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Thursday, February 25th, 2021

मॉडर्ना की वैक्सीन के आपातकालीन प्रयोग को कल मिल सकती है मंजूरी

वाशिंगटन । अमेरिका मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन को मंजूरी देने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि शुक्रवार को खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) की बैठक में इस वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दे दी जाएगी। कंपनी के नए डेटा में भी इस बात का दावा किया गया है कि यह वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ अत्यधिक सुरक्षात्मक है। 
वैक्सीन को मंजूरी दिए जाने के कुछ दिनों के भीतर इसे अस्पतालों में टीकाकरण के लिए पहुंचा दिया जाएगा। एफडीए की समीक्षा में भी यह पुष्टि हुई है कि 30,000 लोगों पर क्लिनिकल ट्रायल के दौरान इस वैक्सीन ने 94।1 फीसदी प्रभाव दिखाया। हालांकि इस वैक्सीन के लगने के बाद लोगों में बुखार, सिरदर्द और थकान जैसे साइड इफेक्ट देखने को मिले थे, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे खतरनाक नहीं माना है। बता दें कि वैक्सीन को मंजूरी मिलते ही कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका में टीकाकरण का काम शुरू किया जाएगा।
मॉडर्ना के सीईओ स्टीफन बैंसेल ने कहा कि अगर प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती है और मंजूरी दी जाती है तो वैक्सीन को 21 दिसंबर तक मॉर्केट में उतार दिया जाएगा। मॉडर्ना ने अपने अप्लीकेशन में सोमवार को घोषित किए गए अपने डेटा को दर्शाया है। जिसमें वैक्सीन के प्रभावी होने का दावा किया गया है। कंपनी ने दावा किया है कि ट्रायल के दौरान सभी आवश्यक वैज्ञानिक मानदंडों को पूरा किया गया है। फाइजर की तरह मॉडर्ना की वैक्‍सीन को भी बेहद कम तापमान पर स्‍टोर करके रखना पड़ता है। यह एमआरएनए तकनीक पर आधारित वैक्‍सीन है और 94.5% तक असरदार पाई गई है। मॉडर्ना ने अपनी वैक्‍सीन की कीमत 32 से 37 डॉलर प्रति डोज रखने की बात कही है। बड़े ऑर्डर्स पर यह कीमत और नीचे जा सकती है। फिर भी मध्‍य और कम आय वाले देशों के लिए यह वैक्‍सीन अफोर्ड कर पाना बेहद मुश्किल होगा।
वैक्सीन के प्रभावी होने के मॉडर्ना के दावे के बाद उसके शेयर में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। इस खबर से मॉडर्ना के शेयरों में करीब 7 फीसदी की उछाल आई। कंपनी के शेयर को लेकर खरीदारों में भी उत्साह देखा जा रहा है। अमेरिका में सोमवार से फाइजर की कोरोना वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू किया गया है। इसे अमेरिकी इतिहास में अबतक का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान बताया जा रहा है। फाइजर-बायोएनटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन की डोज को सबसे पहले अमेरिकी स्वास्थ्यकर्मियों को दी जा रही है। बता दें कि कोरोना वायरस से अमेरिका में अब तक तीन लाख लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमितों के मामले में भी अमेरिका दुनिया में शीर्ष पर काबिज है। PLC.

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