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Friday, October 30th, 2020

मुल्यांकन के लिए कमेटी बनाने का ऐलान

आई एन वी सी न्यूज
चंडीगढ़,

कोविड महामारी के समय के दौरान नीट / जे.ई.ई. परीक्षा में कुछ ही दिन बाकी हैं, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राज्य के एडवोकेट जनरल अतुल नन्दा को निर्देश दिए कि विरोधी पार्टियों के शासन वाले अन्य राज्यों में अपने समकक्ष अधिकारियों के साथ तालमेल करके सुप्रीम कोर्ट में एक सामुहिक रिविऊ पटीशन दायर करके परीक्षाओं को आगे करने की गुज़ारिश की जाए।

यह दिशा-निर्देश कांग्रेस प्रधान सोनीयां गांधी द्वारा विरोधी पार्टियों के शासन वाले सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा की गई एक मीटिंग के बाद दिए गए, जिसमें नीट / जे.ई.ई. परीक्षाओं के अलावा अन्य साझे हितों के मुद्दे विचारे गए, जिनमें जी.एस.टी. मुआवज़े के जारी होने में देरी, केंद्र सरकार द्वारा कृषि अध्यादेश और नई शिक्षा नीति शामिल थी, जिस संबंधी कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह नीति राज्यों के साथ विचार-विमर्श किए बिना उन पर थोपी गई है।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने नीट / जे.ई.ई. परीक्षा सम्बन्धी दिए गए एक सुझाव के जवाब में कहा कि इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए प्रधानमंत्री से समय लेने का समय अब नहीं है और सभी को इकठ्ठा होकर यह परीक्षा आगे करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटकाना चाहिए, क्योंकि इन परीक्षाओं के साथ लाखों ही विद्यार्थियों की जान को ख़तरा हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि समूची दुनिया में परीक्षाएं ऑनलाइन ढंग से ली जा रही हैं और यह सुझाव दिया कि नीट / जे.ई.ई. और अन्य पेशे से जुड़ीं परीक्षाएं जैसे कि मैडीकल और कानून, ऑनलाइन ढंग से करवाई जा सकती हैं और इसलिए विद्यार्थियों की जान को खतरे में डालने की कोई ज़रूरत नहीं है।

यह महसूस करते हुए कि राज्यों द्वारा ज़्यादा कुछ नहीं, बस अपना हक माँगा जा रहा है, मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि विरोधी पार्टियों के शासन वाले राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री को मिलकर जी.एस.टी. हरजाना और कोविड से लडऩे के लिए माली सहायता जारी करवाने की माँग करें। उन्होंने कहा कि जी.एस.टी. के द्वारा हम कर प्रणाली से सम्बन्धित सभी अधिकार प्रधानमंत्री को दे दिए हैं और दूसरी ओर अब यह कहा जा रहा है कि शायद वह अब इसका भुगतान करने में असमर्थ होंगे। ऐसे में हम अपने राज्यों का कामकाज कैसे चलाऐंगे। उन्होंने विरोधी पार्टियों के शासन वाले सभी राज्यों को अपने हक के लिए इक_े होकर लडऩे का न्यौता भी दिया।

