Tuesday, October 22nd, 2019
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' मुसाफिर ' शब्द को केन्द्र में रखकर 105 मुक्तक - कवि श्यामल सुमन

 
 - श्यामल सुमन -
   - मुक्तक -
जीवन है श्रृंगार मुसाफिर
जीवन पथ अंगार मुसाफिर, खाते कितने खार मुसाफिर जीवटता संग होश जोश तो, बाँटो सबको प्यार मुसाफिर

                                             दुखिया है संसार मुसाफिर, नैया भी मझधार मुसाफिर आपस में जब हाथ मिलेंगे, होगा बेड़ा पार मुसाफिर

प्रेम जगत आधार मुसाफिर, फिर काहे तकरार मुसाफिर संविधान ने दिया है सबको, जीने का अधिकार मुसाफिर

                                              करते जिसको प्यार मुसाफिर, दे अक्सर दुत्कार मुसाफिर फिर जाने कैसे बदलेगा, दुनिया का व्यवहार मुसाफिर

कहती है सरकार मुसाफिर, जाति धरम बेकार मुसाफिर मगर लड़ाते इसी नाम पर, सत्ता-सुख साकार मुसाफिर

                                               खुद पे कर उपकार मुसाफिर, जी ले पल पल प्यार मुसाफिर देख जरा मन की आँखों से, जीवन है श्रृंगार मुसाफिर

चाहत सबकी प्यार मुसाफिर, पर दुनिया बीमार मुसाफिर प्रेमी सुमन जहाँ दो मिलते, मिलती है फटकार मुसाफिर
जीवन को पहचान मुसाफिर
प्रीति परस्पर दान मुसाफिर मिट जाता अभिमान मुसाफिर प्रेम नगर में फिर भी कितने दिख जाते नादान मुसाफिर

                                               प्रेम योग है, ध्यान मुसाफिर मानो तो भगवान मुसाफिर सहज खुशी जीवन में हो तो जीवन का सम्मान मुसाफिर

जीवन को पहचान मुसाफिर कदम कदम व्यवधान मुसाफिर प्यार की बातें सब करते पर प्रेमी का अपमान मुसाफिर

                                                 मातु पिता सन्तान मुसाफिर इक दूजे की जान मुसाफिर जितना प्यार लुटाओगे तुम बढ़े प्रेम का मान मुसाफिर

हृदय प्रेम वरदान मुसाफिर हैं सबके अरमान मुसाफिर मैं से तुम मिलके हम हो तो प्रेम सृजन विज्ञान मुसाफिर

                                                  रस्ता है अनजान मुसाफिर होना मत हलकान मुसाफिर भले साँकरी प्रेम डगर हो होगा एक निदान मुसाफिर

गोकुल सा मैदान मुसाफिर सुन मुरली की तान मुसाफिर गोपी से जब सुमन जुदाई दिल में जख्म निशान मुसाफिर
बढ़े चलो अविराम मुसाफिर
आगे बढ़ना काम मुसाफिर नहीं तुझे आराम मुसाफिर मंजिल से आगे भी मंजिल निकलेगा परिणाम मुसाफिर

                                            कभी कृष्ण तू राम मुसाफिर और कई हैं नाम मुसाफिर जिसने राह सुगम कर डाला सबको सतत प्रणाम मुसाफिर

छाया भी है घाम मुसाफिर रस्ता है अभिराम मुसाफिर लक्ष्य सामने, पाना है तो बढ़े चलो अविराम मुसाफिर

                                              हृदय भाव निष्काम मुसाफिर तभी काम का दाम मुसाफिर स्वारथ में जो अक्सर जीते हो जाते बदनाम मुसाफिर

कोई नहीं लगाम मुसाफिर सबका रस्ता आम मुसाफिर यहाँ संभल के चलते उनको मिलता सदा सलाम मुसाफिर

                                               जीवन तब नाकाम मुसाफिर जब होठों पर जाम मुसाफिर मूल्य बचे तो जी लेंगे सब देना ये पैगाम मुसाफिर

भूखे हैं जन आम मुसाफिर खाते कुछ बादाम मुसाफिर अगर विषमता नहीं मिटी तो सोच सुमन अंजाम मुसाफिर
कारण बस अज्ञान मुसाफिर
जीवन में उत्थान मुसाफिर और कभी ढालान मुसाफिर वही कीमती जीवन जिसमें बनी रहे मुस्कान मुसाफिर

