मायावती द्वारा जिलाधिकारी लखनऊ को स्कूली ड्रेस सम्बन्धी आदेश तत्काल निरस्त करने के निर्देश

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सुरेंदर अग्निहोत्री ,,

लखनऊ ,,

उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने लखनऊ के जिलाधिकारी को स्कूली ड्रेस सम्बन्धी आदेश को तत्काल निरस्त करने के सख्त निर्देश दिये हैंं।

ज्ञातव्य है कि आज मीडिया के माध्यम से मुख्यमन्त्री को यह खबर मिली कि जिलाधिकारी, लखनऊ ने राजधानी के छात्र-छात्राओं को स्कूल/कालेज यूनीफार्माें में सार्वजनिक स्थानोंं यथा-सिनेमा घर, मॉल, पार्क, रेस्टोरेन्ट, होटलों में स्कूल/कालेज टाइम में स्कूली ड्रेस में जाने से प्रतिबन्धित कर दिया है और यह भी कहा है कि स्कूली ड्रेस में इन स्थानों पर पाये जाने पर छात्र-छात्राओं के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि जिलाधिकारी का यह आदेश पूरी तरह अनुचित और अव्यवहारिक है। लखनऊ :: 09 मई, 2010:: बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी द्वारा आगामी विधान सभा चुनाव के लिए पार्टी की उम्मीदवारी हासिल करने के इच्छुक लोगों से चन्दा मांगे जाने पर आश्चर्य व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि दो साल बाद होने वाले विधान सभा चुनाव के नाम पर सपा द्वारा अभी से आवेदन पत्र के साथ 10-10 हजार रूपये जमा कराये जा रहे हैं जो वापस नहीं किए जायेंगे। ऐसा लग रहा है कि यह पार्टी चन्दा वसूली के एक-सूत्रीय कार्यक्रम में जुट गई है, जबकि सपा ने अपने शासनकाल में घोटालों को अन्जाम देकर और धन्ना सेठों को फायदा पहुंचाकर अरबों रूपये कमाये थे।

श्री मौर्य ने कहा कि सभी जानते हैं कि प्रदेश की पूर्ववर्ती सपा सरकार के शासनकाल में थैलीशाहों और पूंजीपतियों के दलाल की तरह राजनीति करने वाले लोगों की तूती बोलती थी। ऐसे लोगों ने सरकार को गिरवीं रखकर अपने धन्नासेठ दोस्तों को करोड़ो रूपये का फायदा पहुंचाया, जिसके एवज में सपा के पार्टी फण्ड में मोटी रकम जमा हो गई थी। ऐसे तत्वों ने समाजवादी विचारधारा को सुविधावादी विचारधारा में बदलकर तथा सपा नेताओं को फाइव स्टार कल्चर में ढाल कर अपना उल्लू सीधा किया और चलते बने।

बी0एस0पी0 के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि दलाली से वसूली गई धनराशि के साथ-साथ तत्कालीन सपा सरकार में जिम्मेदार पदों पर रहे लोगों ने अनेक घोटाले भी किये थे। इन घोटालों से भी अरबों रूपये अवैध तरीके से कमाये गये थे। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि घोटालों और दलाली से जमा की गई धनराशि को लेकर कोई भाग गया है, जिसके चलते सपा को अब अपनी राजनीति की दुकान चलाने के लिए अपनी पार्टी में रेट फिक्स करने पड़े हैं।

श्री मौर्य ने कहा कि सपा द्वारा विधान सभा चुनाव के लिए सम्भावित उम्मीदवारों से धनराशि जमा कराये जाने के साथ ही, पार्टी के मुखपत्र “समाजवादी बुलेटिन´´ का आजीवन शुल्क भी अलग से लिया जा रहा है। इसी के साथ सपा सांसदों और विधायकों से भी पच्चीस-पच्चीस हजार रूपये जमा करने को कहा गया है और लोहिया वाहिनी जैसे संगठनों से जुड़ने वाले लोगों के लिए 20 हजार रूपये की धनराशि तय की गई है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सपा के इस हथकण्डे से यह बात एक बार फिर साबित हो गई है कि वह धन हड़पने के लिए ही राजनीति को माध्यम बना रही है। उन्होंने कहा कि विधान सभा चुनाव की दूर-दूर तक कोई सुगबुगाहट न होने के बावजूद उम्मीदवारी के लिए पैसा जमा कराये जाने की योजना से साफ जाहिर है कि सपा ने लहर गिनकर पैसा कमाने का तरीका इजाद कर लिया है और इससे ऐसा लगता है कि इस पार्टी की आर्थिक स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है।

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