Thursday, February 27th, 2020

यह कभी नहीं भूल सकते कि‍ जापान की ओर से वि‍देशी वि‍कास सहायता प्राप्‍त करने में भारत सबसे प्रमुख रहा : डॉं.मनमोहन सिंह

आई,एन,वी,सी,,, दिल्ली,, प्रधानमंत्री डॉं.मनमोहन सिंह ने कहा कि‍ जापान के उत्‍तरी पूर्वी क्षेत्र में 11 मार्च को आए वि‍ध्‍वंसकारी भूकंप और सुनामी से हुई व्‍यापक जानमाल की हानि‍ पर उन्‍हें गहरा दु:ख है। जापान के प्रधानमंत्री को भारत सरकार और भारतीयों की ओर से भेजे गये अपने संदेश में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि‍ भारत इस संकट की घड़ी में जापान के लोगों के साथ खड़ा है और उनकी कि‍सी भी जरूरत को पूरा करने के लि‍ए हर संभव सहायता के लि‍ए तैयार है। डॉ. सिंह ने कहा कि‍ उन्‍हें उम्‍मीद है कि‍ जापान की इस सबसे भयावह आपदा से नि‍बटने में जापान के लोगों के लि‍ए भारतीयों की ओर से की जा रही प्रार्थना में सदन उनका साथ देगा। डॉं. सिंह ने कहा कि‍ वे यह कभी नहीं भूल सकते कि‍ जापान की ओर से वि‍देशी वि‍कास सहायता प्राप्‍त करने में भारत सबसे प्रमुख रहा है। उन्‍होंने कहा कि‍ जापान के साथ भारत के संबंध सबसे बेहतर हैं। उन्‍होंने कहा कि‍ शीघ्र कदम उठाते हुए, 25 हजार कंबल जापान को भेज रहे हैं। इसके अलावा भारत जल्‍द ही खोजबीन, राहत और सहायता दल सामाग्री भेजने को तैयार हैं। उन्‍होंने कहा कि‍ भारतीय नौसेना के जहाज भी जापान में कि‍सी भी मदद के लि‍ए तैयार हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि‍ जापान में करीब 25 हजार भारतीय हैं और उनमें से अधि‍कांश सुनामी से प्रभावि‍त क्षेत्र में नहीं रहते। जापानी अधि‍कारि‍यों द्वारा बनाए गये शि‍वि‍रों में करीब 70 भारतीय रह रहे हैं और उनकी देखरेख की भी नि‍गरानी की जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि‍ अभी तक कि‍सी भारतीय की जनहानि‍ होने की सूचना नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि‍ इस आपदा से जापान में कुछ परमाणु ऊर्जा रि‍एक्‍टर भी प्रभावि‍त हुए हैं। इस संबंध में, भारत सरकार अंतर्राष्‍ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्‍सी, जापानी परमाणु औद्योगि‍क मंच और परमाणु अभि‍यान वि‍श्‍व एसोसि‍एशन से लगातार संपर्क बनाए हुए है। डॉं. सिंह ने कहा कि‍ भारत में वर्तमान में 20 परमाणु ऊर्जा रि‍एक्‍टर काम कर रहे हैं। इनमें से 18 स्‍वदेशी दाबानुकूलि‍त भारी जल रि‍एक्‍टर हैं और तारापुर स्‍थि‍त दो रि‍एक्‍टर जापान की तरह से क्‍वथन जल रि‍एक्‍टर हैं। हाल ही में इन रि‍एक्‍टरों की सुरक्षा की एक जांच पूरी की जा चुकी है। उन्‍होंने कहा कि‍ इससे पूर्व भी, भुज में 26 जनवरी, 2002 को आए भूकंप के बाद भी काकरापर परमाणु ऊर्जा संयंत्र ने सुरक्षा पूर्वक बि‍ना बाधा के अपना काम जारी रखा। 2004 में आए सुनामी के बाद मद्रास परमाणु ऊर्जा संयंत्र को बि‍ना कि‍सी रेडि‍योधर्मिता के सफलतापूर्वक बंद कर दि‍या गया था। लेकि‍न अगले कुछ दि‍नों में समीक्षा के बाद इसे पुन: प्रारंभ करने की संभावना है। प्रधानमंत्री ने सदन के सदस्‍यों को वि‍श्‍वास दि‍लाते हुए कहा कि परमाणु सुरक्षा को सरकार सबसे ज्‍यादा महत्‍व देती है और सुनामी और भूकंप जैसी बड़े पैमाने पर आने वाली प्राकृति‍क आपदा से नि‍बटने में परमाणु ऊर्जा वि‍भाग और इससे संबंधि‍त एजेंसि‍यों एवं भारतीय परमाणु ऊर्जा कॉरपोरेशन को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सभी सुरक्षा और तकनीकी समीक्षा को शीघ्र प्रभाव से सुनि‍श्‍चि‍त करने के लि‍ए नि‍र्देश जारी कि‍ए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने सदन को बताया कि‍ भारत के राष्‍ट्रीय परमाणु सुरक्षा नि‍यामक प्राधि‍करण को और मजबूत बनाने के लि‍ए परमाणु ऊर्जा वि‍भाग के कार्य जारी हैं।

Comments

CAPTCHA code

Users Comment