                                             सहज प्रेम हो ज्ञान मुसाफिर सम्बन्धों की जान मुसाफिर बिखर रहे परिवार आजकल कारण बस अज्ञान मुसाफिर

बनी रहे तब शान मुसाफिर जब दुखियों के मान मुसाफिर बांटो, पाया जो समाज से बचे तभी पहचान मुसाफिर

                                             क्यों पैसे में जान मुसाफिर जितने हैं धनवान मुसाफिर शायद साथ इसे ले जाएं जब होंगे बेजान मुसाफिर

कितना कौन महान मुसाफिर शिक्षक या भगवान मुसाफिर किसकी पूजा पहले हो जब दोनों एक समान मुसाफिर

                                             अवसर को पहचान मुसाफिर सीख गुरू से ज्ञान मुसाफिर चूके तो पछतावा निश्चित युग का यही विधान मुसाफिर

गुरू चरण जब ध्यान मुसाफिर तब शिक्षा उत्थान मुसाफिर करो सुमन आजीवन पालन शिक्षक, शिक्षा मान मुसाफिर
आते जाते रोज मुसाफिर
हो मन में अनुराग मुसाफिर तब जीवन बेदाग मुसाफिर मगर बुराई से लड़ने की दिल में रखना आग मुसाफिर

                                              आते जाते रोज मुसाफिर सबके भीतर ओज मुसाफिर बन द्वापर के नायक जैसा वैसा नायक खोज मुसाफिर

क्यों जीवन अवसाद मुसाफिर ले लो पल पल स्वाद मुसाफिर जीवन सफल अगर तू कर ले सुख में दुख को याद मुसाफिर

                                              रखना पथ की लाज मुसाफिर देना ये आवाज मुसाफिर इक बीता कल इक आएगा बस जी ले तू आज मुसाफिर

हर पग की आवाज मुसाफिर जीवन का आगाज मुसाफिर अपने अपने सब के होते जीने के अन्दाज मुसाफिर

                                             रोते अक्सर आज मुसाफिर क्यों खुद से नाराज मुसाफिर ठीक ठाक जीवन है मुमकिन मीठे हों अल्फाज मुसाफिर

अपने अपने साज मुसाफिर खोलो दिल के राज मुसाफिर सब कुछ मिटे सुमन के शायद बची रहे आवाज मुसाफिर
शब्द शब्द बलवान मुसाफिर
सबको सबसे आस मुसाफिर कुछ तो खासमखास मुसाफिर कहते अक्सर लोग उसी ने तोड़ा है विश्वास मुसाफिर

                                                शब्द शब्द बलवान मुसाफिर यही मान अपमान मुसाफिर बाँटो जितना, बढता जाता दान करो नित ज्ञान मुसाफिर

सब करते हैं काज मुसाफिर क्यों भूखे कुछ आज मुसाफिर शासन अपना सात दशक से अब आती है लाज मुसाफिर

                                               खुद को नित पहचान मुसाफिर अपनी कीमत जान मुसाफिर दूजे का भी मान करो पर अपना कर सम्मान मुसाफिर

जब करते हो बात मुसाफिर जगते हैं जज्बात मुसाफिर वन में भी संग तेरे जी लूँ चाहे काली रात मुसाफिर

                                                बनते आसाराम मुसाफिर निर्मल को परनाम मुसाफिर है राधे मां इन्द्राणी भी लगता पी लूँ जाम मुसाफिर

क्यों करते हो पाप मुसाफिर छोड़ो अपनी छाप मुसाफिर उलट पुलट करने से जीवन बने सुमन अभिशाप मुसाफिर
कितना तेरा दाम मुसाफिर
खुद का बन्धन तोड़ मुसाफिर खुद को खुद से जोड़ मुसाफिर कदम उठाकर चतुराई से पार करो हर मोड़ मुसाफिर

                                                कभी कभी आघात मुसाफिर पर जीवन सौगात मुसाफिर अक्सर लोगों कीआँखों में होती क्यों बरसात मुसाफिर

अपने पर विश्वास मुसाफिर सबकी अपनी प्यास मुसाफिर उस मीठे अनुभव की सोचो मिलते जब दो खास मुसाफिर

                                                 रोज मनाओ हर्ष मुसाफिर पर जीवन संघर्ष मुसाफिर जहाँ पसीने की खुशबू हो मिलता है उत्कर्ष मुसाफिर

कितना तेरा दाम मुसाफिर जितना तेरा काम मुसाफिर जो भी पाते काम से ज्यादा हो जाते बदनाम मुसाफिर

