Monday, October 21st, 2019
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मायावती ने रखी लोकतंत्र की सभी मर्यादाएं ताक पर - सपा

आई.एन.वी.सी,, लखनऊ,, समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी ने कहा है कि मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र की सभी मर्यादाएं ताक पर रख दी हैं और वे सामंती आचरण कर रही हैं। प्रदेश को उन्होने अपनी जागीर मान लिया है और उनका घर परिवार राजवंश बन गया है। संविधान और जनतंत्र के लिए यह गम्भीर और खतरनाक स्थिति है। इस मानसिकता वाली मुख्यमंत्री के रहते उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव होने असम्भव है। अब चुनाव आयोग और महामहिम राज्यपाल अगर तत्काल हस्तक्षेप कर मुख्यमंत्री की मनमानी पर रोक नहीं लगाते हैं तो उन्हें अपने संवैधानिक कर्तव्य के निर्वहन में कोताही नहीं करनी चाहिए। 14 अक्टूबर,2011 को मुख्यमंत्री मायावती नोएडा में सेन्ट्रल पार्क समेत ग्रेटर नोएडा में कई परियोजनाओं का उद्घाटन करने जा रही हैं। नोएडा में “राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल“ में मुख्यमंत्री ने अपने साथ अपने माता पिता की भी मूर्तियां लगवाकर नैतिकता को पूरी तरह तिलांजलि दे दी है। वे देश की एकमात्र ऐसी नेता है जिन्होने अपने जिन्दा रहते ही अपनी मूर्तियां राजधानी में जगह-जगह लगवाई हैं। इसी दिन मुख्यमंत्री ने अपने पैतृक गांव बादलपुर में एक हैलीपैड की भी व्यवस्था कर ली है। इस तरह कथित “दलित की बेटी“ राजसी ठाठबाट से लखनऊ से अपने गांव तक हवाई उड़ान से आ जा सकेगी। मुख्यमंत्री इतनी भयग्रस्त हैं कि उन्हें सुरक्षा का घेरा बढ़ाते रहना ही अच्छा लगता है। उनके नोएडा, ग्रेटर नोएडा के दौरे में हजारों सुरक्षाकर्मी डयूटी पर होगें। इनमें एक एसएसपी, सात एएसपी, बीस डीएसपी, 70 इंस्पेक्टर, २२९ दरोगा, 1350 सिपाही, 20 महिला दरोगा, 62 महिला सिपाही, 11 पीएसी कम्पनी के अलावा यातायात व्यवस्था में इतनी ही पुलिस एक  इंस्पेक्टर, सौ दरोगा, 83 एचसीपी और 180 सिपाही लगाए गए है। स्मारक सुरक्षा के जवान भी बुला लिए गए हैं। मुख्यमंत्री की सामंती मानसिकता के चलते जनता की गाढ़ी कमाई लुटा रही है। उन्हें दलित महापुरूषों की प्रतिष्ठा की फिक्र नहीं, अपने को स्थापित करने की ज्यादा चिन्ता रहती है। सत्ता से हटने की असंदिग्ध  सम्भावना को देखते हुए उन्होने अपने स्मारकों की सुरक्षा के लिए करोड़ों रूपए फूंककर स्मारक सुरक्षा वाहिनी भी बनाई है। लेकिन वे भूल जाती है कि समय के शिलालेख पर न जाने कितने लेख बनते और मिटते हैं। उनका नाम उनके पद से हटते ही मिट जाएगा क्योंकि उन्होने अपने राज में हर वर्ग को प्रताड़ित किया है, राज्यकर्मियों का भयादोहन किया है। लूट तथा झूठ के ज्यादा दिन चलने वाले नहीं है। प्रदेश जिस संक्रमणकालीन स्थिति से गुजर रहा है और सरकारी राजकोष पर जैसी डकैती पड़ रही है उसके मद्देनजर चुनाव आयोग और महामहिम राज्यपाल महोदय दोनेां को सजग, सतर्क होकर लोकतंत्र को राजशाही में बदले जाने की मानसिकता पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।

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