Wednesday, October 23rd, 2019
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राज्यपाल सत्ता के भंयकर दुरूपयोग व राजकोष लूट के मामलों की अनदेखी - सपा

आई.एन.वी.सी,, लखनऊ,, समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री को सरकारी राजकोष लुटाने का कोई बहाना चाहिए। पत्थरों, पार्को पर जनता की गाढ़ी कमाई खर्च कर उनका मन भरा नहीं है। इसलिए चलते-चलते अपने मान्यवर की पुण्यतिथि के बहाने 6035 करोड़ रूपए कथित योजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण पर खर्च करने की घोषणा की गयी हैं। इसमें नियमानुसार मुख्यमंत्री का अपना कमीशन निकालने के बाद बची धनराशि अफसरों और बसपाई दबंगों के बीच बंट जानी है। दलितों के नाम पर योजनाओं का एलान भले हो, उनका कोई फायदा होने वाला नहीं है। प्रदेश सरकार आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। एक एक कर कई मंत्री अब तक लोकायुक्त की जाॅच में दोषी पाए जाने पर मंत्रिमंडल से बाहर हो चुके हैं। आधा दर्जन से ऊपर बसपा विधायक जेल की हवा खा रहे हैं। तमाम अफसरों के खिलाफ जाॅचें चल रही है या लंबित हैं। जहाॅ इस तरह भ्रष्टाचार का परनाला बह रहा हो वहा योजनाओं के नाम पर धन का आवंटन राजकोष की लूट की साजिश के अलावा और क्या हो सकता है? समाजवादी पार्टी पहले भी माॅग कर चुकी है कि सुश्री मायावती के अब तक के मुख्यमंत्रित्वकाल में जिन-जिन योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है, उनकी स्थिति पर श्वेतपत्र प्रकाशित किया जाए, ताकि पता तो चल सके कि पत्थर के हाथी ने कितना खाया और कितना पचाया है? प्रदेश की जनता लूट और उत्पीड़न की शिकार है। समाज का हर वर्ग त्रस्त है। प्रदेश का दुर्भाग्य है कि यहाँ  केन्द्र के प्रतिनिधि महामहिम राज्यपाल सत्ता के इस भंयकर दुरूपयोग और  राजकोष की लूट के मामलों की अनदेखी करते जा रहे हैंसंविधान की आड़ में यह सरकार उसकी ही धज्जियां  उड़ाती जा रही है। एक तरफ तो संसाधनों के अभाव का रोना है तो दूसरी तरफ केवल वोट के नाम पर खजाना लुटाने की होड़ हैं। मंहगाई, बेकारी से परेशान प्रदेशवासी अब इस बसपा सरकार से मुक्ति पाने के लिए छटपटा रहे है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव की समाजवादी क्रांतिरथ यात्रा का लोग घंटो तक उसका इंतजार करते हैं। वरिष्ठजनों को तब 87 की श्री मुलायम सिंह यादव की रथयात्रा की याद भी आ जाती है जब उनके सत्ता परिवर्तन के आव्हान पर प्रदेश में एक नई लहर पैदा हुई थी और जनता ने समाजवादी पार्टी को सत्ता सिहांसन पर बिठा दिया था।

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