                                               इधर उधर मत डोल मुसाफिर बोलो दिल को खोल मुसाफिर टकराते जो वक्त से जितना वो उतना अनमोल मुसाफिर

जिसने समझा खेल मुसाफिर गया बेचने तेल मुसाफिर यह जीवन है सुमन खजाना जी लो करके मेल मुसाफिर
चलो शहर से गाँव मुसाफिर
जिसका जितना शोर मुसाफिर उतना वो कमजोर मुसाफिर मुमकिन खुद से अगर निकालो अपने मन का चोर मुसाफिर

                                                 सबकी अपनी रीत मुसाफिर अपने अपने गीत मुसाफिर मगर मूल स्वर एक सभी के मानवता से प्रीत मुसाफिर

हृदय प्रेम रस धार मुसाफिर जीवन का संचार मुसाफिर करने वाले करते रहते पत्थर से भी प्यार मुसाफिर

                                                तेरी क्या औकात मुसाफिर तू केवल जज्बात मुसाफिर जिसकी दिशा दशा पे अंकुश बदलेंगे हालात मुसाफिर

तेरे सर पे ताज मुसाफिर आती जन को लाज मुसाफिर क्योंकि जग के हर कोने में बिखरा हुआ समाज मुसाफिर

                                                चलो शहर से गाँव मुसाफिर बैठें पीपल छाँव मुसाफिर आपस में मिलने जुलने की कहाँ शहर में ठाँव मुसाफिर

बढ़े चलो दिन रैन मुसाफिर मत होना बेचैन मुसाफिर हार, जीत से सीख, मिले तब चमक सुमन के नैन मुसाफिर
 
ज्यों मुट्ठी से रेत मुसाफिर
है रस्ता बस एक मुसाफिर राही मिले अनेक मुसाफिर कौन साथ हो किसको छोड़ें रखना सदा विवेक मुसाफिर

                                              खबरों का संचार मुसाफिर क्या समाज बीमार मुसाफिर अपराधों की खबरों से ही भरा पड़ा अखबार मुसाफिर

देना इक सन्देश मुसाफिर मिटे सभी का क्लेश मुसाफिर अपना अपना फर्ज निभा ले सुन्दर होगा देश मुसाफिर

                                               जीवन है संग्राम मुसाफिर करना होगा काम मुसाफिर आगे नित बढ़ना ही जीवन यहाँ कहाँ विश्राम मुसाफिर

हैं जो भी मजबूर मुसाफिर दिल से कर मंजूर मुसाफिर प्यार बाँटने से मुमकिन हो उन आँखों में नूर मुसाफिर

                                               भाव हृदय हो श्वेत मुसाफिर समय समय पर चेत मुसाफिर कहीं सफलता निकल न जाए ज्यों मुट्ठी से रेत मुसाफिर

गीत सुमन के प्रीत मुसाफिर हार कहीं तो जीत मुसाफिर याद करो उस मीठे पल को मिले जहाँ मनमीत मुसाफिर
मूरख समझे देह मुसाफिर
कहना है आसान मुसाफिर देना मुश्किल मान मुसाफिर नारी बिनु क्या मोल पुरुष का कर नारी सम्मान मुसाफिर

                                                नारी है संगीत मुसाफिर है नारी तो प्रीत मुसाफिर हारी महिला, हार पुरुष की जीत गयी तो जीत मुसाफिर

नर नारी का मेल मुसाफिर समझ इसे मत खेल मुसाफिर सृजन करे पर नर की खातिर नारी एक नकेल मुसाफिर

                                                 कोई कहता नर्क मुसाफिर कोई बेड़ा गर्क मुसाफिर पुरुष पूर्ण नारी बिनु कैसे तेरा क्या है तर्क मुसाफिर

होंगे सब निष्प्राण मुसाफिर कर तबतक निर्माण मुसाफिर नर नारी कारण, दुनिया में आते नूतन प्राण मुसाफिर

                                                 जब खोला अखबार मुसाफिर लगा, हुआ बीमार मुसाफिर खबर कई देखा, नारी पर कितना अत्याचार मुसाफिर

नारी तो बस नेह मुसाफिर मूरख समझे देह मुसाफिर बढ़े सुमन विश्वास परस्पर कैसा फिर संदेह मुसाफिर
सीख हार से जीत मुसाफिर
पहले पढ़ना कर्म मुसाफिर तब लेखन है धर्म मुसाफिर उड़ा लिया दूजे की रचना तब तो ये दुष्कर्म मुसाफिर

