harish rawat invc newsआई एन वी सी न्यूज़
देहरादून,
उŸाराखण्ड के वीर सैनिकों ने देश की रक्षा के लिये हर युद्ध में शौर्यता की एक नई इबारत लिखी है। उत्तराखण्ड को अपनी वीरता व शहादत की शानदार परम्परा पर गर्व है। विजय दिवस पर गांधी पार्क में आयोजित कार्यक्रम में शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड को देवभूमि के साथ ही वीरभूमि का सम्मान दिलाने में हमारे वीर सैनिकों का महान योगदान है। हमारे जाबाजों ने 1971 की लड़ाई ने पूरे विश्व में पराक्रम की अद्भुत मिसाल कायम की। पाकिस्तानी सेना को अपने 90 हजार सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इस तरह का यह पहला मौका था। उŸाराखण्ड के गांव गांव में ऐसे वीर सैनिक हैं जो अपने वीरता के कारनामों से आने वाली पीढि़यों को प्रेरित करते हैं। हमारी मातृभूमि हमेशा से वीर पुत्रो को जन्म देती आ रही है। उत्तराखण्ड की मातायें अपने बेटे को एक सैनिक के रूप में देखना चाहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे विकासपरक योजनायें लायी जाये जिनमें भूतपूर्व सैनिकों की भी भागीदारी हो।
हमारी सेना युद्ध में ही नही बल्कि शान्ति में भी आतंकवाद, आपदा व अन्य मुसीबतों में हमारी मददगार रहती है। राज्य सरकार उपनल के माध्यम से पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों को रोजगार उपलब्ध करा रही है। हमने अपने बहादुर सैनिकों के सम्मान के लिए हर सम्भव प्रयास किया है। राज्य सरकार अपने सैनिकों व शहीद सैनिकों के परिवारों के साथ है।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने इस अवसर पर सैनिक कल्याण कोष हेतु 2 करोड़ की घनराशी भी स्वीकृत की। उन्होने कहा कि शहीद परिवारों के आश्रितों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु स्पेशल भर्ती अभियान चलाये जिससे हर आश्रित परिवार के एक सदस्य को अवश्य रोजगार मिलें।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि राज्य में कृृषि एक चुनौती है परन्तु उससे भी बडी चुनौती शिक्षा है शिक्षा को सरकार एवं शिक्षकों के ऊपर पूरी तरह से न छोडे बल्कि अभिभावक भी बच्चों के सर्वागीण विकास में अपनी भागीदारी निभायें। कोई मुल्क तभी तरक्की कर सकता है जब वह कृषि, शिक्षा एवं शिल्प के क्षेत्र में अग्रणी हो।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वीरता पदक प्राप्त उŸाराखण्ड के सैनिकों व शहीद सैनिकों के परिवारजनों को सम्मानित किया। उन्होने शहीद सुबेदार धर्मसिंह की माताजी एवं पत्नी को आर्थिक सहायता राशि के चैक भी प्रदान किये।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री डा0 हरक सिंह रावत ने कहा कि आज हिन्दुस्तान सुरक्षित है तो सैनिकों के बलबुते पर है। हमारे वीर सैनिकों ने 1971 में पाकिस्तान का भूगोल ही बदल दिया है। सरकार ने ब्लाक प्रतिनिधि का मानदेय 2500 से बढ़ाकर 6000 कर दिया है। राज्य सरकार ने बंद पडे सैनिक स्कूल दुबारा प्रारम्भ कर दिये है। जबकि अगस्तयमुनी व हल्द्वानी में सैनिक ट्रैनिंग स्कूल खोल गये है। उन्होने कहा कि दुनिया की जितनी भी बड़ी लडाई हुई है उसमें उत्तराखण्ड के वीर पुत्रों ने सर्वोच्च स्थान रखा है।
इसके बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत डाकरा बाजार झण्डा कमेटी द्वारा आयोजित शहीद दिवस समारोह में शामिल हुये। उन्होंने शहीद चैक में स्थित शहीद स्मारक में पुष्प अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री रावत ने शहीद मनोज राणा की माताजी को शाॅल भेंट कर सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि दुनिया की ऐसी कोई बड़ी लड़ाई नहीं है जिसमें उत्तराखण्ड के वीर सैनिकों का योगदान न रहा हो। उत्तराखण्ड के लोगों में सेना में भर्ती होने की आतुरता रहती है। मैं ऐसे जवानों को नमन करता हूँ। उन्होंने कहा कि सरकार सैनिकों व उनके परिवार के साथ खड़ी है। शहीदांे को याद करते हुये उनका व उनके परिवार वालों को चित्र उभर आता है। मैं ये तो नहीं कहता के हमने बहुत कुछ किया है पर पिछले 2-3 सालों में हमने शहीद सैनिकों के परिवार वालों के आँसू पोंछने की कोशिश जरूर की है। उनका साथ देने की कोशिश की है। राज्य सरकार द्वारा शहीद की पत्नी को 6 लाख रूपये व शहीद की माताजी को 4 लाख रूपये प्रदान किये जा रहे हैं। हमने पैरामिलिट्री को भी ये सुविधायें देने का फैसला किया है। साथ ही शहीदों का सम्मान करते हुये उनके परिवार के एक सदस्य को उपनल के द्वारा नियुक्ति दी जायेगी।
 इस अवसर पर विधायक राजकुमार, गणेश जोशी, हेमेश खर्कवाल, ललित फर्सवाण, डा0 जीत राम, निदेशक सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास उत्तराखण्ड कर्नल अमिताभ सिंह नेगी (से0नि0), ले0जे0 गम्भीर सिंह नेगी सहित बड़ी संख्या में सेना के सेवारत व सेवानिवृŸा अधिकारी,  जवान व शहीद सैनिकों के परिवारजन मौजूद थे।

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