Monday, October 14th, 2019
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गणपति विसर्जन का पारम्परिक तरीका हमारा धार्मिक मामला

आई एन वी सी न्यूज़ 
नई दिल्ली,
धर्मरक्षक दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन की अध्यक्षता में हुई हिन्दू संगठनों की बैठक में हिन्दू संगठनों ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस-प्रशासन को धन्यवाद दिया कि पिछले साल की तरह ही इस साल भी पुलिस और प्रशासन ने फूल-मूर्ति विसर्जन यमुना-गंगा में पारम्परिक तरीके से करवा कर धार्मिक मान्यताओं का सम्मान किया।


बैठक में दारा सेना के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी ओम जी ने गणपति के भक्तों से भी अपील की कि धार्मिक मान्यताओं और परम्पराओं का पालन करना उनका संवैधानिक मूल अधिकार 25 और 26 है यदि कोई उनमें अडंगा डालता है तो हिन्दू संगठन अपने धर्म की रक्षार्थ ऐसे धर्म शत्रुओं को मुंह तोड जवाब दें।

उल्लेखनीय है कि राजधानी दिल्ली के हिन्दू संगठनो, गणपति पण्डालों और दुर्गा पूजा समितियों ने अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्रप्रकाश कौशिक जी के नेतृत्व में इसी 28 अगस्त को निर्णय लिया है कि गणपति पूजा और दशहरा के दौरान यमुना और गंगा मैय्या में दुर्गा मैय्या की मूर्तियों का विसर्जन पारम्पारिक तरीके से होगा। इस मामले में किसी को हम अपने धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने देंगे, हम संविधान द्वारा प्रदत्त मूलाधिकारों का हनन् करने वाले हर शख्श का न केवल विरोध करेंगे बल्कि ऐसी संविधान विरोधी ताकतों को मुंहतोड जवाब देकर भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा करेंगे। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने महामहिम राष्ट्रपति जी, गृहमंत्री श्री अमित शाह जी सहित पर्यावरण मंत्री और दिल्ली पुलिस को भी ज्ञापन दिया था।

 हिन्दू संगठनों की बैठक में दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के अनुसार हमें अपने धर्म को अबाध रूप से मानने आचरण करने और प्रचार करने का मूलाधिकार मिला हुआ है। इसी के साथ मूलाधिकार अनुच्ठेद 26ख हमें अपने धार्मिक कार्यों के प्रबन्धन स्वयं करने का मूलाधिकार धार्मिक संस्थाओं को देता है। साफ बात यह है कि यमुना में मूर्ति विर्सजन हमें कब करनी है कहां करनी है यह हमारा धार्मिक मामला है। जिसमें हस्तक्षेप करने का न तो प्रशासन को कोई अधिकार है और न ही कोई न्यायालय इस मामले में कोई नया नियम या आदेश जारी कर सकता,ओर आदेश भी ऐसा जो कि मूलाधिकारों का हनन् करे।


श्री जैन ने बताया कि दिनांक 9 नवम्बर,15 को हरित अधिकरण एन जी टी की प्रधान पीठ ने न्यायमूर्ति श्री स्वतन्त्र कुमार की अध्यक्षता में साफ आदेश दिया था कि हमने यमुना में मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश कभी नहीं दिया, जो कि अनेक समाचार पत्रों और टी वी चैनलों में भी दिखाया गया।



 

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