                                          है लेखन में वाद मुसाफिर करते लोग विवाद मुसाफिर प्रतिभाएं उलझीं तर्कों में जिसका है अवसाद मुसाफिर

लिखो, मिलेंगे फूल मुसाफिर सम्भव मिलना धूल मुसाफिर आदम को इन्सान बनाना हो रचना का मूल मुसाफिर

                                            सबकी अलग दुकान मुसाफिर चाह, मिले नादान मुसाफिर स्वारथ में लेखकगण भूले लेखन कार्य महान मुसाफिर

बड़े बड़े हैं नाम मुसाफिर देखा उनके काम मुसाफिर नहीं आचरण जैसा लिखते जय जय सीताराम मुसाफिर

                                             प्रायोजित सम्मान मुसाफिर लेखन का अपमान मुसाफिर भिड़े हुए सब इस जुगाड़ में मिले कहीं जजमान मुसाफिर

सीख हार से जीत मुसाफिर बनो सुमन के मीत मुसाफिर गाये जाये लोक - कंठ में लिखना वैसा गीत मुसाफिर
भाषा है पहचान मुसाफिर
किसी देश की शान मुसाफिर भाषा है पहचान मुसाफिर मिलजुल कर हम सभी बढ़ायें हिन्दी, हिन्दुस्तान मुसाफिर

                                               जब हिन्दी में बात मुसाफिर तब जगते जज्बात मुसाफिर उत्तर से दक्षिण तक जोड़े हिन्दी में औकात मुसाफिर

भाषा का संचार मुसाफिर रोज बढ़ाये प्यार मुसाफिर एक सूत्र में सबको बाँधे हिन्दी को अधिकार मुसाफिर

                                               घर घर में सम्वाद मुसाफिर हिन्दी है आबाद मुसाफिर अपन राष्ट्र की भाषा क्या है जब से हम आजाद मुसाफिर

अपनी बोली बोल मुसाफिर हर भाषा अनमोल मुसाफिर मगर राष्ट्रभाषा निश्चित हो इसका भी है मोल मुसाफिर

                                               राष्ट्र एकता मूल मुसाफिर नमन राष्ट्र को फूल मुसाफिर मगर राष्ट्रभाषा निर्धारित हुई नहीं, यह भूल मुसाफिर

हिन्दी हो धनवान मुसाफिर शब्द शब्द उन्वान मुसाफिर भारत के घर घर में हिन्दी यही सुमन अरमान मुसाफिर
अच्छे दिन के ख्वाब मुसाफिर
अपना हिन्दुस्तान मुसाफिर सचमुच बहुत महान मुसाफिर खेती है आधार जहाँ पर मरते रोज किसान मुसाफिर

                                               लोकतंत्र से प्यार मुसाफिर चुनते हम सरकार मुसाफिर पर देखो संसद में अक्सर होती रहती मार मुसाफिर

क्या बेहतर संयोग मुसाफिर जाग रहे हैं लोग मुसाफिर है कुदाल सी नीयत सबकी अब नैतिकता रोग मुसाफिर

                                                जला रहे जो बाग मुसाफिर घूम रहे बेदाग मुसाफिर भूल गए जनता के दिल में सुलग रही है आग मुसाफिर

अच्छे दिन के ख्वाब मुसाफिर सपनों को आदाब मुसाफिर और देख बहुमत की आँखें है जिसमें सैलाब मुसाफिर

                                                 देखा सालों साल मुसाफिर शासक करे कमाल मुसाफिर तब राजा अब मंत्री करते जनता को कंगाल मुसाफिर

जब से हम आजाद मुसाफिर देश हुआ आबाद मुसाफिर मान सुमन है व्यभिचारी को प्रतिभाएं बर्बाद मुसाफिर
मूल्यों की अब शाम मुसाफिर
दफ्तर में आदेश मुसाफिर खबर और संदेश मुसाफिर बिकते सबकुछ भौतिकता में बेचे जाते देश मुसाफिर

                                             अजब सियासी खेल मुसाफिर अलग कभी तो मेल मुसाफिर कैसे जीत उन्हें मिलती जो जाते अक्सर जेल मुसाफिर

मूल्यों की अब शाम मुसाफिर ममता भी नीलाम मुसाफिर जोड़ तोड़कर रिश्ते पाओ माँ बनने के दाम मुसाफिर

