Sunday, December 8th, 2019

मूल्य श्रृंखला में भारत का एकीकरण निम्न स्तर पर जारी है 

आरसीईपी चुनौतियों और मौकों को लेकर आया

आई एन वी सी न्यूज़ 

नई  दिल्ली ,

आरसीईपी लीडर्स समिट राजनीतिक दृष्टिïकोण से आरसीईपी नेगोशिएशन पर 4 नवंबर को बैंकॉक में आरंभ होने केलिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बैठक में हिस्सा लेंगे ओर आरसीईपी नेगोशिएशन पर भारत की चिंताओं के बारे में अपना पक्ष रखेंगे। सीआईआई अध्यक्ष ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि इससे पहले इतिहास में किसी ट्रेड एग्रीमेंट ने इतनी बड़ी संख्या में हितधारकों का ध्यान आकर्षित नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा कि भारत केा आरसीईपी नेगोशिएशन से विन-विन की स्थिति चाहता  है। उन्होंने नेगोशिएन केतीनों प्रमुख क्षेत्र गुड्स, सर्विस और इनवेस्टमेंट बराबरी की प्रमुखता देने की बात भी कही। सीआईआई के अध्यक्ष विक्रम किरलोस्कर ने प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्त किए गए रुख का समर्थन करते हैं। भारतीय उद्योग के एक बड़े हिस्से ने बहुत वास्तविक कारणों के आधार पर आरसीईपी में शामिल होने के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की है।

 विशेष रूप से चीन के कारण और व्यापार समझौते पर बातचीत करते हुए इन्हें शामिल करने के लिए सीआईआई सरकार का आभारी है। हालाँकि इस आकार के समझौते में शामिल होने का निर्णय सिर्फ एक देश से चिंता के कारण आधारित नहीं होना चाहिए। एफटीए को उनके दीर्घकालिक प्रभाव से माना जाना चाहिए हमारे घरेलू बाजार और इसके उपयोग की पहुंच दोनों पर आधारित होना चाहिए। सीआईआई के अध्यक्ष ने कहा कि हमारे कुछ उद्योग आज घरेलू स्तर पर केंद्रित हो सकते हैं, लेकिन दस वर्षों में आरसीईपी सेवा के लिए 15 अन्य देशों के क्षेत्र की पहुंच चाहेंगे। आरसीईपी के 16 सदस्य देशों में यह क्षमता है कि वह विश्व बाजार का एक बड़ा हिस्सा बन कर उभर सके यहां तक की यूरोपियन यूनियन से भी बड़। 2017 में आरसीईपी देशों ने ग्लोबल पॉपुलेशन का 47.6 प्रतिशत हिस्सा कवर किया और विश्व जीडीपी में 31.6 प्रतिशत, ग्लोबल ट्रेड का 30.8 प्रतिशत कवर किया था। पूर्व एफटीए के मिश्रित अनुभव है जो साउथ कोरिया, चीन, मैक्सिको आदि से अलग है। एफटीए पर पूरी डिबेट के बीच की गायब कड़ी एफडीआई है। दुर्भाग्य से भारत में हम हमेशा निर्यात और आयात के संदर्भ में एफटीए के प्रभाव का विश्लेषण किया है और वह भी द्विपक्षीय रूप से लेकिन कभी भी महसूस नहीं किया गया कि इन देशों ने एफटीए का उपयोग वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में सफलतापूर्वक एकीकृत करने के लिए कैसे किया। मूल्य श्रृंखला में भारत का एकीकरण निम्न स्तर पर जारी है जिसके विभिन्न कारक हैं।

हमारे समझौते अपने एफटीए साझेदारों के अन्य समझौतों के मुकाबले बहुत गहरे नहीं हैं। सीआईआई ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय एकीकरण के लिए भविष्य की गति आरसीईपी के लिए वार्ता के समापन और आरसीईपी द्वारा व्यापार, निवेश और लोगों के सीमा पार प्रवाह के माध्यम से क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं की वृद्धि पर बल देगा। सामान्य धारणा यह है कि भारत का महत्व अंतिम उत्पाद बाजारों के उपभोक्ता के रूप में अधिक है। लेकिन जैसे ही आरसीईपी आगे बढ़ता है और अनुकूल टैरिफ और रूल्स ऑफ ओरिजिन (आरओयू) किक-इन होता है, भारत को अपने माध्यम से क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं के समन्वय के लिए एक प्रमुख केंद्र बनना चाहिए। अंतिम उत्पादों के लिए एक प्रमुख बाजार के रूप में तथा तीसरे देश के निर्यात के लिए एक स्थान के रूप में खास तौर पर मध्य पूर्व अफ्रीका और यूरोप पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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