जयपुर । राजस्थान की बिजली कपंनियां निवेशकों के पसीने छुड़वा रही है सबसे अधिक खराब हालात विंड पॉवर कंपनियों की है, इन कंपनियों की 900 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान डिस्कॉम्स नहीं कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि जोधपुर डिस्कॉम पर 600 करोड़ और जयपुर और अजमेर डिस्कॉम के ऊपर 300 करोड़ रुपए बकाया चल रहे हैं।


प्रदेश सरकार एक ओर निवेश प्रोत्साहन करने के लिए नीतिगत बदलाव कर रही हैं वहीं दूसरी ओर हजारों करोड़ रुपए बकाया रहने से निवेशकों का मोहभंग होने की आशंका है प्रदेश की बिजली कंपनियां इन दिनों लचर प्रबंधन का सामना कर रही है बिजली कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ रहा है इसके साथ ही देनदारियां भी बढ़ती जा रही हैं हालात यह हैं कि बिजली कंपनियां नियमित देनदारियों के भुगतान करने में ही असफल नजर आ रही हैं. बिजली कपंनियों की ओर से भुगतान नहीं मिलने पर प्रदेश में 4300 मेगावाट क्षमता की विंड पॉवर उत्पाद इकाईयां बंद होने के कगार पर हैँ बिजली कंपनियों ने कई विंड उत्पादन कर रही कंपनियों को अक्टूबर 2018 से बिजली खरीद राशि का भुगतान नहीं किया है वहीं अप्रैल 2019 से भुगतान पूरी तरह अटके हुए है। बिजली कंपनियों पर अब तक 900 करोड़ रुपए की राशि अकेले इंडियन विंड पॉवर एसोसिएशन की सदस्य कंपनियों की हो चुकी है। 

प्रदेश में अप्रेल से लेकर अगस्त तक बिजली कपंनियां सबसे अधिक विंड पॉवर उत्पादन करती हैं, अगर भुगतान में देरी हुई तो अगस्त तक यह राशि 1500 करोड़ रुपए के पार पहुंच जाएगें. हालांकि भुगतान नहीं मिलने से बाहरी राज्यों और विदेशों के निवेशक अपने विंड प्रोजेक्ट बंद करने की तैयारी में है भुगतान की समस्या के साथ आरइसी पॉलिसी के तहत स्थापित संयंत्रों के पीपीए एग्रीमेंट रिनुअल नहीं होने से भी बिजली उत्पादक परेशान हैं. विद्युत नियामक आदेश की अवहेलना कंपनियां कर रही है। राजस्थान ऊर्जा विकास निगम को विंड संयत्रों से उत्पादित बिजली खरीद के लिए नए सिरे से एग्रीमेंट करना है पॉवर परचेज के लिए होने वाले एग्रीमेंट पर अभी तक साइन नहीं हुए जबकि बिजली खरीद लगातार जारी है। PLC.