                                            मिल जाते कुछ ठीक मुसाफिर कुछ दिल के नजदीक मुसाफिर किसी किसी को मिलते शायद अपने लिए सटीक मुसाफिर

रिश्ते कई अजीब मुसाफिर प्रीतम मिले नसीब मुसाफिर जिसके संग जीते क्या होते दिल के वही करीब मुसाफिर

                                             एक बचाता जान मुसाफिर दूजा देता ज्ञान मुसाफिर शिक्षक और चिकित्सक मानो हैं जिन्दा भगवान मुसाफिर

करते सभी बखान मुसाफिर गीता और कुरान मुसाफिर सुमन आचरण देखो उनका बेच रहे ईमान मुसाफिर
वही कुशल रंगरेज मुसाफिर
चाहे जितने मोड़ मुसाफिर तू हिम्मत ना छोड़ मुसाफिर खट्टे मीठे हर अनुभव से लोगों को भी जोड़ मुसाफिर

                                             सबके अपने साज मुसाफिर अलग सभी के राज मुसाफिर राज, साज मिलते आपस में बनते तब हमराज मुसाफिर

खबर सनसनीखेज मुसाफिर भुना रहे जो तेज मुसाफिर रंग चढ़ाये अपना उस पर वही कुशल रंगरेज मुसाफिर

                                             सुर अपना हो ताल मुसाफिर तब सुलझे जंजाल मुसाफिर हरपल भूख जिसे कुछ सीखें करता वही कमाल मुसाफिर

प्रीतम से जब नैन मुसाफिर मिले हृदय को चैन मुसाफिर लेकिन ऐसे पल कितने कम दिखे सभी बेचैन मुसाफिर
कर लो कुछ विश्राम मुसाफिर
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 श्यामल किशोर झा
लेखकीय नाम :  श्यामल सुमन
वर्तमान पेशा :  प्रशासनिक पदाधिकारी टाटा स्टील, जमशेदपुर, झारखण्ड, भारत

साहित्यिक कार्यक्षेत्र :  छात्र जीवन से ही लिखने की ललक, स्थानीय ,समाचार पत्रों सहित देश के प्रायः सभी स्तरीय पत्रिकाओं में अनेक समसामयिक आलेख समेत कविताएँ, गीत, ग़ज़ल, हास्य-व्यंग्य आदि प्रकाशित

स्थानीय टी.वी. चैनल एवं रेडियो स्टेशन में गीत, ग़ज़ल का प्रसारण, कई राष्ट्रीय स्तर के कवि-सम्मेलनों में शिरकत और मंच संचालन अंतरजाल पत्रिका “अनुभूति,हिन्दी नेस्ट, साहित्य कुञ्ज, साहित्य शिल्पी, प्रवासी दुनिया, प्रवक्ता, गर्भनाल, कृत्या, लेखनी, आखर कलश आदि मे अनेकानेक  रचनाएँ प्रकाशित गीत ग़ज़ल संकलन “रेत में जगती नदी” – (जिसमे मुख्यतया मानवीय मूल्यों और  संवेदनाओं पर आधारित रचनाएँ हैं) प्रकाशक – कला मंदिर प्रकाशन दिल्ली , “संवेदना के स्वर” – कला मंदिर प्रकाशन में प्रकाशनार्थ , “अप्पन माटि” – मैथिली गीत ग़ज़ल संग्रह – प्रकाशन हेतु प्रेस में जाने को तैयार

सम्मान - पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा प्रेषित प्रशंसा पत्र -२००२ , साहित्य-सेवी सम्मान – २०११ – सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मलेन , मैथिल प्रवाहिका छतीसगढ़ द्वारा – मिथिला गौरव सम्मान २०१२
नेपाल के उप प्रधान मंत्री द्वारा विराट नगर मे मैथिली साहित्य सम्मान – जनवरी २०१३ ,अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन संयुक्त अरब अमीरात में “सृजन श्री” सम्मान – फरवरी २०१३
Email ID – shyamalsuman@gmail.com phone – : 09955373288

अपनी बात - इस प्रतियोगी युग में जीने के लिए लगातार कार्यरत एक जीवित-यंत्र, जिसे सामान्य भाषा में आदमी कहा जाता है और जो इसी आपाधापी से कुछ वक्त चुराकर अपने भोगे हुए यथार्थ की अनुभूतियों को समेट, शब्द-ब्रह्म की उपासना में विनम्रता से तल्लीन है – बस इतना ही।

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