Friday, February 28th, 2020

मानव जाति महर्षि वाल्मीकि की ऋणी : मुख्यमंत्री

valmiki jayantiआई एन वी सी,
देहरादून, पूरी मानवता महर्षि वाल्मीकि की ऋणी है, जिन्होंने मनुष्य जाति को भगवान राम से मिलाया। प्रदेश सरकार सीतामढ़ी में लगने वाले मेले को राज्य स्तरीय मेले के रूप में आयोजित करेगी। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जायेगी। प्रदेश में स्वच्छकारों के लिये बीमा आधारित पेंशन योजना शुरू की जायेगी। सफाई कर्मियों के मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि की जायेगी। शहर के एक बडे चैराहे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर किया जायेगा। यह बात मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को शिवाजी धर्मशाला में महर्षि वाल्मीकि के जन्मोत्सव समारोह पर प्रदेशीय वाल्मीकि समाज कल्याण समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कही।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि पूरी मानव जाति महर्षि वाल्मीकि की ऋणी है, जिन्होंने हमें भगवान राम से मिलाया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने मनुष्य रूप में जन्म लेकर मानव कल्याण के लिए जो संदेश दिये है, वो आज भी प्रासंगिक है। रामायण के समान कोई अन्य ग्रन्थ नही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का नाता उत्तराखण्ड से भी रहा है। ऐसा इतिहास में है। सीतामढ़ी में आज भी उनकी याद में मेला आयोजित होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सीतामढी में लगने वाले मेले को राज्य स्तरीय मेले के रूप में विकसित करेगी। इसके लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जायेगी।
उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समाज का प्रदेश व देश के विकास में अहम योगदान है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि स्वच्छकारों के लिए बीमा आधारित पेंशन योजना लागू की जायेगी। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके साथ ही सफाई कर्मियों के मानदेय में 500 रुपये की अतिरिक्त वृद्धि की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून शहर के किसी बड़े चैराहे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर किया जायेगा। उन्होंने कहा कि 15-20 वर्षाें से कार्यरत सफाई कर्मचारियों के नियमितिकरण पर भी विचार किया जायेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने भव्य शोभायात्रा का भी शुभारम्भ किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी सुरेन्द्र कुमार, तथा मीडिया समन्वयक राजीव जैन, कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना, मनोज कुमार, प्रदेशीय वाल्मीकि समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष नाट्य भूषण लक्ष्मीनारायण, मुख्य संयोजक अरूण वाल्मीकि, मीनू घागट, सोम प्रकाश वाल्मीकि, आदि उपस्थित थे।

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