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Thursday, November 26th, 2020

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून - पर रमन सिंह ने दिए प्रधानमंत्री को सुझाव

raman-singh-chief-minister-of-chhattisgarh-150x150आई एन वी सी, रायपुर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में इस प्रकार संषोधन करने के सुझाव दिये है जिससे हर गरीब और जरूरतमंद को खाद्य सुरक्षा मिल सके । उन्होंने प्रस्तावित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में आने वाले लोगों की संख्या अथवा आबादी के प्रतिषत की सीमा निर्धारित किये जाने को सही नही बताया है। उन्होंने कहा कि यह उचित होगा कि अपात्र परिवारों के निर्धारण का स्पष्ट और व्यावहारिक रूप से सत्यापित किये जाने वाला मापदंड हो । छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2012 में लाभ प्राप्त करने हेतु आबादी की अधिकतम संख्या अथवा प्रतिषत का निर्धारण करने के स्थान पर लाभ पाने हेतु अपात्रता (अपवर्जन) के स्पष्ट मापदण्ड निर्धारित किए जाने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने यह पत्र लोक सभा की खाद्य , उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्टेडिंग कमेटी द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून पर दी गयी सिफारिषों का उल्लेख करते हुए लिखा है। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि इन सिफारिषों में इस बात का उल्लेख है कि केन्द्र सरकार राज्यों के साथ पारदर्षी तरीके से राज्य विषेष के अनुरूप अपात्रता के मापदंडों का निर्धारण करेगी तथा यह सुनिष्चित करेगी की प्रस्तावित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में अपात्रता की निर्धारित सीमा राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्र की 25 प्रतिषत जनसंख्या और शहरी क्षेत्र की 50 प्रतिषत जनसंख्या से अधिक नहीं की जा सकेगी । समिति ने यह भी सिफारिष की है कि ग्रामीण क्षेत्र की 75 प्रतिषत जनसंख्या और शहरी क्षेत्र की 50 प्रतिषत जनसंख्या को प्रतिव्यक्ति 5 किलो खाद्यान्न प्रतिमाह की पात्रता होगी । मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खाद्य सुरक्षा के लिए प्रतिबध्द है तथा हमने छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2012 बनाया है। इस अधिनियम और प्रस्तावित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक में हालाकि कई समानता है परन्तु दोनो कानूनों में गरीबों की भूख की समस्या को हल करने के तरीके में काफी अंतर है । मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से पत्र में कहा है कि समिति की सिफारिषों के अनुरूप राज्य विषेष की सामाजिक आर्थिक स्थिति के अनुरूप राज्य सरकार से चर्चा करके ही अपात्रता के मापदंड बनाये जाने चाहिए तथा सार्वभौमिक अपात्रता सीमा नहीं लागू की जानी चाहिए । उन्होंने कहा कि वर्तमान में केन्द्र सरकार लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब परिवारों को प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रदान कर रही है । प्रस्तावित कानून में खाद्यान्न वितरण का आधार परिवार के बजाय प्रति व्यक्ति निर्धारित करने से बड़ी संख्या में ऐसे गरीबों को मिलने वाली खाद्यान्न की मात्रा कम हो जायेगी जिनके परिवार के सदस्यों की संख्या पांच से कम है । यह प्रावधान इन परिवारों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के मार्ग में बाधक बनेगा । उन्होंने सुझाव दिया की खाद्यान्न का वितरण प्रति परिवार के मापदंड के आधार पर ही किया जाना चाहिए न की प्रति व्यक्ति आधार पर । मुख्यमंत्री ने डॉ. मनमोहन सिंह को लिखा है कि समिति ने प्रति व्यक्ति प्रति माह पांच किलोग्राम खाद्यान्न प्रदान करने की सिफारिष की है । यह मात्रा गरीब परिवारों को खाद्यान्न सुरक्षा प्रदान करने के उद्देष्य को देखते हुए काफी कम है । उन्होंने सुझाव दिया की इसे परिवर्तित कर 35 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह किया जाना चाहिए ।

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