Thursday, February 27th, 2020

मात्र कानून बना देने से समाज में बदलाव नहीं आ सकता : भूपेन्द्र सिंह हुड्डा

आई एन वी सी,, हरियाणा,, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने समाज के विशेषरूप से, गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को त्वरित एवं प्रभावी न्याय दिलवाने के लिए एक तंत्र सृजित एवं क्रियान्वित करने पर बल दिया क्योंकि देशभर में विशेषरूप से, महिलाओं एवं कमजोर वर्गों के विरूद्घ अपराध के मामलों में शीघ्र न्याय दिलवाने की मांग हो रही है। श्री हुड्डा जो आज यहां चण्डीगढ़ न्याय अकादमी द्वारा ‘गरीब को घरद्वार पर न्याय तथा कानूनी सहायता’ विषय पर आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे, ने कहा कि हरियाणा समाज के सभी वर्गों तथा निचले स्तर पर न्याय सुनिश्चित करने में काफी हद तक सफल रहा है। कमजोर वर्गों को वास्तवकि रूप से उनके अधिकार एवं आजादी दिलवाने की प्रक्रिया को राष्ट्र के समक्ष एक कठिन चुनौती बताते हुए श्री हुड्डा ने कहा कि लोग मेें सब्र नहीं रहा है तथा उनकी अपेक्षाएं दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही हैं। श्री हुड्डा ने कहा कि हम सौभाग्यशाली है कि लोगों में न्याय प्रणाली के प्रति अब भी विश्वास है। हम सभी को यह सुनिश्चित करना है कि यह विश्वास न डगमगाए। उन्होंने कहा कि इस विश्वास को बनाए रखना इसलिए बहुत जरूरी है क्योंंकि कई बार हमारे समाज के कुछ वर्गों ने हमारी उन लोकतांत्रिक संस्थाआें की वैधता पर प्रश्न उठाए हैं, न्यायपालिका जिसका एक अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि इन प्रवृत्तियों को हतोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान तथा संस्थागत तंत्र हर प्रकार की शिकायतों को दूर करने के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है। इसका उद्देश्य केवल कानूनी न्याय ही नहीं बल्कि सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करना भी है। सम्मेलन के एक विषय‘ग्राम न्यायालयों के माध्यम से न्याय प्रदान करना’ का जिक्र करते हुए श्री हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 के तहत दो ग्राम न्यायालय अधिसूचित किए गए हैं, जिनमें से एक जिला कुरूक्षेत्र के शाहबाद में और दूसरा सिरसा के रानिया में है। शाहबाद न्यायालय वर्ष 2010 से संचालित है और रानिया न्यायालय भी शुरू होने वाला है। श्री हुड्डा ने इस योजना के लिए केन्द्रीय सहायता के मानदण्डों को संशोधित करने की मांग करते हुए सुझाव दिया कि आधारभूत संरचना के लिए वित्तीय सहायता को बढ़ाकर कम से कम 50 लाख रुपये और आवर्ती खर्च के लिए 15 लाख रुपये मासिक किया जाना चाहिए और राज्य सरकार द्वारा इतनी ही राशि दी जानी चाहिए। राज्य में उपलब्ध न्यायिक आधारभूत संरचना का उल्लेख करते हुए श्री हुड्डा ने कहा कि हरियाणा जिला एवं उपमण्डल स्तर पर 45 स्थलों से संचालित 437 न्यायालयों के साथ उच्च गुणवत्तापरक आधारभूत संरचना से लैस है। इसके अतिरिक्त, नए न्यायिक परिसर स्थापित किए गए हैं और कई परिसर विभिन्न स्थलों पर स्थापित किए जा रहे हैं। न्यायिक सेवाएं सभी लोगों की सुगम पहुंच में है। श्री हुड्डा ने कहा कि उच्च न्यायालय के दिशानिर्देश के तहत आवश्यकता होने पर परिवार न्यायालय तथा बाल न्यायालय सहित विशेष न्यायालय गठित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने लोक अदालत तथा निःशुल्क कानूनी सहायता की अवधारणा को गरीब लोगों के लिए बहुत उपयोगी बताते हुए कहा कि हरियाणा में अब तक 17,000 से अधिक लोक अदालतों में 13 लाख मामलों का निपटान किया गया है। उन्होंने कहा कि निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करने की पात्रता के लिए राज्य सरकार द्वारा वार्षिक आय की अधिकतम सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये किया गया है जोकि देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि हम कानूनी विवादों का आपसी सुलह एवं सहायता के माध्यम से निपटान किए जाने को प्रोत्साहित करने के प्रयास भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि न्यायिक निष्पादन प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए 13वें वित्तायोग अनुदान के तहत 24.46 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए गए है। इसके तहत, हरियाणा के 18 जिलों में वैकल्पिक विवाद प्रस्ताव (एडीआर) केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। ये