मुख्यमंत्री ने यह भी खुलासा किया कि उनकी सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति के पंजाब की शिक्षा प्रणाली और वित्तीय हालत पर पडऩे वाले प्रभावों का मुल्यांकन करने के लिए एक कमेटी भी बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि हरेक राज्य का अपना ही एक राज प्रबंध होता है, जिसको राष्ट्रीय शिक्षा नीति का ऐलान करने के समय पर केंद्र सरकार ने ध्यान में नहीं लिया।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि मौजूदा स्थिति के मुताबिक पंजाब विधानसभा के सत्र से दो दिन पहले राज्य के 23 मंत्री / विधायक कोविड की चपेट में आ चुके हैं और यदि राज्य के विधायकों और मंत्रियों का यही हाल है तो ज़मीनी स्तर पर स्थिति कितनी गंभीर होगी, इसका सिफऱ् अंदाज़ा ही लगाया जा सकता है। इसलिए यह समय अब भौतिक रूप में परीक्षा लेने का नहीं है।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने मीटिंग में बताया कि कॉलेजों / यूनिवर्सिटियों के लिए लाजि़मी फ़ाईनल टर्म की परीक्षा के मुद्दे पर बार-बार दलीलों और याद दिलाने के बावजूद यू.जी.सी. उनकी सरकार की चिंताओं पर ध्यान देने में नाकाम हुई है। उन्होंने अपनी सरकार द्वारा शिक्षा को दी गई महत्ता का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने स्कूलों के विद्यार्थियों को पिछली कारगुज़ारी के आधार पर अगली कक्षा में करने का पहले ही फ़ैसला कर लिया था, जबकि कॉलेजों की फ़ाईनल टर्म की परीक्षाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने पूछा, ‘‘कोविड के शिखर पर जाने की संभावना के साथ सितम्बर में हम परीक्षाएं कैसे करवा सकते हैं?’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं भी चाहता हुँ कि विद्यार्थी इम्तिहान दें और पास हों परन्तु इनको मैं कोविड संकट के बीच कैसे करवा सकता हूँ?’’

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्र द्वारा एस.सी. विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम बंद करने के फ़ैसले का मुद्दा भी उठाया, जिसकी उनके राज्य में संख्या 3.17 लाख है। उन्होंने कहा कि गरीब एस.सी. विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप बंद करने का केंद्र सरकार को कोई हक नहीं था, बल्कि वह तो चाहते थे कि उनके राज्य में सभी गरीब विद्यार्थी पढ़े-लिखे हों। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़े वित्तीय संकट के मद्देनजऱ उनके पास तो वेतन और अन्य मौजूदा वचनबद्धाओं को पूरा करने के लिए राशि नहीं है और वह कैसे आशा कर सकते हैं कि इन स्कॉलरशिपों का भुगतान भी वह करें।

राज्य को पेश वित्तीय संकट संबंधी विस्तार में खुलासा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र 31 मार्च, 2020 के बाद जी.एस.टी. मुआवज़ा जारी करने में असफल रहा है, जो कि 7000 करोड़ रुपए की राशि बनती है, जिसके न मिलने के कारण कोविड संकट के चलते पंजाब को मुश्किल स्थिति में डाल दिया। कोविड का संख्या राज्य में 44000 पार कर गया है और 1178 मौतें हुई हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा, ‘‘अगर भारत सरकार हमें हमारा जी.एस.टी. मुआवज़ा नहीं देती तो वह हमसे कैसे काम करने की उम्मीद कर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि राज्य अपने आप प्रबंधन नहीं कर सकते और केंद्र की सहायता की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि पंजाब को कोविड के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के पास से दो किस्तों में 102 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं और 31 करोड़ रुपए की तीसरी किस्त अभी बाकाया पड़ी है।

उन्होंने कहा कि महामारी के खि़लाफ़ लडऩे के लिए राज्यों को फंडों की ज़रूरत है, जो कि अब शहरों से गाँवों की तरफ जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य को पहली तिमाही में 21 प्रतिशत का राजस्व घाटा पड़ा है और मौजूदा वित्तीय वर्ष के बाकी रहते 9 महीनों के दौरान नुकसान की दर 28.9 प्रतिशत रहने के अनुमान हैं। उन्होंने कहा कि कोविड के मद्देनजऱ राजस्व घाटे के कारण भारत सरकार ने किसी भी राजस्व घाटे के लिए अनुदान की इजाज़त नहीं दी, जिससे लगता है कि केंद्र को राज्यों की समस्याओं में कोई भी रूचि नहीं है।

इससे पहले अपने शुरुआती संबोधन में सोनीयां गांधी ने कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा किसान विरोधी और संघीय ढांचे विरोधी भारत सरकार के कृषि अध्यादेशों संबंधी अभव्यक्त की गई चिंता का जि़क्र किया।

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