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Sunday, September 27th, 2020

राज्यपाल ने शिक्षा के लिए दिया एक माह का वेतन भामाशाह राजस्थान के धरोहर : कल्याण सिंह

governor kalyan singh invc newआई एन वी सी न्यूज़ जयपुर, राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा है कि राजस्थान त्याग और वीरता का पर्याय है। मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वाले  महामना भामाशाह को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के विस्तार में सहयोग करने वाले भामाशाह राजस्थान के लिए धरोहर है। श्री सिंह ने समारोह में शिक्षा के विकास के लिए अपना एक माह का वेतन देने की घोषणा की।

राज्यपाल रविवार को यहां बिडला सभागार में प्रारम्भिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित   21वें राज्यस्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने समारोह में 77 भामाशाह और 20 प्रेरकों को स्मृति चिन्ह व प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। श्री सिंह ने कहा कि जीवन के विकास के लिए शिक्षा अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालक-बालिका को पढ़ाना होगा। प्राथमिक शिक्षा में सुधार की आवश्यकता जताते हुए कहा कि यह उच्च शिक्षा की नींव है, जिसे मजबूत करने लिए सभी को भागीदारी निभानी होगी।

राज्यपाल ने कहा कि मैं उच्च शिक्षा के प्रति चिन्तित हूं और उसमें गुणवत्ता लाने के लिए वे सतत प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान विश्वविद्यालय की पच्चीस वर्षों की बीस लाख डिग्रियां 7 जुलाई को आयोजित दीक्षान्त समारोह में प्रदान कर दी जायेगी। श्री सिंह ने कहा कि विद्यालय शिक्षा को जन-जन से जोडऩे का सशक्त माध्यम हंै, इन्हें विविध संसाधनों से संपुष्ट बनाना जरूरी है। राज्यपाल ने कहा कि नि:स्वार्थ भाव से शिक्षा व समाज की निरन्तर सेवा करने वाले भामाशाहों की भरपूर सराहना की जानी चाहिए। श्री सिंह ने महाराणा प्रताप को त्याग व संघर्ष की मूर्ति बताते हुए कहा कि महाराणा प्रताप विपरित परिस्थितियों में भी विचलित नहीं हुए। राज्यपाल ने ऐसे व्यक्ति को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। समारोह में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग  के मंत्री श्री सुरेन्द्र गोयल ने कहा कि शिक्षा के विकास के लिए शिक्षा में निपुणता लाना जरूरी है। इसी से राज्य का विकास होगाा। उन्होंने सरकारी विद्यालयों में पढाई के प्रति आकर्षण वाला वातावरण बनाने की जरूरत जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए दिया गया दान कभी व्यर्थ नहीं जाता। उन्होंने विद्यालयों का वातावरण सुधारने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया। इस अवसर पर प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने कहा कि अपनी कमाई दूसरों को खिलाना भारतीय संस्कृति है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का दान श्रेष्ठ है। श्री देवनानी ने बताया कि राज्य में पांच हजार विद्यालयों को एक साथ क्रमोन्नत किया गया है। उन्होंने बताया कि दूर दराज के विद्यालयों में भी शिक्षक नियुक्त किये जा रहे हैं और सभी स्कूलों में शौचालयों का निर्माण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने लोगों से शिक्षा में सहयोग की अपील की। उन्होंने संस्कृति से जुड़ी भारतीय परम्परा के बारे में बताया कि हमारे यहां माना गया है कि जो दूसरे का कमाया खाता है, वह विकृति है, जो स्वयं कमाकार अपना भरण करता है, वह प्रकृति है और जो अपनी कमाई से दूसरों का पोषण और दान करता है वह संस्कृति है। उन्होंने प्रदेश के बच्चों को 100 करोड़ से अधिक की नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण, कक्षा 9वीं की बालिकाओं को साईकिल दिए जाने संंबधित शिक्षा विभाग की योजनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि हमारा  प्रयास है कि राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो। प्रो. देवनानी ने कहा कि हर पंचायत पर कक्षा एक से बारहवीं तक का एक विद्यालय आदर्श रूप में विकसित करने का निर्णय राज्य सरकार ने इसीलिए लिया है कि शिक्षा क्षेत्र में तेजी से विकास हो। उन्होंने बताया कि नवीन स्टाफिंग पैटर्न से अब हरेक उच्च माध्यमिक विद्यालय में 14 और सैकण्डरी स्कूल में 11 शिक्षकों का पदस्थापन हो सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में भामाशाहों से पिछले वर्षों में 140 करोड़ का योगदान मिला है परन्तु अकेले इस वर्ष 20 करोड़ का सहयोग भामाशाहों ने शिक्षा क्षेत्र में दिया है, यह अपने आप में रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि अब जिला स्तर पर भी भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने प्रदेश के  37 हजार विद्यालयों में विद्युत और अन्य सुविधाओं के विकास के लिए भामाशाहों को आगे आकर दान देने का आह्वान किया। शासन सचिव, माध्यमिक शिक्षा श्री नरेश पाल गंगवाल ने भामाशाहों का आह्वान किया कि वे राज्य की प्रत्येक पंचायत में  कक्षा एक से 12 तक के विकसित किए जा रहे आदर्श विद्यालयों में अधुनातन सुविधाओं के विस्तार के लिए आगे आकर सहयोग करें। शासन सचिव, प्रारंभिक शिक्षा श्री कुंजीलाल मीणा कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में विकास के निरंतर कार्य कर रही है परन्तु उन्होंने विद्यालयों में और अधिक विकास के लिए जन सहभागिता की आवश्यकता भी जताई। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक श्री बी.एल. मीणा ने सभी आगुन्तकों का आभार जताया। माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक श्री सुआलाल ने भामाशाहों के सहयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

इससे पहले राज्यपाल श्री कल्याणसिंह ने 21 वें भामाशाह सम्मान समारोह की प्रशस्तियों की पुस्तिका का भी विमोचन किया। इन भामाशाहों ने इस वर्ष 20 करोड़ 24 लाख 67 हजार रुपये की राशि प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों के विकास के लिए प्रदान की है।

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