केन्द्र एक सांझे मंच के रूप में कार्य करेंगे, जहां लोक अदालत, मध्यस्थता केन्द्र जैसे एडीआर के सभी माध्यम उपलब्ध होंंगे। श्री हुड्डा ने कहा कि राज्य में सभी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों तथा कॉलेजों में विधि साक्षरता क्लब स्थापित किए जा रहे हैं और अब तक 1544 स्कूलों तथा 171 कॉलेजों में ऐसे क्लब खोले जा चुके हैं। इन विधि साक्षरता क्लबों में विद्यार्थियों को विभिन्न कानूनों के बारे जागरूक करने के लिए हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण तथा जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरणों के माध्यम से अधिवक्ताओं की सेवाएं ली जा रही हैं। श्री हुड्डा ने विधि साक्षरता को प्रोत्साहित करने के लिए हर नागरिक से सहयोग की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि मात्र कानून बना देने से समाज में बदलाव नहीं आ सकता, गरीब एवं जरूरतमंद लोगों में विश्वास उत्पन्न करने के लिए उनका उचित क्रियान्वयन भी आवश्यक है। श्री हुड्डा ने लोगों की मानसिकता को बदलने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केवल तभी हम सभी नागरिकों को निष्पक्ष न्याय पर आधारित बेहतर जीवन की गारंटी दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चण्डीगढ़ न्याय अकादमी को पूर्ण सहयोग दे रही है और साथ ही सिविल अधिकारियों, सरकारी वकीलों तथा पुलिस अधिकारियों को कानून एवं विधि प्रक्रियाओं में प्रशिक्षण देने पर विशेष बल भी दे रही है। उन्होंने कहा कि हमारी राज्य अभियोग नीति का मुख्य उद्देश्य विभिन्न अदालतों में मुकदमों के मामलों को कम करना और जनसाधारण विशेषकर, महिलाओं, बच्चों, गरीबों, अनुसूचित जातियों आदि को उनके अधिकारियों के प्रति जागरूक करना है। हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण निःशुल्क विधिक सेवाएं प्रदान करके तथा शिविर एवं कार्यशालाएं आयोजित करके इस सम्बंध में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। केन्द्रीय कानून एवं न्याय मंत्री डॉ० अश्वनी कुमार ने कहा कि यह सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है कि न्याय प्रणाली में लोगों का विश्वास अक्षुण बना रहा। घर द्वार पर न्याय के आन्दोलन और गरीबों के लिए कानूनी सहायता को और आगे ले जाने के लिए उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का आभार व्यक्त किया और राज्य सरकार से अनुरोध किया कि केन्द्र सरकार के सहयोग से इसे लोगों के व्यापक हित में आगे चलाया जाए। मंत्री ने विश्वास दिलाया कि इस मिशन के लिए धन की कमी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष दायर होने वाले 2 करोड़ नए मामलों के साथ देश में 3 करोड़ मामलें लम्बित हैं। यह अत्यन्त कठिन कार्य है और न समाप्त होने वाला कार्य है परन्तु हम सभी ने इसका समाधान करना है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि केन्द्र सरकार घर द्वार पर न्याय प्रदान करने और गरीबों के लिए कानूनी सहायता के स्वप्न को साकार करने में कोई कोर-कसर नहीं छोडेगी। पंजाब के मुख्यमंत्री श्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के न्यायिक परिसर देश में सर्वोत्तम है। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से आग्रह किया कि ग्राम न्यायलयों की लागत का 75 प्रतिशत खर्च केन्द्र सरकार द्वारा वहन किया जाए। पंजाब एवं हरियाणा के मुख्य न्यायधीश न्यायामूर्ति श्री ए.के.सीकरी ने हरियाणा सरकार की गरीबों के लिए घर द्वार पर न्याय और कानूनी सहायत प्रदान करने की विभिन्न पहलों के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अनेक स्कूलों में विधिक साक्षरता क्लब पहले ही स्थापित हो चुकें हैं जो लगभग 24 लाख विद्यार्थियों को कवर कर रहें हैं। इसके अतिरिक्त हरियाणा पहला राज्य है जिसने मोबाईल कोर्ट शुरू की। न्यायामूर्ति श्री ए.के.सीकरी ने इस कार्यक्रम को घर द्वार पर न्याय सुनिश्चित करने के एक मिशन के रूप में चुनने के लिए केन्द्रीय मंत्री का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायलय के जज न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एम.जयपौल, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायलय, जिला अदालतों के अनेक जज, न्यायायिक अधिकारी तथा हरियाणा, पंजाब व संघीय क्षेत्र चण्डीगढ़ के अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

Comments

CAPTCHA code

Users Comment