Tuesday, January 28th, 2020

मेवात मे जातिवाद बना सभ्य समाज के लिए खतरे की घंटी*

मुहम्मद याहया सैफ़ी{मुहम्मद याहया सैफ़ी**} रास्ट्रीय राजधानी छेत्र से सिर्फ़ 60 किलोमीटर के फासले और अरावली की तलहटी मे बसा हुवा इलाक़ा मेवात कहलाता है मेव जाती बाहुल्य होने के कारन ही इस इलाक़े का नाम मेवात पड़ा. मेवात सोहना से लेकर अलवर तक फैला हुवा है हरियाणा राज्य के गुडगाँव और फरीदाबाद मे मेवात के काफ़ी गाँव लगते हैं लेकिन 4 मई 2005 को मेवात को अलग से ज़िला बना दिया गया और नूह को मेवात जिले का मुख्यालय बनाया गया | मेवात इलाक़े की यूँ तो बहुत सारी समस्याएँ हैं लेकिन लड़कियों की शिक्षा , पीने का पानी , और यातायात आदि यहाँ की मुख्य समस्याएँ हैं यूनिवर्सिटी की मांग भी मेवात मे जोर पकड़ने लगी है और आज कल पहले के मुकाबले मेवात का युवा तालीम की तरफ भी ध्यान देने लगा है । अब देखा जाये तो मेवात के कई लड़के न्यायाधीस भी बन गए हैं हाल ही मे श्री हारुन खान ने न्यायाधीस बन्ने का गौरव प्राप्त किया है जो की इलाक़े के लिए एक गर्व की बात है । लेकिन इस सबके बावजूद मै आपका ध्यान एक बहुत ही खतरनाक ज़हर की तरफ दिलाना चाहता हूँ और वो है जातिवाद का ज़हर | मेवात मे मेव कौम के इलावा हिन्दू भाई भी काफ़ी संख्या मे आबाद है और इनके इलावा दूसरी जातियां जेसे सैफ़ी (लुहार) सक्का (बहिश्ती) मियां (अल्वी) अब्बासी (मिरासी) और तेली जेसी अन्य और भी जातियां है । मेवों के मुकाबले इन जातियों के लोगो की संख्या हर गावं मे दो चार घरो की ही होती है । लेकिन अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है की गावों मे आज भी इन जातियों के लोगों को तरह तरह की परेशानियों से का मुक़ाबला करना पड़ता है पढ़ लिख जाने की बावजूद आज भी इन जातियों के बच्चो को नाम ना लेकर जाति के नाम से पुकारा जाता है छोटी छोटी बातों पर इनको धमकाया जाता है और गावं छोड़ कर चले जाने को कह दिया जाता है मेवात मे चूँकि क्रषि योग्य भूमि का मालिक एक सोची समझी रणनीति के तेहत सिर्फ मेव कौम को बनाया गया इसलिए दूसरी छोटी जातियों के लोगो को अपने खेतो से ना निकलने का भी फरमान सुना दिया जाता है लेखक खुद भी एक बार ऐसी ही धमकी का शिकार हो चुका है । मेव कौम यूँ तो मुस्लिम है और इस्लाम को मानने का दम भरती है लेकिन इस्लाम की तालीम को इस मामले मे पास भी नहीं आने देती |

यूँ तो तुम सय्यद भी हो मिर्ज़ा भी अफगान भी हो ये तो बताओ की क्या तुम मुस्लमान भी हो ?

अल्लामा इकबाल

पैगम्बर मुहम्मद स.अ.व. ने अपने आखरी तक़रीर मे कहा की आज से गोरे को काले पर अरबी को अजमी पर कोई तरजीह नहीं दी जायेगी | आज के बाद सब बराबर हैं लेकिन मेवात मे मुस्लिम होने के बावजूद पैगम्बर के इस आदेश को भी अपनी जातिवाद की अना के आगे पीछे धकेल दिया | मेवात के युवाओं से अपील है की जातिवाद को छोड़कर भाईचारे का रास्ता अपनाया जाये वरना वो दिन दूर नहीं जब जातिवाद का ये ज़हर हमें कहीं का नहीं छोड़ेगा ।

ना मोहब्बत ना एकता ना कहीं भाईचारा ऐ खुदा, मै शर्मिंदा हूँ इस दौर का इन्सा होकर

 *******

____________________________________________________________

मुहम्मद याहया सैफ़ी**मुहम्मद याहया सैफ़ी लेख़क सोशल एक्टिविस्ट है 9896202294 ____________________________________________ *Disclaimer: The views expressed by the author in this feature are entirely his own and do not necessarily reflect the views of INVC.

Comments

CAPTCHA code

Users Comment