता के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा नरेगा के तहत श्रमिकों के अधिकारों को सबल बनाना और नरेगा के जरिए टिकाऊ विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है । नरेगा के तहत शुरू की गई प्रमुख पहल इस प्रकार हैं –

• चयन समिति की सिफारिश पर राज्य सरकार जिला स्तर पर लोकपाल नियुक्त करेगी । लोकपाल नागरिक समाज का जाना-माना व्यक्ति होगा, जिसे सार्वजनिक प्रशासन, विधि, शिक्षा, सामाजिक कार्य या प्रबंधन के क्षेत्र मे अनुभव हो ।
• लोकपाल मौके पर जांच करने, गलत कार्य करने वालों के विरुध्द प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने, अनुशासन एवं दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश देगा ।
• लोकपाल मासिक और वार्षिक रिपोर्ट भेजेगा ।
• नरेगा भारतीय अनन्य पहचान विकास प्राधिकरण के साथ सहयोग करेगा। अनन्य पहचान विकास प्राधिकरण निवासियों की पहचान के लिए नरेगा के डाटाबेस का इस्तेमाल करेगा ।
• शिकायत दर्ज कराने और नरेगा संबंधी पूछताछ के लिए राष्ट्रीय टोल हेल्पलाइन 1800110707 शुरू की गई है ।
• ग्राम पंचायतों को हर छह महीने में सामाजिक लेखा परीक्षा के लिए कहा गया है ।
• नरेगा की प्रगति रिपोर्ट की निगरानी के लिए 100 प्रतिष्ठित नागरिकों की पहचान की गई है ।
• मंत्रालय ने नरेगा में मिलाने के लिए विभिन्न स्कीमों और कार्यक्रमों की पहचान की है, जिनमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना और जलाशय विकास कार्यक्रम शामिल हैं ।

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